August 9, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

उदयपुर कांड: …जाने किसके धरम का भला हो गया!

उदयपुर कांड: …जाने किसके धरम का भला हो गया!
कोई पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या करके ख़ुश है, कोई ग़रीब मज़दूर अफ़राज़ुल का क़त्ल करके और कोई ग़रीब दर्जी कन्हैया लाल का गला काट के। हर हत्यारे को यह वहम है कि वह अपने धर्म की भलाई कर रहा है।

 

Suchkesath:उदयपुर में एक नवयुवक दर्जी कन्हैया लाल की बर्बरतापूर्ण ढंग से गर्दन काटने की घटना पर देश का गुस्सा या हैरानी जायज है. आखिर ये भारत को सीरिया या इराक बनाने की एक असफल किन्तु दुस्साहसपूर्ण कोशिश है. इन दोनों देशों के वीडिया हमने देखे हैं जिनमें किसी भी मासूम की गर्दन कैसे बर्बरता पूर्वक कलम की जा रही होती थी. पर यह हमारे ही हिन्दू बहुल मुल्क में ही होगा यह तो किसी ने सोचा भी नहीं था. यह मत भूलिए कि नुपुर शर्मा की सर तन से जुदा की मांग तो लगातार हो ही रही थी. खुल्लम-खुल्ला ऐलान भी हो रहा था कि नुपुर शर्मा के धड़ को गर्दन से अलग कर दिया जाएगा. पर हैरानी की बात यह है कि नुपुर शर्मा के प्रति सहानुभूति रखने वाले किसी निर्दोष शख्स की भी गर्दन को धड़ से अलग कर दिया गया. अब बचा ही क्या है.

निर्दोष की जान लेना शौर्य नहीं एक घृणित अमानवीय कृत्य है. तमाम चीजों से जूझ रहे देश को शांति की ज्यादा जरूरत है वह भी उस स्थिति में जब कई नेता, खासकर कट्टरपॅंथी धार्मिक गुरु और उलेमा गृह युद्ध की आशंका तक जता रहे हैं कई दिनों से. अब कौन सुरक्षित रह गया है इस देश में ? कोई भी तो नहीं. कुछ तालिबानी तत्व भारत में जिस तरह से बढ़ रहे हैं वह बेहद चिंताजनक है. इस्‍लाम में सुधार तो अब दूर की बात ही दिखती है. पहले इस्‍लाम से जुड़े विद्वानों को यह चिंता करनी होगी कि ऐसे तालिबानी तत्‍वों को किस तरह से अलग-अलग थलग करें और इस मजहब को मुल्‍ला मौलवियों की जकड़न से कैसे मुक्‍त किया जाए.

 

अभी देश में अल्ला के इस्लाम की जगह मुल्ला के इस्लाम को चलाने की कोशिश हो रही है! अगर इस्‍लाम से जुड़े लोग ऐसे तत्‍वों की मुखालफत में तुरंत सामने नहीं आते, अपने नौजवानों को कट्टरपंथ के जहर से मुक्‍त करने की कोशिश नहीं करते, तो क्‍यों न मान लिया जाए कि वे भी इन तत्‍वों का साथ दे रहे हैं?  उदयपुर में जो कुछ हुआ क्या यह पहली घटना है या फिर आपको लगता है यह आख़िरी है. नहीं यह तो एक सिलसिला सा कायम किया जा रहा है.

यह भी समझना होगा है कि हज़ारों की भीड़ जो नारे लगा रही थी सर तन से जुदा वह क्या कन्हैया लाल की मौत से दुखी हुई होगी? क्या वे लोग इस क़त्ल में शुमार नहीं है? ये तमाम लोग अभी दुआ कर रहे होगे और वे दुआ किसके लिए होगी आप समझ सकते हैं. उदयपुर की घटना में जरा राजनीतिक साजिश को भी देखिए. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन की मांग की है.

