January 20, 2021

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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसःक्या है इसके फायदे और नुक्सान

इंटेलिजेंस मनुष्यों का प्रमुख गुण है। हमारी सभ्यता ने जो कुछ भी उपलब्धियां हासिल की हैं, वे मनुष्य की बुद्धि का ही नतीजा हैं। फिर चाहे आग के इस्तेमाल में महारत हासिल करना हो, अनाज उपजाना हो, पहिये का आविष्कार हो या मोटर इंजन का आविष्कार। इन सबके पीछे जिस एक चीज की भूमिका है, वह है मनुष्य की इंटेलिजेंस है। यही इकलौती चीज है, जो हमें अन्य जीव-जन्तुओं से अलग करती है।

इंटेलिजेंस की मदद से ही मनुष्य कई जानवरों का और कई मशीनों का अपने हित के इस्तेमाल करता है। अब तक जितनी भी मशीनें बनी हैं, वे पहले से निर्धारित काम को करती है। चाहे वह कारखाने हों, मोटर गाड़ी हो या कंप्यूटर हो। लेकिन अब मनुष्यों ने अपनी बुद्धि की मदद से ही मशीनों को बुद्धिमान बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है। हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में ही है, लेकिन इसके क्रांतिकारी नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं।

 

जैसे, वाहन निर्माण, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक बाजार 62.9 फीसदी दर से बढ़ रहा है। स्वचालित कार, चैटबॉट (जो वेबसाइट सर्फ करते समय चैटिंग करते हुए सह जानकारी मुहैया कराते हैं), पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट (गूगल असिस्टेंट, अमेजन एलेक्सा, एप्पल सीरी, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्टना आदि) कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित होते हैं।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दुनिया भर में अध्ययन तेज हुए हैं और इसमें भारी निवेश किया रहा है। स्वचालित कारों का निर्माण हो या गो कम्प्यूटर का निर्माण जो किसी मानव खिलाड़ी को आसानी से हरा सकता है। आईबीएम कंपनी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस डीप ब्ल्यू कंप्यूटर ने कास्पोरोव को शतरंज मे हराया था, तो गूगल ने अल्फागो ने मानव को एक कंप्युटर बोर्ड खेल गो मे हराया था। तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में इतनी क्षमता हो सकती है कि वह मनुष्य से भी आगे निकल जाए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में यह ताकत भी है इससे हम गरीबी और बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य भी प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि सच यह भी है कि अगर हमने इसके जोखिम से बचने का तरीका नहीं ढूंढ़ा, तो सभ्यता खत्म भी हो सकती है।

तमाम फायदों के बावजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने खतरे हैं। इसकी मदद से शक्तिशाली स्वचालित हथियार बन सकते हैं या फिर ऐसे उपकरण, जिनके सहारे चंद लोग एक बड़ी आबादी का शोषण कर सकें। यह अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चोट पहुंचा सकती है। यह भविष्य में मशीनों को मनुष्य के नियंत्रण से आजादी दिला सकता है, जिसका हमारे साथ संघर्ष हो सकता है। कुल मिलाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे लिए फायदेमंद भी है और नुकसानदेह भी। फिलहाल हम नहीं जानते हैं कि इसका स्वरूप आगे क्या होगा?

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसः आखिर क्यूं उठ रहे हैं सवाल?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में काफी चर्चा हो रही है। कुछ का कहना है कि इससे मानवता बचेगी तो कुछ कहते हैं इससे आदमी अमर हो जाएगा। मगर वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो इसे मानव को पूरी तरह खत्म कर देने वाला बताते हैं। वैसे सच्चाई ये है कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है।

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विश्व बैंक, मैकेंजी, गार्टनर ये वो संस्थाएं हैं जो कुछ भी कहती हैं तो पूरी दुनिया में उन्हे गंभीरता से लिया जाता है। पिछले कुछ समय से ये संस्थाएं एक साथ मिलकर कुछ ऐसा कह रही हैं जिससे आपके माथे पर बल पड़ सकते हैं। इनका कहना है कि एआई यानी आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के चलते दुनियाभर में नौकरियों पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है, जाहिर सी बात है कि हम भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा है और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो सकते हैं। इन संस्थानों के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण आईटी, बीपीओ, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल्स, बैंकिंग, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।

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तो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस क्या सच में इतना बढ़ा खतरा है जिसे हम नियंत्रित नहीं कर सकते, कैसे और क्यों ये इंसान की जगह ले लेगा और ऐसी स्थिति से बचना है तो क्या करना होगा?

