October 2, 2022

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अगले 30-40 साल तक रहेगा बीजेपी का युग, भारत बनेगा विश्व गुरु’, गृहमंत्री अमित शाह का दावा

Hyderabad BJP Meeting: हैदराबाद में की बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनेंगी, जहां पार्टी अभी तक सत्ता से दूर है.

आखिर इतने आत्मविश्वास में क्यों हैं मोदी-शाह?

नई दिल्ली : 2024 के लोकसभा चुनावों में अभी करीब दो साल का वक्त है लेकिन हैदराबाद में भाजपा की दो दिन की महाजुटान ने अभी से एजेंडा सेट कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि अगले 30-40 वर्षों तक भाजपा का युग रहेगा और तब जाकर भारत विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि तेलंगाना और पश्चिम बंगाल समेत उन सभी राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनेंगी, जहां पार्टी अभी तक सत्ता से दूर है। उनके इस बयान की काफी चर्चा है। सुरक्षित और समृद्ध भारत की बात करते हुए भाजपा ने जो ‘मिशन 2050′ तय किया है, सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। इसमें एक चर्चा यह भी है कि मोदी सरकार इतने आत्मविश्वास में क्यों है? क्या विपक्ष में उसे चुनौती देने का दमखम नहीं दिख रहा है? दरअसल, शाह ने ’40 साल भाजपा के’ वाली बात यूं ही नहीं की। आज का सियासी परिदृश्य देखिए तो भाजपा का भगवा ग्राफ देश में बढ़ता दिखाई देता है। 2014 के बाद बीते आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे लोकप्रिय चेहरे के दम पर भाजपा ने जातिवाद, क्षेत्रवाद जैसे कई बने बनाए समीकरण ध्वस्त किए और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा बुलंद किया।

भाजपा के आगे सब फॉर्म्युले फेल
भाजपा के नेता 2014 के बाद आत्मविश्वास से लबरेज दिखे। उनका टारगेट असंभव सा दिखाई देता लेकिन कठिन परिश्रम और मजबूत कैडर के दम पर भाजपा सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गई। 300 प्लस का नारा, अब नारा नहीं हकीकत बन चुका है। भाजपा के आत्मविश्वास की सबसे बड़ी वजह उसे विजय रथ को रोकने वाली ताकत का सीन में न होना है। हाल ही में रामपुर और आजमगढ़ इन दो मुस्लिम प्रभाव वाले क्षेत्रों में लोकसभा उपचुनाव हुए। इन दोनों सीटों को सपा का गढ़ समझा जाता था, जिसके पीछे मुस्लिम+यादव समीकरण का फॉर्म्युला सामने रखा जाता था लेकिन भाजपा ने उसे ध्वस्त करते हुए कमल खिला दिया। दोनों सीटों से भाजपा के उम्मीदवार जीते। इससे देश में संदेश गया है कि अब जातिवाद या एक तबके का तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां भाजपा को परास्त नहीं कर सकती हैं।

 

 

दक्षिण में भाजपा से जुड़ेंगे युवा वोटर
नॉर्थ के साथ भाजपा ने साउथ पर भी फोकस किया है। हिंदुत्व की लहर का धर्मों और जातियों में विभाजित तेलंगाना पर असर पड़ना तय है। हैदराबाद में मोदी के मंथन से युवा कार्यकर्ताओं का रुझान भाजपा की ओर बढ़ेगा। याद कीजिए, 2014 के लोकसभा चुनाव के समय भाजपा पूर्वोत्तर राज्यों की चर्चा खूब करती थी, 2019 में देश के 18 राज्यों में भाजपा का विस्तार हो गया, ऐसे में 2024 से पहले अब ‘लुक साउथ’ की ओर बढ़ने का यह सही समय माना जा रहा है।

देश में लंबे समय तक शासन करने वाले दलों द्वारा की गई गलतियों से सीख लें, जो आज अपना अस्तित्व बचाने में लगे हुए हैं। भाजपा का लक्ष्य भारत को तुष्टिकरण से तृप्तिकरण की ओर ले जाना है।
….पीएम मोदी, भाजपा कार्यकर्ताओं से

