June 29, 2022

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आज़ादी मिलने से पहले 6 बार बदल चुका है ‘तिरंगे’ का रूप और रंग, रोचक है इसका इतिहास

आज 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस है. ( आज ये दिन तारीख़ तो है नहीं लेकिन मैं लिख रहा हूं) आज ही के दिन भारत को एक आजाद देश भी घोषित किया गया था. हम सभी ने स्वतंत्रता और इसे पाने के लिए देश के वीरों से जुड़ी कई कहानियां भी सुनी ही हैं. लेकिन आज हम आपको इस संघर्ष नहीं बल्कि भारतीय ध्वज के बारे में कुछ खास जानकारी देने जा रहे हैं. दरअसल आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के झंडे के बारे में. आज हम तिरंगे को जिन रंगों में लिपटा हुआ देख रहे हैं ये शुरुआत में वैसे नहीं थे. यहां तक कि रंगों के साथ ही इसपर चिन्ह भी अलग थे. तो चलिए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में.
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राष्ट्रीय ध्वज बनाने की शुरुआत हुई थी आज़ादी के पहले. यह वक़्त था 7 अगस्त 1906 का, जब कांग्रेस के ग्रीन पार्क अधिवेशन में ध्वज का प्रस्ताव सामने आया था. इस वक्त ध्वज में लाल, पीले और हरे रंग का इस्तेमाल किया गया था. ऊपर हरी पट्टी और इसमें 8 कमल थे, बीच की पट्टी पिली थी और इसमें वंदे मातरम लिखा हुआ था. जबकि सबसे नीचे लाल पट्टी थी जिसमें चाँद और सूरज थे. हालांकि इसे स्वीकृति नहीं मिल पाई.
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इसके बाद ध्वज में बदलाव किया गया और इसके रंगों और चिन्हों को बदला गया. केसरिया पट्टी को सबसे ऊपर और हरी पट्टी को नीचे किया गया, जबकि पिली पट्टी और उसपर वंदे मातरम वैसे ही रहा. ऊपर की पट्टी में एक कमल और सात तारे सप्तऋषि बनाए गए. नीचे की पट्टी में सूरज और चाँद ही रहे. इसे 1907 में बर्लिन के समाजवादी सम्मलेन में भीकाजीकामा ने फहराया था.

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जब दो ध्वजों को मान्यता नहीं मिली तो तीसरे ध्वज का निर्माण 1917 में शुरू हुआ. इस ध्वज में 5 लाल और चार हरी पट्टियां दिखाई देती थीं. साथ ही सप्तऋषि तारों के साथ एक चाँद-तारा भी था. वहीँ एक कोने में यूनियन जैक बनाया गया था. हालांकि घरेलू आंदोलन के खत्म होने पर इसे भी अस्वीकार कर दिया गया.

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इसके बाद चतुर्थ ध्वज में तीन पट्टियां सफ़ेद, हरी और लाल डाली गईं. साथ ही इसमें एक चलता हुआ चरखा भी नजर आया. इसे 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के तहत विजयवाड़ा में फहराया गया था.

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इस ध्वज को भी पूर्णरूप से स्वीकार नहीं किए जाने के चलते इसमें 1931 में फिर बदलाव किए गए. इस दौरान ध्वज में केसरिया, सफ़ेद और हरा रंग इस्तेमाल किया गया जो कि वर्तमान में भी वैसे ही है. हालांकि इस ध्वज में बीच में चरखा लगाया गया. इसे कई दिनों तक संग्राम चिन्ह भी कहा गया.

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अंत में भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान मिला और चरखे की जगह चक्र को लगाया गया. 22 जुलाई 1947 को पहली बार ध्वज को संविधान सभा में सर्वसम्मति से अपनाया गया.

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