November 26, 2020

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

सरदार पटेल के सपनों का भारत;

राष्ट्राय नम:

सरदार पटेल के सपनों का भारत

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका;

वास्तव में राष्ट्र निर्माण एक ऐसी परिकल्पना है जिसमे राष्ट्र से जुड़े हर पहलू का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
कुछ लोग राष्ट्र निर्माण मात्र और मात्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं परन्तु राष्ट्र निर्माण मात्र राजनीती से ही नही होता .राष्ट्र निर्माण होता है राष्ट्रवासी से यदि देश में निवास करने वाला प्रत्येक राष्ट्रवासी यह ठान ले कि हमें अन्याय नहीं सहना है अन्याय नहीं करना है तो राष्ट्र निर्माण की वह बुनियाद पड़ेगी कि युगों के बीतने पर भी राष्ट्र की ईमारत बुलंद रहेगी . मैं निजी तौर पर राष्ट्रनिर्माण में युवाओं के प्रतिनिधित्व कि बात करता हूँ उसका कारण यह है कि आज देश के विकास एवं राष्ट्र निर्माण के लिए जो महत्वपूर्ण बिंदु हैं वह हैं शिक्षा ,उद्योगधंधे , सैन्य क्षमता , कृषि ,एवं राजनीति .मेरे मुताबिक ये पांच क्षेत्र ऐसे हैं जो यदि किसी भी देश में अपनी संपूर्ण शक्ति एवं क्षमताओं से कार्य करें तो उस देश के विकास को कोई नहीं रोक सकता . इन सभी क्षेत्रों में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपर्ण है यह बात सभी जानते हैं .
हम यदि शिक्षा की बात करें तो यह पायेंगे कि आज का विद्यार्थी जो कि युवा ही होता है ही भविष्य का डॉक्टर , इंजीनियर, वकील, उद्योगपति, शिक्षक होगा और राष्ट्र निर्माण में महती भूमिका अदा करेगा ।।

अब बात आती है उद्योग धंधों की तो इस बात से किसी को कोई ऐतराज़ नहीं होगा कि जिस देश का औद्योगिक ढांचा जितना दुरुस्त होगा उस देश के सबसे ज्यादा समय या यों कहें कि हमेशा शिखर पर रहने की संभावनाएँ भी उतनी ही प्रबल होंगी और ये बात तो सर्वविदित है कि उद्योग धंधों के विकास में युवाओं कि कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है . प्रत्येक औद्योगिक इकाई में युवाओं के अत्यधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है कोई भी उद्योगपति या बड़ी से बड़ी कंपनी अपने कामगारों कि फौज में अधिक से अधिक युवाओं को देखना चाहती है क्यूंकि युवा ऊर्जा को सभी दोहित करना चाहते हैं और यही उद्योग धंधों एवं देश के विकास के लिए आवश्यक भी है . और हमारे देश के लिए यह अत्यंत गौरव की बात है कि शिक्षा एवं उद्योग में संपूर्ण विश्व में युवाओं का सर्वाधिक प्रतिनिधित्व रखने के कारण ही अमेरिका जैसे सर्वशक्ति मान देश के राष्ट्रपति को भी भयाक्रांत कर दिया है और उसे अपने देश के छात्रों को भारतीय युवा मेघा से सतर्क रहने कि चेतावनी देने पर विवश कर दिया है .

हम अपने देश की क्या बात करें आज नासा में कार्य करने वाले गैर अमेरिकियों में सर्वाधिक संख्या भारतियों की है माइक्रोसोफ्ट में कार्य करने वालों में ६० प्रतिशत भारतीय हैं ये आंकड़े भारतीय युवाओं कि प्रतिभा की कहानी खुद ही बयां करते हैं .

देश को सामरिक दृष्टि से सुरक्षित तथा देश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा प्रदान करने के सन्दर्भ में सैन्य क्षमता एवं पुलिस प्रशासन कि बात आती है तो उसमे तो युवाओं की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इस क्षेत्र में जितना अधिक युवाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा वह देश उतना ही अधिक सुरक्षित रहेगा .

फिर हम बात करते हैं कृषि क्षेत्र की जो कि अत्यंत महत्व का विषय है क्योंकि इसके कारण ही देश कि दाल रोटी चलती है ,और इस क्षेत्र में युवाओं कि सहभागिता का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है हमारे देश में यदि पंजाब हरियाणा एवं पशिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र कृषि उपज के मामलों में सबसे आगे है तो उसका एकमात्र कारण वाहन के युवाओं कि इस क्षेत्र में ज्यादा सहभागिता होना है वहाँ का युवा वर्ग शहरों कि तरफ भागने की अपेक्षा अपने गांव में ही रहकर कृषि क्षेत्र में अपनी असीम ऊर्जा के बलबूते पर अपने प्रदेशों को कृषि उपज में अग्रणी बनाये हुए हैं . चूँकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारत की अर्थव्यस्था बहुत हद तक कृषि पर निर्भर करती है इसलिए इस क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता .

कुल मिला कर हम यह देखते है कि इन चारों क्षेत्रों में जिनकी मैंने अभी तक चर्चा की युवाओं कि भूमिका कितना अधिक महत्व रखती है .वास्तविकता में मैं अपने राष्ट्र कि युवा शक्ति कोऊर्जा एवं संसाधनों कि उस बहुमूल्य सम्पदा के रूप में देखता हूँ जिसको कि यदि हमने उसकी योग्यताओं एवं सम्पूर्ण क्षमताओं के साथ पोषित करने में सफलता प्राप्त कर ली तो मेरा यह विश्वास है कि २१ वीं एदी को भारत कि सदी होने से कोई नहीं रोक पायेगा।

I strongly belive no one can stop 21st century from being india’s century.

एक अन्य क्षेत्र है जिसका कि अभी तक कोई जिक्र नहीं हुआ है पर वास्तव में वह सबसे अधिक महत्व का क्षेत्र है और वह है राजनीति का क्षेत्र यह सर्वाधिक महत्व का इसलिए है क्यूंकि ऊपर जिक्र किये गए चारों क्षेत्रो के लिए नीतियां बनाने या यों कहें कि उन्हें नियंत्रित करने का कार्य इसके द्वारा ही होता है आज हमारे देश में संसद सर्वोच्च शक्ति है इसी के द्वारा क़ानून इत्यादि बनाये जाते हैं. देश कि उन्नति एवं विकास का मार्ग राजनीति के गलियारों से ही होकर जाता है .प्रश्न यह उठता है कि शिक्षा , सैन्य तथा पुलिस प्रशासन , कृषि एवं उद्योग आदि क्षेत्रो में जब हम युवाओं के ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व की बात करते हैं तो इन सब को नियंत्रित करने वाली संस्था जिसे हम राजनीति नाम देते हैं क्यूँ इतनी बूढी है क्या इस क्षेत्र में युवाओं को आगे नहीं आना चाहिए .आज समय है राजनीति में भी युवा वर्ग के आगे आने का और लोग आ भी रहे है और नित नए कीर्तिमान बना भी रहे है परन्तु यह प्रतिशत अभी कम है इसको और अधिक होना चाहिए .

कुछ लोग मेरे विचारों सहमत नहीं हैं और ये भी तर्क दें रहे हैं कि अनुभवी लोगों की राजनीति में ज्यादा उपयोगिता है और अपने पक्ष में अनेक उदहारण भी लोगों ने दिए, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी , सरदार वल्लभ भाई पटेल हो, जवाहर लाल नेहरु लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही कई लोगों का उदाहरण दिया कुछ ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया मै भी उनका समर्थन करता हूँ कि इन सभी महापुरषों ने अपने अनुभवी दृष्टिकोण से देश को एक नए दिशा प्रदान की लेकिन इन सभी ने अपने अनु भवों को पल्लवित करने में अपनी जवानी कुर्बान की थी
वे भी युवा ही थे जब उन्होंने राष्ट्र सेवा के संकल्प को अपने जीवन का ध्येय बनाया .और बात यदि स्वामी विवेकाननद कि होती है तो वे तो युवा आदर्श के रूप में पूरे विश्व में विख्यात हैं उन्होंने अपने युवा जीवन काल में ही वे उपलब्धियां प्राप्त कर ली थी जो आज के परिद्रश्य के राजनीतिज्ञों के पूरे जीवन पर भारी पड़ती है सभी महापुरुष अपने युवा काल में अर्जित किये गए अनुभवों के आधार पर ही महा पुरुष बने

मैं अनुभव को दरकिनार नहीं करता परन्तु यदि युवा वर्ग को आगे आने का अवसर नहीं मिलेगा तो कैसे वह अनुभव प्राप्त करेगा आप युवाओं की दस खामियां तो गिनाते हैं परन्तु आज के तथाकथित अनुभवी राजनीतिज्ञों की कारगुजारियों पर क्यूँ चुप हो जाते हैं कुछ एक अपवादों को यदि छोड़ दिया जाय तो लगभग हर दल ने अपने तथाकथित अनुभवी राजनीतिज्ञोंके अनुभवों का ऐसा मदिरापान करा दिया है कि जनता उसके सुरूर से उबर नहीं पाई है ये तथा कथित अनुभवी लोग जनता कि गाढ़ी कमाई को खुलेआम लूट रहे हैं और मात्र और मात्र अपनी स्वार्थपूर्ति कर रहे है देश की भोली भली जनता को बेवकूफ समझते हैं सदयों से लूटते रहे हैं और आगे भि लूटते रहेंगे यदि अभी भी युवा वर्ग ना चेता तो जब तक यह युवा वर्ग अनुभवी होगा उसके करने के लिए कुछ बचेगा ही नही. हम सिर्फ यही कह कर चर्चाओं में शामिल होते रहेंगे कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता परन्तु अब और नहीं सहेंगे हम युवाओं को चर्चाओं के मंच से बाहर निकल कर वास्तविकता की कसौटी पर स्वयं को साबित करना ही होगा और अपने हक को उनसे प्राप्त करना ही होगा
मांग कर नहीं अब छीन कर लेंगे
और इस देश कि तस्वीर बदल देंगे
नहीं सहेंगे भ्रष्टाचार और नित नए घोटाले
तोड़ देंगे सारे ख्वाब जो है वो पाले
जंजीर बढ़ा कर बाँधने कि
कोशिश ना अब करना
हर एक वार का अब
हिसाब होगा भरना
सदियों की ये व्यवस्था झकझोर कर रहेंगे
पर अब इस इस देश की तस्वीर बदल देंगे ……तस्वीर बदल देंगे .

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