November 26, 2020

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धनतेरस 2020: सिर्फ बर्तन ही नहीं धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी रही है परपंरा,जानिए क्या है वजह

धनतेरस पर सोना, चांदी, भूमि, वाहन और बर्तन खरीदने की परंपरा रही है. इस दिन झाड़ू खरीदना भी बहुत शुभ माना गया है.

नई दिल्ली |धनतेरस इस वर्ष 13 नवंबर, शनिवार को पड़ रहा है. धनतेरस पर सोना, चांदी, भूमि, वाहन और बर्तन खरीदने की परंपरा रही है. मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु जल्द खराब नहीं होती बल्कि उसमें कई गुना वृद्धि होती है.

धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने की भी परंपरा रही है. दरअसल  धार्मिक ग्रंथों के अनुसार झाड़ू में मां लक्ष्मी वास होता है. झाड़ू को सुख-शांति की वृद्धि करने वाली और दुष्ट शक्तियों का सर्वनाश करने वाली बताया है.

पौराणिक मान्यता है कि झाड़ू से घर की दरिद्रता मिटती है. विशेष रूप से धनतेरस को घर में नई झाड़ू लगाने से कर्ज से भी मुक्ति मिलती है.

झाड़ू के विशेष महत्व को देखते हुए घर में इसे रखने के कई नियम प्रचलित हैं. झाड़ू को घर में सभी से छिपा कर रखा जाता है. सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू नहीं लगाई लगाई जाती है.

झाड़ू को कभी भी खड़ा करके नहीं रखना चाहिए.  मान्यता यह भी है कि झाड़ू को खड़ा रखने से शत्रु बाधा उत्पन्न करते है। इसलिए झाड़ू को लिटा कर या छुपा कर रखा जाता है.

यह ध्यान रखना चाहिए कि झाड़ू को भूलकर भी घर के किसी सदस्य का पैर नहीं लगे  क्योंकि इसे अप्रत्यक्ष रूप से मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है.

धनतेरस के दिन इन 4 चीजों की भूलकर भी न करें खरीदारी, मानी जाती है बहुत ही अशुभ:

आइए, जानते हैं कि इस दिन किन-किन चीजों की खरीदारी नहीं करनी चाहिए.

लोहे से बने सामान की न करें खरीदारी

धनतेरस के दिन लोहे से बने सामानों की खरीदारी नहीं करनी चाहिए. इसके कई कारण हैं, लेकिन इनमें से सबसे प्रमुख जो कारण है वह यह है कि इस दिन लोहे से बनी वस्तुओं को खरीदने से घर-परिवार पर राहु की अशुभ छाया पड़ने लगती है. ऐसी मान्यता है कि लोहे के सामान खरीदने से लोगों की परेशानियां बढ़ जाती हैं.

भूलकर भी न खरीदें शीशे का बना सामान

धनतेरस के दिन शीशे से बने सामान को भी नहीं खरीदना चाहिए. ऐसी लोक मान्यता है कि शीशे का भी संबंध राहु से ही होता है. शीशे का सामान खरीदने पर राहु की दृष्टि हमेशा बनी रहती है, जिसके चलते लोग परेशान रह सकते हैं.

स्टील का बर्तन न खरीदें

आम तौर पर लोग धनतेरस के दिन खरीदारी करने के नाम पर बाजार में जाकर बिना सोचे-समझे कुछ भी खरीद लेते हैं. ऐसा वे जानकारी के अभाव में भी कर लेते हैं, लेकिन इस दिन स्टील से बनी चीजें नहीं खरीदनी चाहिए. इसके पीछे भी एक ही लोक मान्यता है कि स्टील भी लोहा का बदला हुआ या दूसरा रूप है. इसलिए स्टील से निर्मित वस्तुओं की खरीदारी करने से राहु की छाया पूरे साल भर तक पड़ती रहेगी. स्टील की बजाय आप तांबे या कांसे का बर्तन आदि खरीद सकते हैं.

काले रंग के सामान को भी मत खरीदें

धनतेरस सबसे शुभ दिन माना जाता है और इस दिन घर पर काले रंग की चीजों को लाने से बचना चाहिए. काला रंग अशुभ या दुर्भाग्य का प्रतीक है. धनतेरस प्रगति और सौभाग्यदायी दिन है. इसलिए धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों की खरीदारी करने से हमेश बचना चाहिए.

धनतेरस और नरकचतुर्दशी तिथि मनाने को लेकर है असमंजस, जानिए सही तिथि

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव यानि दिवाली के पर्व का आंरभ हो जाता है जो भाई दूज तक चलता है। धनतेरस पर धनवंतरी भगवान की पूजा का प्रावधान है तो वहीं इस दिन कुछ लोग शिव प्रदोष व्रत भी करत है। धनतेरस के अगले दिन चतुर्दशी तिथि होती है। जिसे नरकचतुर्दशी, रुपचौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भी मासिक शिवरात्रि का व्रत करके लोग नरकचतुर्दशी का पूजन करते हैं। लेकिन इस बार यह त्योहार 5 दिन की बजाय 4 दिन का पड़ रहा है। तिथियों को हेर-फेर के कारण लोग उलझन में हैं कि किस दिन क्या किया जाए। अगर आप भी इसी असमंजस की स्थिति में है कि धनतेरस का पूजन कब करें और नरकचतुर्दशी कब मनाएं तो आपकी उलझन दूर हो सकती है।

जानिए त्रयोदशी और चतुर्थी तिथि के मुहूर्त की पूरी जानकारी…

ग्रह नक्षत्रों की गणना के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी तिथि 12 नवंबर दिन गुरुवार को रात 9:30 पर आरंभ हो जाएगी जो 13 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 5:59 बजे तक रहेगी। त्रयोदशी तिथि के उदया तिथि और प्रदोष काल में होने की वजह से 13 नवंबर दिन शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाना शुभ रहेगा। जो लोग प्रदोष व्रत करेंगे उनके लिए भी धनतेरस का दिन शुभ रहेगा।
13 नवंबर की संध्या समय पर 51:59 से चतुर्थी तिथि लगेगी जो 14 नवंबर को दोपहर के समय 2:18  बजे तक रहेगी।  

चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय से पूर्व स्नान करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार जिस जिन चतुर्दशी तिथि लगी हो उसी दिन रूप चतुर्दशी का स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे रूप सौंदर्य की प्राप्ति होती है और मृत्यु के पश्चात मनुष्य को यमलोक के दर्शन नहीं होते हैं। इसलिए चतुर्दशी तिथि का स्नान 13 नवंबर को ही किया जाएगा। 

जो लोग नरकचतुर्दशी का व्रत करते हैं और मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं, उन्हें भी इस बार धनतेरस के दिन यानि 13 नवंबर को ही व्रत करना चाहिए। 13 नवंबर को चतुर्दशी का व्रत करने पीछे कारण है कि जिस दिन मध्यरात्रि के समय चतुर्दशी आरंभ होती है उसी दिन व्रत करने का प्रावधान होता है। चतुर्दशी तिथि को ही मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। 14 नवंबर के दिन मध्य रात्रि के समय अमावस्या तिथि होगी। इस कारण 14 नवंबर को चतुर्दशी का व्रत करने पर वह दिवाली व्रत के रुप में मान्य होगा। 14 नवंबर की रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। 

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