June 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

आदिवासियों और द्रविड़ों का है भारत…’ रैली में BJP-RSS पर AIMIM चीफ ओवैसी का वार

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारत न तो मेरा है, न तो मोदी का है और न ही शाह का. भारत अगर किसी का है तो वो द्रविड़ों और आदिवासियों का है. ओवैसी ने कहा कि भारत तब बना जब यहां लोग अफ्रीका, ईरान, सेंट्रल एशिया और पूर्वी एशिया से आए.

महाराष्ट्र के भिवंडी में एक रैली को संबोधित किया. इस दौरान ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगारी, महंगाई की बात कोई नहीं करता. आज मुसलमानों को बीजेपी का खौफ दिखाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी-संघ ने देश में झूठ फैलाया. क्या भारत की तारीख मुगलों से शुरू हुई थी? क्या औरंगजेब ने भारत में बेरोजगारी बढ़ा दी है? मुसलमान मारे जाते हैं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? कश्मीर में एक सरकारी कर्मचारी की हत्या का जिम्मेदार कौन है?

मोदी-शाह पर बरसते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने आर्यन थिअरी (Aryan India) के पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। भारत बनने की कहानी सुनाते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत मेरा भी नहीं है…न उद्धव ठाकरे का है, न ओवैसी का है, न मोदी का है, न शाह का है, भारत अगर किसी का है तो द्रविड़ों का है आदिवासियों का है। दरअसल, इस पर दो पक्ष हैं और उनके अलग-अलग तर्क हैं। इतिहासकार भी लेफ्ट-राइट में बंटे दिखते हैं। महाराष्ट्र के भिवंडी में ओवैसी एक रैली में बोल रहे थे। यहीं पर उन्होंने ‘मीडिया को मसाला देने की बात’ करते हुए दावा किया कि भारत उन लोगों से मिलकर बना है जो अफ्रीका, ईरान, मध्य एशिया और पूर्वी एशिया से आए थे। ओवैसी के इस दावे से एक बार फिर बहस छिड़ गई है कि भारत का मूल समुदाय कौन सा है। क्या उत्तर भारत में रहने वाले लोग बाहर के देशों से आए हैं? आर्यन क्या बाहर से आकर भारत में बसे थे? या फिर द्रविड़ भारत का मूल समुदाय है?

ओवैसी बोले, 4000 साल पहले आए थे आर्य
ओवैसी ने कहा, ‘चार जगहों से लोग आए थे, तब से माइग्रेशन हो रहा है। लेकिन बीजेपी-आरएसएस वाले कहते हैं कि मुगल आए, मुगल आए। अफ्रीका से भी आए थे, ईरान से भी आए थे, सेंट्रल और ईस्ट एशिया से भी आए थे… ये सब मिले तो भारत बना। मगर आदिवासी यहां का है, द्रविड़ यहां के हैं। ये आर्यन आए थे 4000 साल पहले।’

 

मुसलमान आक्रमणकारी’ पर बोले ओवैसी
दरअसल, कश्मीर में आतंकवाद और देश के कई इलाकों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं पर सरकार को कोसते हुए ओवैसी ने देश के मुसलमानों और हिंदुओं, दलितों, ओबीसी समाज का जिक्र करते हुए कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि आज ये जो भारत है वो कैसे बना है? उन्होंने कहा, ‘आरएसएस और बीजेपी कहती है कि आक्रमण करने वाले मुसलमान आए थे। तो क्या भारत की तारीख मुगलों से शुरू हुई क्या? 65 हजार साल पहले भारत में, जो मौजूदा भारत है, ये हमारा इलाका है, उसमें 65 हजार साल पहले लोग अफ्रीका से आए थे। 45 हजार साल पहले ईरान से किसान आए थे। ईस्ट एशिया से लोग आए और फिर मध्य एशिया से लोग आए… उनको आर्यन बोलते हैं।’ यही हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत उनका भी नहीं है, भारत है तो मूल रूप से आदिवासियों और द्रविड़ों का।

क्या ओवैसी के पूर्वज ब्राह्मण थे?
उन्होंने कहा, ‘बीजेपी-आरएसएस वाले कहते हैं कि बस देश में मुगल आए। आर्य आए थे 4000 साल पहले। हैरत की बात है जब मैंने कहा कि बाबरी की तरह ज्ञानवापी मस्जिद को भी छीनने की कोशिश की जा रही है। तो सोशल मीडिया पर संघ परिवार के लोगों ने कह दिया कि ओवैसी के पूर्वज तो ब्राह्मण थे। मेरा ताल्लुक बाबा आदम से है। हमारे अब्बा कौन हैं… बाबा आदम।’ ओवैसी ने भारत को बाबा आदम की जमीन बताते हुए कहा कि औलाद से कोई हक छीन सकता है क्या? उन्होंने कहा कि बाल गंगाधर तिलक ने भी कहा था कि आर्य आर्कटिक से आए थे। भारत की आबादी की 65 फीसदी हिस्सेदारी उनकी है जो बाहर से आए थे।

