June 18, 2021

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अरविंद केजरीवाल के बयान से खफा सिंगापुर का बड़ा एक्शन, लागू किया फेक न्यूज कानून..

नई दिल्ली| वायरस के नए स्ट्रेन को ‘सिंगापुर वेरिएंट’ बताने पर अरविंद केजरीवाल के बयान से ऐसा बवाल मचा कि भारत सरकार को सिंगापुर के सामने सफाई देनी पड़ी। अरविंद केजरीवाल के बयान पर विवाद के बाद भारत सरकार की सफाई से सिंगापुर ने बुधवार को संतोष तो जाहिर किया, मगर उसने गलत सूचना के प्रसार को रोकने लिए बड़ा कदम उठाया है। सिंगापुर सरकार ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ में एंटी मिसइनफॉर्ममेशन कानून यानी प्रोटेक्शन फ्रॉम ऑनलाइन फॉल्सहुड एंड मैनिपुलेशन कानून  (Protection from Online Falsehoods & Manipulation- POFMA) लागू कर दिया है। दरअसल, सिंगापुर में ऑनलाइन फैलाए जाने वाले झूठ को रोकने के लिए यह कानून है। यह गलत जानकारी को फैलने से रोकने के लिए बनाया गया है।

सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने POFMA दफ्तर को फेसबुक, ट्विटर और स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सामान्य सुधार-संबंधी निर्देश जारी करने को कहा है। इसका मतलब है कि इस कानून के लागू होने के बाद अब फेसबुक, ट्विटर और हार्डवेयरजोनडॉटकॉम समेत सोशल मीडिया कंपनियों को सिंगापुर में सभी एंड-यूजर्स को एक करेक्शन नोटिस भेजना होगा। इसका मतलब है कि सिंगापुर में अरविंद केजरीवाल के बयान से संबंधित कोई भी सूचना नहीं दिखाई जाएगी।

 

 

सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इसके तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों को सिंगापुर वेरिएंट के संबंध में झूट को लेकर सभी एंड-यूजर्स को एक करेक्शन और स्पष्टिकरण देना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह बताना होगा कि कोरोना का कोई सिंगापुर वैरिएंट नहीं है और न कि इसका कोई साक्ष्य है कि कोई कोरोना वेरिएंट बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। बता दें कि दिल्ली के सीएम ने मंगलवार को कहा था कि सिंगापुर में मिला नया स्ट्रेन भारत में तीसरी लहर का कारण बन सकता है, जो बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, इससे पहले सिंगापुर के उच्चायुक्त सिमोन वोन्ग ने एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कानून के लागू करने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने बुधवार को कहा था कि सिंगापुर इस दुर्भाग्यपूर्ण चैप्टर को बंद करना चाहता है और महामारी के खिलाफ साझा जंग पर फोकस करना चाहता है। नए स्ट्रेन को सिंगापुर से जोड़ने वाले केजरीवाल के ट्वीट के बाद दक्षिण एशियाई देश के साथ कूटनीतिक संबंध प्रभावित होने की नौबत आ गई। सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त को बुधवार को तलब किया गया और आपत्ति जाहिर की गई।

इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुद मोर्चा संभाला और दिल्ली के मुख्यमंत्री के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा वह भारत का पक्ष नहीं है। वोन्ग ने कहा, ”हम भारत सरकार की स्पष्ट जवाब की तारीफ करते हैं और इससे संतुष्ट हैं।” उन्होंने कहा कि एक प्रमुख राजनीतिक शख्सियत ने नई दिल्ली में तथ्यों को परखे बिना दुर्भाग्यपूर्ण बातें कहीं, जिसपर सिंगापुर ने गहरी चिंता जाहिर की है।

 

गौरतलब है कि POFMA को आमतौर पर फेक न्यूज कानून के तौर पर जाना जाता है। सिंगापुर की संसद की ओर यह कानून झूठी जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए बनाया गया है। वोन्ग ने कहा कि अहम राजनीतिक पद संभालने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे झूठ को ना फैलाएं। उन्होंने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि सिंगापुर में जांच से यह तय हो गया है कि यह B.1.617.2 वेरिएंट ही है, जो पहली बार भारत में मिला था।

कोरोना स्ट्रेन पर केजरीवाल के ट्वीट पर बढ़ा बवाल, सिंगापुर सरकार ने भारतीय हाईकमिश्नर को तलब किया

कोरोना की दूसरी लहर इस वक्त देश में अपना असर दिखा रही है, वहीं तीसरी लहर को लेकर सतर्कता भी बढ़ गई है. बीते दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसी बीच कोरोना के ‘सिंगापुर स्ट्रेन’ को लेकर चेताया था और भारत सरकार से एक्शन की अपील की थी.

