June 29, 2022

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सच के साथ

इंसान और उसकी सोचने की क्षमता-सिर्फ इस आदमी की वजह से भारत बना था अंग्रेजों का गुलाम

एक समय हमारा भारत देश भी सोने ही चिड़िया कहलाता था, लेकिन आज भारत देश जिस हालत में है उसके जिम्मेदार पहले तो अंग्रेज थे, जिन्होंने भारत देश पर 200 सालों तक राज कर भारत को लूटा था. और दूसरे लोग वो है जिन्हें चुनकर हम भारत की सत्ता में लाते है.

आज हम भारतीय राजनीति को लेकर किसी भी तरह का आरोप-प्रत्यारोप नहीं करेंगे. आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसकी वजह से हमारा भारत सोने ही चिड़िया से तब्दील होकर गुलाम बन गया था. जिसकी वजह से भारत पर 200 सालों तक अंग्रेजों का शासन था.।

रॉबर्ट क्लाइव यह वही शख्स है जिसने भारत में अंग्रेजो की किस्मत लिखी थी. ईस्ट इंडिया कंपनी का एजेंट बनकर 1744 में क्लाइव पहली बार इंग्लैंड से मुंबई आया था. उस समय जहाज से भारत आने में ही करीब एक साल लग जाता था. इस एक साल की यात्रा के दौरान ही क्लाइव ने पुर्तगाली भाषा अच्छे से सीख ली.

उस समय मुग़ल बादशाह औरंगजेब की मृत्यु हो चुकी थी जिस कारण साम्राज्य कमजोर हो चुका था. फ़्रांस, पुर्तगाल, ब्रिटेन जैसे कई देशों की नज़र भारत पर बनी थी. क्लाइव चालाक और अति क्रूर किस्म का एक व्यक्ति था और भारत में आते ही उसने अपनी चाले चली जिसमे वह कामयाब भी हो गया और वह अपने सीनियर्स की नजरो में आ गया और ब्रिटिश सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर काबिज हो गया।

1756 के समय में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला थे. कलकत्ता पर पूर्ण नवाब का कब्ज़ा था. लेकिन नवाब के सेनापति मीर जाफ़र ने गद्दारी और चालाकी से नवाब को हरवा दिया. क्लाइव और मीर जाफर के बीच एक समझौता हुआ 21 जून 1757 को प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला और क्लाइव की सेनायें एक दूसरे के आमने-सामने थी.

पूरे युद्ध में नवाब की फौज अंग्रेजो पर भारी पड़ रही थी. मीर जाफर जैसा गद्दार के साथ होने से तो हारना निश्चित था. नवाब की हार के दो कारण थे पहला तो ख़राब मौसम और बारिश जिस कारण तोपों का बारूद ख़राब हो गया. दूसरा था मीर जाफर जो सेना के एक बहुत बड़े हिस्से को जंग के मैदान से बहुत दूर ले गया।

इस जीत के साथ ही अंग्रेजो को बंगाल पर पूर्ण कब्ज़ा कर लिया. 1764 में बक्सर की लड़ाई में भी रॉबर्ट क्लाइव ने चालाकी और धोखेबाजी ने जीत दर्ज कर ली. क्लाइव ने कमजोर शासक पर अपनी नजर साधी और उन्हें अपना निशाना बनाया. इलाहाबाद की संधि में क्लाइव ने छल कपट की निति का प्रयोग किया. उस समय बंगाल ब्रिटेन से काफी अमीर था. कहा जाता है कि जब क्लाइव ब्रिटेन आया तो वह पूरे यूरोप का सबसे अमीर इंसान था.

भारत देश को बर्बाद करने में क्लाइव का अहम योगदान था, उसकी चालाक नीतियों से ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के दूसरे हिस्सों में अपनी पकड़ बना ली. लोगों को गुलाम बनाकर रखा गया, टेक्स लगाना प्रारंह कर दिया, कृषि की नीतियाँ ऐसी बनाई की किसान ही पूर्ण बर्बाद हो गए. 1770 में बंगाल में अकाल के कारण प्रभावित इलाके के एक करोड़ लोग भूख से तड़पकर मर गए थे.

रॉबर्ट क्लाइव रिटायर होने के बाद जब ब्रिटेन चला गया तो ब्रिटिश संसद में भ्रष्टाचार के आरोप के साथ जितने जुल्म उसने भारत पर किये उससे भी भयंकर उसका अंत हुआ. 1774 में उसने आत्महत्या कर ली.

इतिहास हमें सिखाता है अपना और अपने देश का भविष्य सुधारना।

त्रुटियों के लिए क्षमा चाहता हूं।

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