November 26, 2020

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UP 69000 शिक्षक भर्ती मामला: टूटा शिक्षामित्रों का सपना, SC ने कहा- 40/45 नहीं 60/65 ही रहेगा कटऑफ

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के 69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले (69000 Shikshak Bharti) में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि कट ऑफ 60 से 65 ही रहेगा. इससे उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के रूप में योग्यता प्राप्त करने के लिए लगभग 38 हजार शिक्षा मित्रों को कट-ऑफ अंकों में छूट नहीं मिलेगी. हालांकि, सभी शिक्षा मित्रों को एक मौका और मिलेगा.

69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले में पहले ही  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर को 31661 पदों को एक हफ्ते में भरने का निर्देश दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाकी बचे हुए 37339 पदों पर भर्ती का रास्ते भी साफ हुआ. इन पदों पर यूपी सरकार के मौजूदा कट ऑफ 60/65 के आधार पर भर्ती होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया जिसमें कहा गया था कि नए कट ऑफ की वजह से नौकरी से वंचित रह गए शिक्षा मित्रों को अगले साल एक और मौका दिया जाएगा.

शिक्षामित्रों की क्या थी दलील?

दरअसल, छात्रों के एक गुट का कहना था कि सरकार का परीक्षा के बाद कट ऑफ निर्धारित करना गलत है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6 मार्च को यूपी सरकार के फैसले को सही मानते हुए भर्ती प्रक्रिया को तीन महीने के अंदर पूरा करने का आदेश दिया था लेकिन कट ऑफ मार्क्स को लेकर शिक्षामित्रों ने विरोध किया और इलाहाबाद HC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. शिक्षामित्रों का कहना है कि लिखित परीक्षा में टोटल 45357 शिक्षामित्रों ने फॉर्म डाला था, जिसमें से 8018 शिक्षामित्र 60-65% के साथ पास हुए लेकिन इसका कोई डेटा नहीं है कि कितने शिक्षामित्र 40-45 के कटऑफ पर पास हुए, इसीलिए 69000 पदों में से 37339 पद रिजर्व करके सहायक शिक्षक भर्ती की जाए या फिर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर स्टे किया जाए.

शिक्षा मित्रों का कहना है कि असिस्टेंट टीचर की भर्ती परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 45 फीसदी और रिजर्व कैटगरी के लिए 40 फीसदी रखा गया था लेकिन पेपर के बीच में उसे बढ़ा दिया गया और उसे 65-60 फीसदी कर दिया गया. यह गैर कानूनी कदम है क्योंकि पेपर के बीच में कटऑफ नहीं बढ़ाया जा सकता है. शिक्षामित्रों ने यह भी कहा कि साथ ही दलील दी गई कि बीएड स्टूडेंट इस असिस्टेंट टीचर की परीक्षा के लिए पात्रता नहीं रखते क्योंकि उन्होंने ब्रिज कोर्स नहीं किया है. असिस्टेंट टीचरों के लिए ये जरूरी है कि आवेदक छह महीने का ब्रिज कोर्स करें.

UP सरकार ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस ललित ने पूछा था कि क्या 40/45 कटऑफ को पार करने वाले सभी 40 हजार शिक्षामित्र और बाकी बचे 29 हजार पदों पर दूसरे कैंडिडेट सलेक्ट होंगे?’ इस पर ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि योग्यता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. हमारे पास 50 हजार पद हैं और प्रति वर्ष 10,000 लोग रिटायर हो रहे हैं. हम अलग से भर्ती में मौका देने को तैयार हैं लेकिन योग्यता के साथ.’  ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि राज्य में 3 लाख 94,000 कुल अभ्यर्थियों की संख्या 40-45% पर है जो कुल आंकड़ों का 96.2% है. अभ्यर्थियों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद कटऑफ बढ़ना स्वभाविक है.

बता दें कि 69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था. उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती का मामला बीते 2 सालों से विवादों में घिरा हुआ है, लेकिन अभी तक इन भर्तियों को पूरा नहीं किया जा सका है. पहले यह मामला परीक्षा के कट ऑफ को लेकर कोर्ट में अटका हुआ था, जिसमें छात्रों के एक गुट का कहना था कि सरकार का परीक्षा के बाद कट ऑफ निर्धारित करना गलत है. 

इसके बाद सरकार ने पिछली बार की तुलना में ज्यादा कट ऑफ निर्धारित कर दी थी. इसी बात को लेकर पूरा विवाद शुरू हुआ और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया. लंबे समय तक कोर्ट में यह मामला रहा और अंत में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6 मार्च को यूपी सरकार के फैसले को सही मानते हुए भर्ती प्रक्रिया को तीन महीने के अंदर पूरा करने का आदेश भी दे दिया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सीएम योगी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को 1 हफ्ते के अंदर निपटाने के आदेश दिए थे. लेकिन कट ऑफ मार्क्स को लेकर शिक्षामित्रों ने विरोध किया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी. इसके अलावा UP सरकार के 31,661 पदों को भरने के आदेश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में BTC छात्रों की वकील रितु रेनुवाल ने याचिका दायर कर 31,661 पदों की भर्ती के यूपी सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि 69 हज़ार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है. ऐसे में जब तक SC का फैसला नहीं आता है, 31,661 पदों की भर्ती के यूपी सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जाए. बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर को 31,661 पदों को एक हफ्ते में भरने का निर्देश दिया था.