मोदी का मंत्र
हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने पार्टी पदाधिकारियों को जीत का मंत्र देते हुए अल्पसंख्यकों तक पहुंचने, तुष्टिकरण से तृप्तिकरण की ओर देश को ले जाने और अस्तित्व बचाने में लगी पार्टियों की गलतियों से सीख लेने की नसीहत दी। इसमें तीनों ही पॉइंट भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं विपक्ष के लिए भी बड़ा संदेश समेटे हुए है। ‘अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली भगवा पार्टी’ जैसी विपक्षी आलोचना का जवाब देने के लिए पीएम ने समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने के लिए पार्टी के सदस्यों से ‘स्नेह यात्रा’ करने की बात कही है। आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि कांग्रेस या दूसरी विपक्षी पार्टियां भाजपा को ऐंटी-मुस्लिम के तौर पर प्रोजेक्ट करती रही हैं। लेकिन पीएम मोदी लगातार अल्पसंख्यकों तक पहुंच बनाने या अपनी नीतियों और फैसलों से उन तक पहुंचने की कोशिश करते रहते हैं। वह चाहे तीन तलाक का मसला हो या कुछ और। भाजपा देशवासियों को संदेश देने में कुछ हद तक कामयाब भी रही है कि वह किसी का तुष्टिकरण नहीं करेगी बल्कि सबके विकास की दिशा में कदम बढ़ाएगी।

 

विपक्ष कमजोर तभी…
शाह को यह बात अच्छे से पता है कि उनका मिशन 2050 एजेंडा तभी कामयाब होगा जब विपक्ष कमजोर होगा। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सिमटती जा रही है। आज राजस्थान को छोड़कर किसी भी बड़े राज्य में उसकी सरकार नहीं है। विपक्षी एकजुटता की बात होती भी है तो अब ऐंटी बीजेपी के साथ क्षेत्रीय दल ऐंटी-कांग्रेस मोर्चा बनाने की बात करने लग जाते हैं। हिंदी भाषी बड़े राज्यों के दलों का हाल देखें तो उनके अस्तित्व का संकट दिखाई देने लगता है। दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी ने अपने दम पर पंजाब की सत्ता भले ही हासिल कर ली हो, पर उसका राष्ट्रीय प्रभाव देखा जाना अभी बाकी है। दूसरी तरफ भाजपा पूर्वोत्तर से लेकर गुजरात तक और हिमाचल से लेकर दक्षिण तक अपना जनाधार मजबूत करती जा रही है।

पार्टियों की राजनीति कैडर या कहिए कार्यकर्ताओं के मजबूत कंधों पर ही टिकी होती है। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए मोदी ने रविवार को कहा कि हमारे कार्यकर्ता न थके हैं, न झुके हैं और न रुके हैं। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा के कार्यकर्ता देश के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के भाजपा के मूलमंत्र को दोहराया। पीएम का साफ इशारा उन राज्यों की तरह था जहां विपक्षी दलों की सरकारें हैं। जाहिर है हैदराबाद मंथन से भाजपा साउथ के राज्यों में सरकार बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। बंगाल में उसका प्रदर्शन शानदार रहा, भले ही वह सरकार नहीं बना पाई लेकिन अगले चुनाव के लिए वह पूरे उत्साह में है।

कांग्रेस की गलतियों से सबक!
मोदी ने यह भी कहा, ‘विपक्षी पार्टियों की स्थिति बहुत खराब है। हमें उनकी इस स्थिति से सीख लेनी है कि वे कौन सी बुराई और कमियां हैं, जिनके कारण वे इतने नीचे आ गए, जनता से दूर होते गए और लगातार दूर होते ही जा रहे हैं। हमें उन चीजों से अपने आप को बचाए रखना है, क्योंकि हम अपने लिए नहीं, बल्कि मातृभूमि के लिए कार्य कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने पर कई पार्टियों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है, जबकि भाजपा जिन राज्यों में दशकों तक सत्ता में नहीं थी, वहां भी पार्टी का कैडर रहा और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। दूसरी तरफ कांग्रेस का हाल देखिए तो पार्टी पूरी तरह से बिखर चुकी है। उसके पास पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नहीं है। राहुल गांधी अभी तक कोई चमत्कार नहीं दिखा सके हैं। भाजपा जब परिवारवाद पर पार्टियों को निशाना बनाती है तो उसमें कांग्रेस, सपा, बसपा से लेकर दक्षिण की पार्टियां भी लपेटे में आ जाती हैं।