क्या सरकार दे रही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बढ़ावा?

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट में यह उल्लेख किया था कि केंद्र सरकार का थिंकटैंक नीति आयोग जल्दी ही राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के लिये नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इसमें सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षाविदों तथा उद्योग जगत को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। वर्तमान बजट में सरकार ने फिफ्थ जनरेशन टेक्नोलॉजी स्टार्ट अप के लिये 480 मिलियन डॉलर का प्रावधान किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं।

इसके अलावा सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, बिग डाटा इंटेलिजेंस, रियल टाइम डाटा और क्वांटम कम्युनिकेशन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण, मानव संसाधन और कौशल विकास को बढ़ावा देने के योजना बना रही है।

लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अभी शुरुआती अवस्था में है और कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें इसे लेकर प्रयोग किये जा सकते हैं। देश के विकास में इसकी संभावनाओं को देखते हुए उद्योग जगत ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह उन क्षेत्रों की पहचान करे जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल लाभकारी हो सकता है। सरकार भी चाहती है कि सुशासन के लिहाज से देश में जहां संभव हो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाए।

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आपका दोस्त या दुश्मन
अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। यह मानवीय चिंतन के बारे में अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे सीखता है, कैसे निर्णय लेता है और कैसे काम करता। इस विषय पर स्टार वार, मैट्रिक्स, आई रोबोट, टर्मिनेटर, ब्लेड रनर जैसी हॉलीवुड फिल्में बन चुकी हैं, जिनसे आपको यह पता चल सकता है कि आखिर यह बला है क्या। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला सिस्टम 1997 में शतरंज के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शुमार गैरी कास्पोरोव को हरा चुका है। वहीं पिछले वर्ष ऑक्सफोर्ड #विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में बताया गया है कि केवल अमेरिका में अगले दो दशकों में डेढ़ लाख रोजगार खत्म हो जाएंगे।

तकनीकी विकास के बढ़ते हुए चरण में आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसा कार्यक्षेत्र है जहां वैज्ञानिक मशीनों को मानव में परिवर्तित करने की की पुरजोर कोशिश में लगे हैं। कुमायूं यूनिवर्सिटी के एसएसजे कैंपस, अल्मोड़ा में कंप्यूटर साइंस डिमार्पमेंट की हेड डाॅ. पारुल सक्सेना ने एआई पर विस्तार से बताते हुए कहा, ‘जब से कंप्यूटर बना है तभी से मानव मशीन के काॅन्सेप्ट पर काम किया जा रहा है, यानी एक ह्यूमन मशीन जो पूरी तरह से इंसानों की तरह काम करे। हमारे देश में भी इस पर कार्य हुआ है, लेकिन इंडिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अभी शैशवास्था में है। अभी बहुत कार्य किया जाना बाकी है।

उन्होंने आगे बताया कि, ‘आज बहुत सारे मशीनी ऐप बनाये जा रहे हैं। ऐसा कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है जो कृतिम बुद्धिमता के दायरे में न हो। इसको इस तरह भी समझा जा सकता है कि जापान में एक ऐसा होटल बनाया गया जो पूरी तरह से मशीनी ऐप पर आधारित है, वहां पर सारे कार्य मशीनें ही करती हैं, एक भी इंसान नहीं दिखाई देता है वहां। इसके अलावा आज सारे डेटाबेस को एक प्लेटफाॅर्म पर लाये जाने की कोशिश की जा रही है।’