हत्या के बाद कांग्रेस की सक्रियता की तारीफ हो रही है. मुआवजा देने, गिरफ्तारी और त्वरित मामले की सुनवाई को लेकर. कांग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं समेत सोशल मीडिया पर उसकी टीम अशोक गहलोत सरकार के एक्शन को आदर्श की तरह प्रस्तुत कर रही है. कांग्रेस के साथ नजर आने वाला विपक्ष भी प्रतिक्रिया देने में पीछे नहीं रहा. आनंद पटवर्धन जैसे लोगों ने भी निंदा की है.

ब्रदरहुड का नारा देने वाले और कतर की जीडीपी से भारत की औकात बताने वाले भी निंदा कर रहे. वक्त का तकाजा है कि अशोक गहलोत प्रधानमंत्री मोदी से अपील करन की बजाय अपने राजस्थान को जरा संभालें. अन्य राज्यों में सक्षम सरकारें हैं और वे एहतियात भी बरत रही हैं. क्या गहलोत एक तरह से दबाव की राजनीति नहीं कर रहे हैं? क्या वे राजस्थान की घटना की जिम्मेदारी लेने से बच नहीं रहे हैं?

उदयपुर से आ रही खबरों से साफ है कि राजस्थान सरकार कन्हैया लाल को सुरक्षा देने में नाकाम रही. कन्हैया लाल को पता था कि उसकी जान को खतरा है. उसने पुलिस में शिकायत भी की. वह कई दिनों से अपनी दुकान पर भी नहीं गया था. पर अशोक गहलोत के राज्य की पुलिस ने धमकी देने वालों को पकड़ने की बजाए उस बेचारे कन्हैया लाल को सतर्क रहने की हिदायत दी. ना तो आरोपियों को गिरफ्तार करने में दिलचस्पी दिखाई और ना ही पीड़ित को सुरक्षा देने में.

अशोक गहलोत सरकार को बताना चाहिए कि आतंकियों की धमकी मिलने के बाद भी कन्हैया लाल को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? वह भी तब जब आरोपियों ने धमकी का वीडियो भी जारी कर दिया गया था. आरोपी क्यों नही पकड़े गए? सारा देश जानता है कि राजस्थान बीते कई महीनों से जल रहा था. वहां दंगे भी हुए. नुपुर शर्मा मामले में जिस तरह बखेड़ा हुआ था उसके मद्देनजर तो इस मामले में और ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत थी. पर यह नहीं हुआ.

उदयपुर की कल की घटना के बाद जिस तरह से हत्यारे अपने चाकू लहराकर इसे अपनी जीत बता रहे थे, तो उनकी बेवकूफी पर तरस आया. उन्होंने अपने एक ऐसे धार्मिक विश्वास के चलते इस हत्याकांड को अंजाम दिया जिसका उन्हें इल्म भी नहीं कि वह ठीक है या नहीं. क्या उनकी इस हरकत से उन्हें जन्नत नसीब होगी या नहीं, लेकिन आम मुसलमानों के लिए मुश्किलें ज़रूर बढ़ेंगी. उन दोनों हत्यारों ने एक आदमी का कत्ल किया और ऐसा करके करोड़ों मुसमलानों की ज़िंदगी को मुश्किल बढा दी.

इस बीच, अपने जहरीले बयानों के लिए बदनाम एआईएमआईएम के नेता सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने भी कन्हैयालाल की हत्या की निंदा की है. पर जब उन्हीं की पार्टी के लोकसभा सांसद इम्तियाज जलील महाराष्ट्र में नुपुर शर्मा के बयान पर विरोध जताने के लिए हुआ एक रैली में शामिल हुए थे तब नुपुर शर्मा का सिर काटने के नारे लग रहे थे. इम्तियाज जलील ने उन शातिर लोगों को एक शब्द भी कुछ नहीं कहा था जो नारेबाजी कर रहे थे.