 

बाबर नहीं, बाबा आदम…
दरअसल, भाजपा के नेता अक्सर बाबर से लेकर औरंगजेब का जिक्र करते रहते हैं। मुगल शासकों के बाहर से आकर भारत पर हमला करने, हिंदू मंदिरों को तोड़ने की चर्चा आए दिन होती रहती है। सड़क के नाम बदलने की मांग होती है। ज्ञानवापी मस्जिद का मसला सुर्खियों में ही है। पिछले दिनों ओवैसी औरंगजेब की मजार पर चले गए तो सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ। अब ओवैसी महाराष्ट्र आए थे तो उन्होंने खुद को बाबर या किसी मुगल शासक से नहीं बल्कि बाबा आदम से खुद को जोड़ा। इस्लाम में आदम को नबी माना जाता है और उन्हें मानव जाति के जनक का दर्जा दिया जाता है। बाबा आदम का जिक्र कर ओवैसी उस पूरे विवाद पर पानी डालना चाहते हैं जो अक्सर मुगल शासकों से जोड़कर खड़ा हो जाता है। मुगल संस्थापक बाबर उज्बेकिस्तान से आया था। ऐसे में आर्यों को भी बाहरी साबित कर ओवैसी यह संदेश देना चाहते हैं कि सिर्फ मुसलमान या मुगल आक्रमणकारी नहीं थे, आर्य भी बाहरी थे।

 

जो लोग भी आर्यन इनवेजन की थिअरी में विश्वास करते हैं, उनका प्रॉपगैंडा यह भी है कि द्रविड़ और आदिवासी तो हिंदू हैं ही नहीं। एक तबका दलितों को यह कहकर उकसाता है कि आप हिंदू हो ही नहीं। अब ओवैसी के आर्य बनाम द्रविड़ का कार्ड उछालने से विवाद बढ़ सकता है। राजनीतिक गलियारे से भी प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं।

क्या आर्य बाहर से आए थे? राखीगढ़ी से मिला सबूत
दशकों से इस पर बहस चल रही है कि आर्य भारत के मूल निवासी थे या बाहर से आए थे। ताजा अध्ययन हरियाणा के हिसार जिले के राखीगढ़ी का है। यहां हड़प्पाकाल की सभ्यता की खुदाई से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। राखीगढ़ी में 5000 साल पुराने कंकाल मिले हैं। इससे पता चलता है कि आर्य कोई बाहरी नहीं थे, वे यहीं के मूल निवासी थे। भारत के लोगों के जीन में बीते हजारों सालों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

 

आर्यन थिअरी पर शोध के लिए साइंटिस्टों ने राखीगढ़ी के नर कंकालों के अवशेषों का डीएनए टेस्ट किया। यह रिपोर्ट प्राचीन आर्यों की डीएनए रिपोर्ट से मेल नहीं खाती है। इससे आर्यों के बाहर से आने की बात गलत साबित होती है। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि लोग ईरान और इराक से भारत आए तो कई चीजें और तकनीक अपने साथ लाए। जबकि ताजा रिसर्च बताती है कि 9000 साल पहले भारत के लोगों ने ही खेती की शुरुआत की थी। यहां से दुनिया में खेती की तकनीक पहुंची। कंकालों के अध्ययन से पता चला है कि हड़प्पा सभ्यता में सरस्वती की पूजा होती थी और हवन भी होता था।

राखीगढ़ी और सनौली में हड़प्पाकालीन कंकालों की स्टडी ने आर्यन थिअरी पर नई तस्वीर सामने रखी है। तीन साल पहले डेक्कन कॉलेज ऑफ आर्कियोलॉजी के प्रो. वसंत शिंदे और डीएनए साइंटिस्ट डॉ. नीरज राय ने दावा किया था कि हड़प्पा सभ्यता को विकसित करने वाले बाहरी नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप के लोग ही थी। यह क्षेत्र भारत और पाकिस्तानी क्षेत्र में पड़ता है। दरअसल, कुछ इतिहासकारों का दावा है कि आर्यन बाहर से आए थे और आर्य व द्रविड़ में संघर्ष हुआ था। एक तबका इन्हें वामपंथी इतिहासकार कहकर निंदा करता है। दक्षिण भारत में यह राजनीतिक मुद्दा भी बनता रहा है। लेकिन ताजा शोध यही कहता है कि आर्य भारत के ही निवासी थे और मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और वैदिक काल का समय एक ही था। हालांकि कई इतिहासकार कहते हैं कि हड़प्पा और वैदिक काल एक नहीं हो सकते।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.