वह कहती हैं कि ‘इस समय विश्वभर में #ब्लूब्रेन प्रोजेक्ट पर काफी तेजी से कार्य किया जा रहा है, आॅस्ट्रेलिया से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी और यह प्रमुख केंद्र भी है। दुनियाभर में मानसिक रूप से बीमार या कमजोर लोगों की मदद करने के लिए इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है।’

वह कहती हैं कि ‘एआई पर जितना काम होता जायेगा, उतना ही जीवन सुविधाजनक होता जायेगा। जब हर जगह इसकी मांग बढ़ रही है ऐसे में हमारे देश में लोगों के बीच ऐसी धारणा भी बन रही है कि इससे नौकरी चली जायेगी, बिजनेस पर असर पड़ेगा, आदमियों की जगह मशीनें काम करेंगी, लेकिन सच्चाई ऐसी नहीं है। मशीनें अपना काम करेेंगी और उनसे कोई नुकसान नहीं होगा। हालांकि आशंका से पूरी तरह मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। आंतकियों के हाथ में जाने से खतरा हो सकता है लेकिन हम सबको इसके लिए चैकन्ना रहने की जरूरत है। कड़े कानून, खासकर कड़े साइबर कानून की आज देश को जरूरत तो है ही। एआई से कोई नुकसान नहीं होगा अगर उसको नियंत्रण में रखकर संचालित किया जाये।’

अब सवाल उठता है कि क्या बुद्धिमान मशीनें बेरोजगारी बढ़ा देंगी या मनुष्य को और निपुण बनाएंगी? इस सवाल का जवाब वर्तमान परिस्थितियों में दे पाना संभव नहीं है। लेकिन इतना तो समझा जा सकता है, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युक्त मशीनों से जितने फायदे हैं, उतने ही खतरे भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोचने-समझने वाले रोबोट अगर किसी कारण या परिस्थिति में मनुष्य को अपना दुश्मन मानने लगें, तो मानवता के लिये खतरा पैदा हो सकता है। सभी मशीनें और हथियार बगावत कर सकते हैं।

 

महान वैज्ञानिक दिवंगत स्टीफन हॉकिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को इस सदी की बड़ी खोज बताने के साथ ही इसे मानवता के खतरा भी बताया था। उनका कहना था कि ‘सोचने समझने वाली यह मशीन मानव जाति को चुनौती दे सकती है। आने वाले समय में एआई जीवन का नया रूप ले सकती है। इसकी तकनीक को लेकर अपनी चिंता साझा करते हुए उन्होंने कहा था, शुरुआत में एआई तकनीक अत्यंत उपयोगी थी। लेकिन इसे मानव से अधिक सक्षम बनाना खतरनाक हो सकता है। ऐसा करने से कुछ समय में एआई तकनीक खुद ही अपने आप को अधिक तेज गति से री-डिजाइन करने लगेगी। इस तरह उसे मानव की जगह लेने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।’

इसी कड़ी में पिछले दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई अच्छे बुरे अनुभवों से हम सभी दो-चार हुए हैं। यूएस और ब्रिटेन में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर काम कर रहे शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं वाले थिंक टैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस तकनीकों का सस्ता होना किस तरह उन्हें गलत हाथों में भी पहुंचा सकता है। इसके लिए थिंक टैंक ने इनसे बचने के लिए नियम बनाए जाने और रिसर्च को शेयर नहीं करने की भी सलाह दी है।

पिछले साल ही, सिलिकन वैली की एक स्टार्ट-अप कंपनी ने एक ऐसे ड्रोन का प्रयोग किया था जो अपने हिसाब से अपना रास्ता ढूंढ लेता है। एक स्मार्टफोन ऐप के जरिए यूजर ड्रोन को किसी व्यक्ति का पीछा करने के लिए लगाया जा सकता है। एक बार जब यह ड्रोन अपने लक्ष्य का पीछा करने लगता है तो उससे पीछा छुड़वाना आपके लिए लगभग असंभव हो जाता है। हालांकि यह ड्रोन केवल मौज-मस्ती के लिए बनाया गया था। यह फ्लाइंग सेल्फी की तरह काम करता है लेकिन अगर इसका गलत उपयोग किया जाए तो यह आपके और आपके परिवार के लिए काफी खतरनाक हो सकता है।
बुद्धिमान मशीनों का दक्षता से प्रयोग कौशल को और निखारेगा