पहले भारत सरकार ने अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब दिया और अब सिंगापुर की ओर से भी जवाब दिया गया है. सिंगापुर ने कड़ी आपत्ति जताई है, साथ ही भारतीय हाई कमिश्नर को तलब कर आपत्ति दर्ज कराई है.  भारत में मौजूद सिंगापुर के दूतावास की ओर से बुधवार को अरविंद केजरीवाल के ट्वीट पर जवाब दिया गया, जिसमें कहा गया कि सिंगापुर में कोरोना के नए स्ट्रेन पाए जाने की बात में कोई सच्चाई नहीं है. टेस्टिंग के आधार पर पता चला है कि सिंगापुर में कोरोना का B.1.617.2 वैरियंट ही मिला है, इसमें बच्चों से जुड़े कुछ मामले भी शामिल हैं. 

केजरीवाल के बयान से सिंगापुर खफा, MEA ने दिया जवाब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए बयान पर विवाद बढ़ गया है. सिंगापुर की सरकार ने वहां भारत के हाई कमिश्नर को तलब किया है और सिंगापुर वैरिएंट वाले ट्वीट पर आपत्ति जताई है. भारत की ओर से जवाब दिया गया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास कोविड के वैरिएंट या विमान पॉलिसी पर बोलने का अधिकार नहीं है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस विवाद पर ट्वीट किया और कहा कि सिंगापुर और भारत दोनों कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं. इस लड़ाई में सिंगापुर द्वारा भारत की जो मदद की गई है, उसके लिए उनका धन्यवाद. मैं साफ कर देना चाहता हूं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का बयान भारत का नहीं है.

सिर्फ सिंगापुर के दूतावास ही नहीं, बल्कि सिंगापुर की सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मंगलवार को प्रेस रिलीज़ जारी कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावे का खंडन किया था.

सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने भी इस मसले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जवाब दिया. उन्होंने कहा कि राजनेताओं को तथ्यों पर बात करनी चाहिए, कोरोना का कोई सिंगापुर वैरिएंट नहीं है.

दिल्ली सरकार ने जारी की सफाई इस पूरे विवाद के बीच अब दिल्ली सरकार की सफाई आई है, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि इस वक्त कोरोना के अलग-अलग स्ट्रेन हैं, जिनका जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चल रहा है. जब लंदन से फ्लाइट आ रही थी, हमने तब भी उन्हें रोकने की अपील की थी. सत्येंद्र जैन का कहना है कि पूरे विवाद पर शाम को सफाई दी जाएगी. 

क्या कहा था अरविंद केजरीवाल ने? आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ट्वीट किया था कि सिंगापुर में आया कोरोना का नया रूप बच्चों के लिए बेहद ख़तरनाक बताया जा रहा है, भारत में ये तीसरी लहर के रूप में आ सकता है. केंद्र सरकार से मेरी अपील है कि सिंगापुर के साथ हवाई सेवाएं तत्काल प्रभाव से रद्द हों, बच्चों के लिए भी वैक्सीन के विकल्पों पर प्राथमिकता के आधार पर काम हो. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही जवाब दे चुके हैं. हरदीप पुरी ने अपने ट्वीट में कहा था कि केजरीवाल जी, मार्च 2020 से ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं. सिंगापुर के साथ एयर बबल भी नहीं है. बस कुछ वन्देभारत उड़ानों से हम वहां फंसे भारतीय लोगों को वापस लाते हैं, ये हमारे अपने ही लोग हैं. फिर भी स्थिति पर हमारी नज़र है, सभी सावधानियां बरती जा रही हैं. गौरतलब है कि भारत में एक्सपर्ट्स ने चेताया है कि कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है, जिसमें बच्चों पर सर्वाधिक खतरा हो सकता है. ऐसे में अभी से तैयारियां की जा रही हैं, बीते दिनों ही भारत सरकार ने बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल की मंजूरी दी थी. 

 

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