भारत को गर्त में झोंकने की कोशिश करने वालों को कुचलना होगा. केन्द्र तथा राज्य सरकारों को कन्हैया लाल के हत्यारों और उनकी मानसिकता रखने वाले सभी को कुचलना होगा. इस बिन्दु पर अगर मगर का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता. अगर सरकारें ये भी नहीं कर सकती तो फिर तो देश राम भरोसे ही चलेगा.

 

जिहादी हत्याकांड पर ‘सेकुलर नेताओं’ की सेलेक्टिव प्रतिक्रिया

 

राजस्थान के उदयपुर में जिहादी मानसिकता से भरे दो मुसलमानों ने एक टेलर कन्हैया लाल (Udaipur Hindu Tailor Murder) का ‘सिर तन से जुदा’ कर दिया. इस नृशंस जिहादी हत्याकांड के बाद से ही अपराधियों और घटना की मजम्मत की जा रही है. तमाम सियासी दलों ने इस घटना को वीभत्स बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. लेकिन, उदयपुर के जिहादी हत्याकांड पर हजारों तीखी टिप्पणियों के बीच सियासी दलों के ‘सेकुलर नेताओं’ ने पूरी तरह से खुद को सेलेक्टिव रखा है. ये वहीं नेता हैं, जो ऐसी ही अन्य घटनाओं पर खुलकर हिंदुओं और हिंदू धर्म को कठघरे में खड़ा कर देते हैं. लेकिन, मुस्लिमों की जिहादी सोच से जुड़े मामलों पर सिलेक्टिव प्रतिक्रिया अपनाते हुए लानत-मलानत और मजम्मत से काम चला लेते हैं.

कहना गलत नहीं होगा कि उदयपुर के जिहादी हत्याकांड जैसी घटनाओं को इन्ही सेलेक्टिव प्रतिक्रियाओं से ही खाद-पानी मिलता है. ये सेकुलर नेता ही नूपुर शर्मा के खिलाफ एक एडिटेड क्लिप के जरिये आग फैलाने वाले फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर इसे लोकतंत्र की हत्या घोषित कर देते हैं. लेकिन, मोहम्मद जुबैर की लगाई इस आग में भस्म हुए कन्हैया लाल की बेरहमी से हुई हत्या पर नफरत को हराने और गंगा-जमुनी तहजीब पर ज्ञान बांटने लगते हैं. इतना ही नहीं, उदयपुर के जिहादी हत्याकांड पर इन प्रतिक्रियाओं में मुस्लिम या इस्लाम जैसे शब्दों का प्रयोग ही वर्जित नजर आने लगता है. जबकि, ऐसी ही किसी अन्य घटना पर ये सीधे हिंदू धर्म और हिंदुओं पर सवाल खड़ा करने से पहले एक पल का भी समय नहीं लेते हैं.

राजस्थान में पिछले कुछ महीनों से लगातार सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की घटनाएं होती रही हैं. लेकिन, करौली से लेकर उदयपुर तक हर सांप्रदायिक घटना में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत अपने वोटबैंक को बचाए रखने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से इस पर प्रतिक्रिया देने की मांग करते हैं. और, ये तकरीबन पूरे देश के ही सियासी दलों के सेकुलर नेताओं के साथ होने वाली समस्या है. क्योंकि, ऐसी घटनाओं पर अन्य घटनाओं की तरह ही प्रतिक्रिया देने से इनके मुस्लिम वोटबैंक के छिटकने का डर बना रहता है. जिसकी वजह से हिंदुओं के खिलाफ खुलकर आरोप लगाने ये सेकुलर नेता सेलेक्टिव प्रतिक्रियाओं के सहारे ही अपनी राजनीति बचाने की कोशिश में जुट जाते हैं. आइए नजर डालते हैं उदयपुर के जिहादी हत्याकांड पर ‘सेकुलर नेताओं’ की ऐसी ही कुछ सेलेक्टिव प्रतिक्रियाओं पर…