इसी क्रम में व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ने अमेरिका में एआई आधारित अनुप्रयोग विकसित करने के बारे में बहस छेड़ दी। अमेरिका में व्हाइट हाउस ने 2016 में एक ऐसे भविष्य की तैयारी के लिए एक रिपोर्ट (अनुसंधान एवं विकास योजना) जारी की थी, जिसमें कृत्रिम बुद्धि की सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संवर्धित भूमिका होगी। यह रिपोर्ट एआई की वर्तमान स्थिति, सार्वजनिक कल्याण और सार्वजनिक नीति और इसके कारण उत्पन्न होने वाले नियामक प्रश्नों के लिए उसके अनुप्रयोगों का समाधान करती है। व्हाइट हाउस ने यह रिपोर्ट जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाने के लिए एआई के सबसेट-मशीन लर्निंग के सामथ्र्य के बारे में आशावादी होने को लेकर जारी की थी।

हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है, एक कुशल शिल्पकार,कलाकार, लेखक, संगीतकार, अध्यापक या डॉक्टर को बुद्धिमान मशीनों के युग में रोजगार तो मिलेगा, पर बुद्धिमान मशीनों का व्यवसाय में दक्षता से प्रयोग उनके कौशल को और निखारेगा। सबसे ज्यादा सफल तो वे होंगे जो एकदम नए उत्पाद, सेवाओं और उद्योगों की कल्पना करने में सक्षम होंगे।

 

नोएडा में एक आईटी कंपनी में साॅफ्टवेयर इंजीनियर नीरज सिंह कहते हैं , ‘ऐसे एंटेलीजेंट एप्स को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है। लेकिन यह इंसान की एक्टिविटी को भी रिप्लेस कर रहा है। साथ ही ऑटोमेशन कस्टमर केयर और ऑफिस प्रोसेस अव्यवस्थित डाटा की एक नई क्लास बना रहे हैं। कम्युनिकेशन के क्षेत्र में कंटेंट, जैसे कि कस्टमर रिक्वेस्ट के लिए डॉक्यूमेंटेशन सपोर्टिंग, वास्तव में रियल-टाइम व्यू मुहैया कराते हैं कि वास्तव में ऑर्गेनाइजेशन के कस्टमर के साथ संबंधों में क्या हो रहा है। ऑटोमेशन डाटा प्रिपरेशन, इनसाइट डिस्कवरी और इनसाइट शेयरिंग के लिए एआई टेक्नीक्स का इस्तेमाल बिजनेस यूजर्स, ऑपरेशनल वर्कर्स और सिटिजन डाटा साइंटिस्ट को निर्णय लेने में काफी कारगर रहता है।

सूचना प्रौद्योगिकी के उद्योग में ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आजकल सबसे पसंदीदा विषय बन गये हैं। इसके गूगल ने पहल की है जिसका मकसद है कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग के बारे में सभी लोगों के पास जानकारी हो। इसी वजह से गूगल ने ‘लर्न विद गूगल एआई’ नामक एक नई वेबसाइट शुरू की है, ताकि लोगों को यह समझ में आ सके कि एआई तकनीक कैसे काम करती है और एमएल कॉन्सेप्ट क्या है। गूगल ने इसके लिए मशीन लर्निंग क्रैश कोर्स (एमएलसीसी) भी शुरू किया है। माना जाता है कि इस कोर्स को एआई के वैश्विक विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है।

गौरतलब है गूगल इसके लिए चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बुद्धिमत्ता सम्मेलन और कार्यशालाओं को प्रायोजित करके कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान समुदाय को प्रोत्साहन दे रहा है। यह एशिया का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर है। इसके पहले चीन ने अपने त्रिस्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम की रूपरेखा जारी की थी, जिसके बल पर वह वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में विश्व का अगुआ बनने की सोच रहा है।

इंसानों की नकल करना ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस है?

