September 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

आजादी के बाद भारत की पहली महिला जिसे फांसी होगी;

आजादी के बाद भारत की पहली महिला जिसे फांसी होगी:-

यहां पर सभी पाठकों को होगी शब्द पर ध्यान देना चाहिए

क्योंकि होगी का अर्थ यहां उस सम्भावना से है जो लगभग सुनिश्चित है।

आपको बता दें कि आजादी के बाद भारत की पहली महिला जिसे फांसी होगी

ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि फांसी की सजा प्राप्त व्यक्ति

अंत समय में राष्ट्रपति के पास जो दया याचिका डालकर क्षमा की अपील कर सकता है

वह प्रक्रिया भी हो चुकी है लेकिन इस महिला को क्षमा नहीं मिली है।

अब मात्र यह बचा है कि यह महिला जिसे आजाद

भारत में पहली बार जल्द ही फांसी की सजा मिल सकती है

अपने बचाव के लिए भारत के राष्ट्रपति के पास दया याचिका की रिव्यू याचिका फाइल करे

और अगर रिव्यू याचिका में इसे क्षमा मिल जाए तभी इसकी फांसी टल सकती है

वर्ना फांसी होना सुनिश्चित है।

हालांकि आशा में ही जीवन टिका है इस लिए यहां यह तो नहीं लिखा जा सकता कि

इस महिला की फांसी अटल सत्य है लेकिन जिस तरह की अब तक की समीक्षा है

उससे लगभग यह निश्चित है कि आजादी के बाद

भारत की पहली महिला को फांसी जल्द ही दी जा सकती है।

कौन है यह महिला जिसे फांसी होना है??
निश्चित ही आपको यह जानने की बड़ी जल्दी होगी कि यह महिला कौन है

जिसे आजादी के बाद भारत में पहली बार फांसी होने वाली है?

जी हां दोस्तों यह कहाानी है कमाल अमरोही के अमरोहा की

जहां के बावनखेड़ी नामक गांव में शबनम नाम की एक नेक लड़की रहा करती थी

आज यह बात अलग है कि बावनखेड़ी गांव के आस पास के सैकड़ों गांवों में

शबनम का इतना खौफ है कि कोई भी व्यक्ति अपनी बच्ची का नाम भूल कर भी शबनम नहीं रखता।

लोग शबनब नाम भी अपनी जुबान पर लाना पसंद नहीं करते।

दोस्तों, सवाल यह है कि यह नेक लड़की शबनम जो आज फांसी के फंदे तक जा पहुंची है

आखिर इसकी असली कहानी क्या है ?

लोगों का कहना है शबनम एक हैसियत वाले घर की बेटी थी।

गांव में उसके घर को सम्पन्न घरों में गिना जाता था।

नेक शबनम और शातिर सलीम
शबनम के पिता सरकारी नौकरी में रहे थे और शबनम के भाई भी दिल्ली में अच्छी स्थिति में थे।

शबनम खुद कालेज खत्म करने के बाद स्कूल में पढ़ लगी थी।

कालेज के दिनों में वह अपने गरीब क्लास मेट्स की फीस तक भर देती थी।

शबनम के गांव में बहुत ही कम पढा लिखा लगभग

निरक्षर और छोटे मोटे काम करके जीवन यापन करने वाला

एक गरीब परिवार का शातिर युवक सलीम भी रहा करता है।

सलीम ने पता नहीं ऐसी कौन सी फूक मारी थी कि शबनम शातिर सलीम के करीब आ गई।

शबनम और सलीम की गुस्ताखी जब शबनम के घर वालों को पता चलीं तो

पहले तो उन्हें अपनी नेक शबनम के घटिया चयन पर यकीन ही नहीं हुआ

लेकिन जब इसकी पुष्टि खुद शबनम ने की तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई।