 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने त्रिपुरा में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों और मस्जिद तोड़े जाने की फर्जी खबर पर बाकायदा ट्वीट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी थी. क्योंकि, यहां कांग्रेस के लिए वोटबैंक की राजनीति जरूरी थी. और, इस ट्वीट में राहुल गांधी मुस्लिम भाइयों के साथ क्रूरता, हिंदुओं के नाम पर नफरत, हिंसा फैलाने वाले हिंदू नहीं ढोंगी जैसे शब्दों के सहारे अपना भरपूर गुस्सा जताया था. लेकिन, उदयपुर के जिहादी हत्याकांड (Udaipur Tailor Death) पर राहुल गांधी की शब्दावली कमजोर पड़ गई. शायद यहां राहुल गांधी अपराधियों का धर्म लिखना जल्दबाजी में भूल गए होंगे. वैसे, हिंदुओं और हिंदू धर्म जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल करने वाले राहुल गांधी को मुस्लिम या इस्लाम जैसे शब्दों से परहेज क्यों है? इसकी जानकारी वो ही दे सकते हैं.

 

आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भाजपा को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. हरियाणा में क्रिकेट को लेकर हुए एक विवाद पर अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए पूछा था कि हमारे (हिंदू) किस ग्रंथ में लिखा है मुसलमानों को मारो? गीता में? रामायण में? हनुमान चालीसा में?. केजरीवाल ने इस घटना में शामिल लोगों के लिए हिंदुओं के वेश में गुंडे, लुच्चे, लफंगे जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. लेकिन, उदयपुर के जिहादी हत्याकांड (Udaipur Tailor Murder) पर अरविंद केजरीवाल कड़े शब्दों में निंदा कर ही अपनी सियासत बचाने की जुगत लगाते दिखे. यहां केजरीवाल ने नहीं पूछा कि केवल समर्थन करने भर के लिए किसी का सिर तन से जुदा करने की बात किस किताब में लिखी है. और, कन्हैया लाल को मारने वालों का धर्म क्या था?

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने उदयपुर के कन्हैया लाल हत्याकांड (Udaipur shopkeeper murder) में अपनी सियासत के हिसाब से ही मुस्लिमों और इस्लाम के नाम को बीच में नहीं आने दिया. असदुद्दीन ओवैसी ने हत्याकांड की पुरजोर निंदा की. और, इसके लिए देश में बढ़ रही कट्टरता को जिम्मेदार ठहराया. इतना ही नहीं, ओवैसी ने ये भी इशारा किया कि नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी हो जाती, तो शायद ये हत्या नहीं होती. लेकिन, ये वही असदुद्दीन ओवैसी हैं, जो पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कमलेश तिवारी के लिए दुनिया को चूहे का बिल बता गए थे. बता दें कि कमलेश तिवारी की भी कन्हैया लाल की तरह ही मुस्लिम कट्टरपंथियों ने गला रेतकर हत्या कर दी थी.

दीदी’ कर रहीं बंगाल में जिहाद छेड़ने और उदयपुर में छोड़ने की अपील

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी सेलेक्टिव प्रतिक्रिया देने के मामले में किसी से कमजोर नही हैं. 21 जून को ही ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम में भाजपा के खिलाफ पश्चिम बंगाल में जिहाद छेड़ने की अपील की थी. एक मुख्यमंत्री होकर ममता बनर्जी को भाजपा के खिलाफ जिहाद छेड़ने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने में परहेज नहीं है. जबकि, इस्लाम में जिहाद का मतलब सभी को पता है. जिहाद का सीधा सा अर्थ है कि इस्लाम अपनाने से इनकार करने वालों के खिलाफ जंग छेड़ दो. तो, ममता बनर्जी बंगाल में भाजपा के खिलाफ जिहाद चाहती हैं. लेकिन, उदयपुर की घटना (Udaipur Murder Case video) में ‘दीदी’ को जिहाद नजर नहीं आता है. यहां ममता बनर्जी को हिंसा और कट्टरता ही दिखाई पड़ती है. जबकि, साफ है कि कन्हैया लाल को गुस्ताख-ए-रसूल होने की ही सजा दी गई है.

 

 

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