दूसरी कतार में युवाओं की फौज
आज किसी भी विपक्षी दल में देखिए जिन्हें लोग सुप्रीमो या अध्यक्ष के तौर पर जानते हैं उनके पीछे नेताओं की दूसरी कतार दिखाई नहीं देती है। इसकी एक बड़ी वजह उनका वह डर भी है कि कहीं पीछे वाले आगे न निकल जाए। जबकि भाजपा को देखिए तो हर राज्य में उसने युवा नेताओं की फौज खड़ी कर दी है। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक उसका कैडर दिखाई देता है।

मुसलमानों से नजदीकी
पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में रविवार को मोदी ने सुझाव दिया कि कार्यकर्ताओं को अल्पसंख्यकों में जो वंचित और कमजोर तबका है, उनके बीच भी जाकर पहुंच बनानी चाहिए। पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा दी गई एक प्रस्तुति के दौरान प्रधानमंत्री ने यह सुझाव दिया। भाजपा ने हाल में रामपुर और आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र में हुए उपचुनावों में जीत हासिल की है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं। मोदी ने कहा कि भारतीय राजनीति में हिन्दुओं के सामाजिक समीकरणों को लेकर कई प्रयोग किए गए है और पसमांदा मुसलमानों जैसे सामाजिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों के बीच पहुंच बनाने के भी प्रयास किए जाने चाहिए। पसमांदा मुसलमानों के नेता अक्सर दावा करते हैं कि अल्पसंख्यक आबादी में 80-85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमान हैं लेकिन अल्पसंख्यक नेताओं ने अल्पसंख्यकों के नाम पर जो बातें कीं, वह वास्तव में उच्चवर्गी मुसलमानों से संबंधित हैं। पसमांदा से आशय पिछड़े या दबे-कुचले अल्पसंख्यकों से है। इस समाज के नेता कांग्रेस, समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते रहे हैं कि इन दलों ने उन्हें खूब ठगने का काम किया है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के कार्यकर्ता सिर्फ हिन्दू समाज के पिछड़े और कमजोर तबके में ही पहुंच ना बनाएं, बल्कि अल्पसंख्यकों के बीच भी जाएं और उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उन्हें मिले, यह सुनिश्चित करना चाहिए। पिछले साल भाजपा पदाधिाकरियों की एक बैठक में मोदी ने ऐसा ही एक सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी को केरल में ईसाई समुदाय तक पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि वहां उसका जनाधार मजबूत हो सके।

तुष्टिकरण और परिवारवाद पर अटैक
कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों पर भाजपा तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। हैदराबाद बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उछला। पीएम मोदी ने कहा कि परिवारवाद और परिवारवादी पार्टियों से देश पूरी तरह ऊब चुका है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि जो वर्षों तक देश की सत्ता पर काबिज रहे, वे देश हित की योजनाओं का भी अंधा विरोध करने पर उतारू हैं। जनता उन्हें न तो सुनती है, न स्वीकारती है। बस नकारती है। ऐसे दलों के लिए अब टिक पाना मुश्किल है।

मोदी ने युवा पीढ़ी को आगे लाने का आह्वान करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अधिक से अधिक युवाओं से संपर्क करें और उन्हें पार्टी से जोड़ें। हिंदुओं में गहरी पैठ के साथ अल्पसंख्यकों से जुड़ाव की कोशिश, राष्ट्रीय सुरक्षा और हिंदुत्व को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ते हुए भाजपा को जिस तरह से सफलता मिल रही है उसी ने 2050 वाला आत्मविश्वास उसे दिया है। युवा नेताओं की दूसरी कतार इस भरोसे को उम्मीद भी देती है कि मोदी-शाह तक ही भाजपा नहीं रुकने वाली, उसने अपना मिशन कई दशक आगे तक बनाया है।

 

 

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