प्यार के फसाद से फांसी तक
सलीम हकीकत में किसी भी सूरत से शबनम के लायक नहीं था।

उसकी पढ़ाई लिखाई उसकी जाति बिरादरी उसकी

गांव में हैसियत सब कुछ शबनम से तुलना करने के भी लायक नहीं था

बावजूद सच्चाई यह है कि शबनम के दिल में उसके साथ जीने मरने की

इस कदर बेताबी थी कि प्यार में अंधे होकर केवल अपना ही जीवन बर्बाद नहीं किया

बल्कि अपने साथ साथ सात आठ और भी जिंदगियों को तबाह कर डाला।

जब शबनम और सलीम को यकीन हो गया कि शबनम के परिवार वाले

उन्हें जीवन भर एक नहीँ होने देंगे तो शातिर सलीम ने

अपना शातिराना दांव चल दिया और वह सब हासिल करने की जुगत में लग गया

जिसके हसीन सपने उसने हकीकत में देखे थे।

प्यार हुआ पैसे के लिए
वह हकीकत में अगर शबनम से केवल प्यार ही करता होता

तो उसे अपने दम पर जीवन देने के लिए कहीं लेकर भाग जाता

लेकिन शातिर सलीम की हकीकत यह थी कि उसे लगता था कि

अगर शबनम उसके झांसे में आ गई तो वह मालामाल हो जाएगा।

हकीकत यही थी कि सलीम ने शबनम पर डोरे ही इसलिए डाले थे

क्योंकि शबनम रईस खानदान से थी और सलीम इसी के सहारे मालामाल होना चाहता था।

प्यार कभी किसी का बुुरा नहीं चाहता लेकिन यहां तो प्यार ही नहीं था।

शातिर सलीम ने इसी बीच शबनम के साथ उस हद को

भी पार कर गया था जो हद केवल पति पत्नी ही पार करते हैं।

शबनम चुपके चुपके ही सही अब शातिर सलीम के बच्चे की मां बनने वाली थी।

उसके पेट में सात माह का गर्भ इस बात का संकेत था कि या तो

शबनम के घर वाले उनकी बात मान लें या फिर कोई भयंकर परिणाम भुगतने को तैयार हो जाएं।

और फिर नहीं बख्शा किसी को
कहते हैं जब कुत्ते की मौत आती है तो वह शहर की

तरफ भागता है यही हुआ था शबनम और सलीम के साथ।

दोनों ने यह निश्चित किया कि अगर खुलकर ऐशो आराम से जीना है तो

शादी में आने वाले किसी भी रोड़ा को किसी भी हद तक जाकर उससे निबटना होगा।

फिर क्या था शबनम और सलीम ने वह सब करने का मन बना लिया

जिसकी वजह से आज आजादी के बाद भारत की पहली महिला

जिसे फांसी होगी वह शबनम बन गई।

जी हां, शबनम ने एक रात अपने ही घर वालों को जान से मारने की गरज से

खाने में नींद की गोली मिला दी और जब घर वाले खाना खाने के बाद बेहोश हो गए तो

सलीम को फोन करके बुला लिया ।

फिर रात में ही घर के सभी सात लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला।

शबनब का भतीजा जो सात माह का था उसे भी नहीं

बख्शा बल्कि उसे खुद शबनम ने गला घोंट कर मार डाला।

यह सब करने के बाद दोनों ने अपने तम शुदा नाटक के अनुसार भरपूर नाटक किया

और यह सिद्ध करने की कोशिश की कि लुटेरों ने सबको मार डाला।

भला हो पुलिस का जिसने जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया

और सलीम और शबनम को उनकी असली जगह पहुचा दिया।

आज उसी का परिणाम है कि शबनम और सलीम को जल्द ही फांसी होने वाली है।

अगर यह फांसी की सजा होती है जिसकी 99.99 %संभावना है तो आजादी के बाद

भारत में किसी महिला को मिलने वाली पहली फांसी शबनम को होगी।

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