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। इसके जरिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक जॉन मैकार्थी के अनुसार यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कंप्यूटर प्रोग्राम को बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह इंटेलिजेंस तरीके से सोचने वाला सॉफ्टवेयर बनाने का एक तरीका है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रगति में तीन प्रमुख कारकों अहम भूमिका निभाते हैं-सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, सरकार जैसे स्रोतों से बड़े आंकड़ों (बिग डाटा) की उपलब्धता, बेहतर मशीन लर्निंग अप्रोचिज, एल्गरिदम्स और इन आंकड़ों को प्रॉसेस करने के लिए ज्यादा प्रबल कंप्यूटरों की संवर्धित क्षमताओं पर निर्भर रही है।

 

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल अपने एक लेख में लिखते हैं कि ‘‘विशेषज्ञ ‘टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी’ जैसी एक स्थिति के आगमन की भविष्यवाणी कर रहे हैं। जो आमतौर पर यह दो बातों को संदर्भित करता है।

पहली बात यह है कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जो कि मनुष्यों से अधिक शार्प है, को हमारे जीवन में रचा जायेगा और दूसरी बात यह कि यह बुद्धिमत्ता समस्याओं के समाधान बहुत तीव्रता से कर सकेगी, जो कि मनुष्य की क्षमता से परे होगा। भविष्य में होने वाला यह परिवर्तन इतना जोरदार होगा, कि मानव इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता है कि इस बुद्धिमत्ता की रचना के बाद हमारे भविष्य का स्वरूप कैसा होगा।’’

बहरहाल, प्रश्न है कि इन चीजों के विकसित होने की संभावना कब तक है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा 2040 के आसपास हो जायेगा, यानी आगामी 22 वर्षों में या इससे पहले भी हम इन चीजों को विकसित कर लेंगे। वैसे जो विशेषज्ञ टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी को लेकर संशय में हैं, वे भी इसके आगमन की संभावना को खारिज नहीं करते हैं। इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि कुछ समय पहले एक गूगल कंप्यूटर ने गो नामक एक जटिल चीनी खेल के चैंपियन व्यक्ति को हरा दिया था। ऐसा होने की अपेक्षा नहीं थी, क्योंकि गो खेल में शतरंज की तुलना में कई गुना अधिक प्रायिकता होती है।

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आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्यों से अधिक शार्प है?

यदि टेक्नोलॉजिकल सिंगुलैरिटी के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया जाता है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि से अधिक सक्षम हो जाती है, तो आनेवाले वर्षों में मनुष्य को इस बुद्धिमत्ता के हाथों नियंत्रण सौंप देना पड़ेगा।

अनुसंधानकर्ताओं की यह भी चिंता है कि नए वाले सिस्टम कभी-कभी अजीब व्यवहार भी करते हैं क्योंकि वह बड़ी संख्या में ऐसे डेटा से जानकारी लेते हैं जो इनके लिए पूरी तरह समझा जाना संभव नहीं होता है। इस फैक्टर की वजह से इनका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है। तेजी से विकसित होते ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सिक्यॉरिटी के खतरों को बढ़ा दिया है।

अगर एक कंप्यूटर विजन सिस्टम को इस तरह समझाया जा सकता है कि वह ऐसी चीज देखे जो मौजूद नहीं है तो इनका इस्तेमाल खतरनाक हो जाएगा। आतंकी तत्व इस तरीके से सिक्यॉरिटी कैमरों और ड्राइवरलेस कारों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस सिस्टम भरोसेमंद ऑडियो-विडियो जेनरेट करने में सक्षम होने लगे हैं।

इसके परिणाम क्या होंगे? विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें इसका पता नहीं है। मानव जाति के रूप में अपने आस्तित्व के सबसे असामान्य चरण से हम गुजर रहे हैं।

 

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