क्या है उत्तर प्रदेश का 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला

  • दिसंबर, 2018 में उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली.
  • उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक पदों के लिए 6 जनवरी 2019 को करीब चार लाख अभ्यार्थियों ने लिखित परीक्षा में हिस्सा लिया. एक दिन बाद सरकार की तरफ से कट ऑफ मार्क्स का मानक तय कर दिया.
  • शिक्षक भर्ती की परीक्षा का पेपर 150 नंबर का था. परीक्षा में पास होने के लिए सामान्य वर्ग के कैंडिडेट को 150 में से 97 और आरक्षित वर्ग से आने वाले अभ्यर्थी को 150 में से 90 नंबर लाने थे. सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित कैंडिडेट के लिए 60 प्रतिशत कट ऑफ तय किया गया था.
  • उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले 68500 पदों के लिए सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें पास होने के लिए आरक्षित वर्ग के लिए 40 और सामान्य वर्ग के 45 प्रतिशत का कट ऑफ तय किया गया था, जिसे इस बार बढ़ाकर सामान्य वर्ग के लिए 65 और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी कर दिया गया.
  • शिक्षक भर्ती परीक्षा के 60-65 प्रतिशत कट ऑफ पर कुछ अभ्यर्थियों को असंतोष हुआ. शिक्षक भर्ती मामले में दो गुट सामने आए, जिनमें एक शिक्षामित्रों और दूसरा बीएड-बीटीसी वालों का ग्रुप था. शिक्षामित्र 60-65 प्रतिशत कट ऑफ का विरोध करते हुए हाईकोर्ट चले गए.
  • शिक्षामित्रों के मामले पर 11 जनवरी, 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाया. योगी सरकार हाईकोर्ट में हार गई. हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती की कट ऑफ को सामान्य वर्ग के लिए 45 और आरक्षित वर्ग के लिए 40 फीसदी तय कर दिया.
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के 40-45 कट ऑफ के ऑर्डर के खिलाफ 22 मई, 2019 को योगी सरकार ने डिविजन बेंच में अपील की. बीएड और बीटीसी वाले कैंडिडेट्स ने भी सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर दी.
  • हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर 22 मई से 19 सितंबर 2019 तक सात बार सुनवाई हुई. इस बीच एक भी बार यूपी सरकार के महाधिवक्ता हाईकोर्ट नहीं आए. इसे लेकर हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार भी लगाई. कोर्ट में महाधिवक्ता को बुलाने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने लखनऊ में धरना भी दिया. इस दौरान छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसे लेकर काफी सवाल खड़े हुए थे.
  • हाईकोर्ट में 3 मार्च, 2020 को सुनवाई पूरी हुई थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था. 6 मई, 2020 को जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की बेंच ने फैसला सुनाया.
  • हाईकोर्ट ने योगी सरकार को राहत देते हुए सरकार द्वारा तय किए गए कट ऑफ (90-97) नंबर पर ही भर्ती कराने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया था.
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करते हुए बेसिक शिक्षा के 69,000 शिक्षकों की भर्ती के मामले में उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दी थीं. साथ ही भरोसा भी दिलाया था कि एक हफ्ते के अंदर भर्ती पूरी कर ली जाएगी. 
  • योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए काउंसलिंग शुरू कराई. कुछ अभ्यर्थी चार प्रश्नों को गलत बताते हुए फिर कोर्ट चले गए. कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए 12 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की.
  • हाईकोर्ट के फैसले से जहां बीएड-बीटीसी कैंडिडेट खुश थे तो वहीं शिक्षामित्रों ने असंतोष जाहिर किया है. हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट शिक्षामित्रों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक भर्ती की 3 जून से 6 जून तक होने वाली काउंसलिंग पर रोक लगा दी.
  • शिक्षक भर्ती मामले में गड़बड़ी के मामले भी सामने आए हैं. कई सामान्य वर्ग के लोग आरक्षित कोटे के तहत आ गए हैं. इसी शिक्षक भर्ती के टॉपरों ने 150 में से 143 अंक अर्जित करके सबको चौंका दिया था. शिक्षक परीक्षा में फर्जीवाड़े मामले में यूपी एसटीएफ और प्रयागराज पुलिस ने छापेमारी कर 8 नकल माफियाओं को गिरफ्तार किया.
  • सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों की अपील पर 9 जून 2020 को शिक्षक भर्ती केस में सुनवाई करते हुए 69000 हजार पदों में से 37339 पदों को होल्ड करने का आदेश दिया है. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से रिपोर्ट मांगी है कि शिक्षामित्रों के कितने अभ्यर्थियों ने अरक्षित वर्ग की 40 और सामान्य वर्ग के 45 फीसदी के कटऑफ पर परीक्षा पास की.
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