March 5, 2021

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ईरान ने PAK पर की सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकियों को बचाने में मारे गए पाकिस्तानी सैनिक

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पाकिस्तान में घुसकर अपने सैनिकों को रिहा करा लिया. वहां की फोर्स ने एक बयान में ये दावा किया कि पाकिस्तान के अंदर एक खुफिया ऑपरेशन में अपने दो सैनिकों को छुड़ा लिया गया है.

नई दिल्ली|सर्जिकल स्ट्राइक का नाम आते ही आंखों के सामने विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान (Abhinandan Varthaman) का चेहरा आ जाता है. अभिनंदन ने पाकिस्तान (Pakistan) में घुसकर उसके लड़ाकू विमानों को ध्वस्त कर दिया था. भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान में की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक से पड़ोसी देश के हौंसले पस्त पड़ गए थे. दुनियाभर में आतंकिस्तान के नाम से मशहूर पाकिस्तान के गाल पर भारत की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक एक करारा तमाचा था. लेकिन, पाकिस्तान इतना सब होने के बाद भी कैसे सुधर सकता है. तो, इस बार उसने फिर एक गलती कर दी. हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तान को ये गलती भारी पड़ी. दरअसल, पाकिस्तान ने ईरान के दो सैनिकों को बंदी बनाया हुआ था. जिन्हें बचाने के लिए ईरान, पाकिस्तान की सीमा में अंदर तक घुस गया. ईरान की इस सर्जिकल स्ट्राइक में कई आतंकवादी मारे गए हैं.

 

दक्षिण-पूर्व ईरान में IRGC ग्राउंड फोर्स के Quds बेस ने एक बयान में कहा कि, “दो-ढाई साल पहले जैश उल-अदल संगठन द्वारा बंधक बनाए गए अपने 2 बॉर्डर गार्ड को छुड़ाने के लिए मंगलवार रात एक सफल ऑपरेशन किया गया.” इस ऑपरेशन में दोनों गार्ड को छुड़ा लिया गया. बयान के अनुसार, सैनिकों को सही सलामत ईरान वापस भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि खुफिया जानकारी के आधार पर ईरान की IRGC ने पाकिस्तान के अंदर ऑपरेशन को अंजाम दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी वहाबी आतंकवादी संगठन ‘जैश उल-अदल’ ने 16 अक्टूबर, 2018 को दोनों देशों की सीमा पर बलूचिस्तान प्रांत के मर्कवा शहर में 12 IRGC गार्डों को पाकिस्तानी क्षेत्र में अपहरण कर लिया था. 15 नवंबर, 2018 को पांच सैनिकों को रिहा किया गया. इसके बाद चार और ईरानी सैनिकों को 21 मार्च, 2019 को पाकिस्तानी सेना द्वारा रेस्क्यू किया गया.

 

पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला तीसरा देश बना ईरान

ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में खुलासा किया. बताया जा रहा है कि बीते मंगलवार को ईरान ने अपने दो सैनिकों को बचाने के लिए पाकिस्तान की सीमा में अंदर तक घुसकर आतंकियों को मारा. इसके बाद उन्होंने दोनों सैनिकों को आतंकियों के चंगुल से मुक्त करा लिया. पाकिस्तान पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक का इतिहास काफी पुराना है. सबसे पहले अमेरिका ने पाकिस्तान में छिपे अलकायदा के चीफ ओसामा बिन लादेन को सर्जिकल स्ट्राइक में ढेर कर दिया था. 2019 में भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर बमों की बरसात कर कई आतंकी मार गिराए थे. इसके बाद अब ईरान पाकिस्तान के ऊपर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला तीसरा देश बन गया है.

2018 से आतंकी संगठन के कब्जे में थे ईरानी सैनिक

ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के बयान के मुताबिक, पाकिस्तान के अवैध रूप से कब्जाए गए बलूचिस्तान में ईरान के सैनिकों ने सीमा में घुसकर जैश अल-अदल के कई आतंकियों को ढेर कर दिया. साथ ही उनके कब्जे से अपने सैनिकों को मुक्त करा लिया. IRGC के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह ने मुक्त कराए गए ईरानी बॉर्डर गार्ड्स के जवानों को 2018 में अगवा किया था. जिन्हें दो साल बाद खुफिया जानकारी मिलने पर सर्जिकल स्ट्राइक कर छुड़ा लिया गया. कहा जा रहा है कि ईरानी सर्जिकल स्ट्राइक में आतंकियों के साथ कई पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं. ये सैनिक, आतंकवादियों को बचाने के लिए कवर फायर दे रहे थे.

जिहादी आतंकी संगठन है जैश उल-अदल

पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह जैश उल-अदल एक सलाफी जिहादी आतंकी संगठन है. ये आतंकी संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तान से लगी ईरान की दक्षिण-पूर्व सीमा में सक्रिय है. ईरान में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर जैश उल-अदल पर पहले भी कई हमले कर चुका है. ये आतंकी संगठन बलूचिस्तान में भी निर्दोषों नागरिकों का नरसंहार करने का जिम्मेदार है. इसके लिए इस आतंकी संगठन को पाकिस्तानी सेना से समर्थन मिलता है. दरअसल, पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो अपनी ‘नापाक’ हरकतों से कभी बाज नहीं आता है.

पाकिस्तान ने अवैध रूप से कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है. बीते कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद होना शुरू हो गई हैं. बलूचिस्तान को आजाद कराने के लिए कई बलोच नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं. हाल ही में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अलग सिंधुदेश बनाने की मांग ने भी जोर पकड़ा है.

आतंकवादी संगठन जैश उल-अदल ईरान के दक्षिण-पूर्व के क्षेत्र में लगातार बॉर्डर के पार आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है. फरवरी, 2019 में ईरान के बसिज पैरामिलिट्री बेस पर हुए हमले की इसी संगठन ने जिम्मेदारी ली थी. इस हमले की वजह से दर्जनों की संख्या में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स घायल और मारे गए थे. इसे पहले 2014 में भी इस आतंकी समूह ने ईरान के 5 बॉर्डर गार्डस को अगवा कर लिया था. हालांकि, दो महीने के बाद इनमें से चार को छोड़ दिया गया था. वहीं, एक की हत्या कर दी गई थी.

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