June 25, 2022

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एनालिसिस/ पाक ने विमानों को भारतीय सीमा में भेजकर साबित किया- वह आतंकियों को बचाना चाहता है

बालाकोट में आतंकियों के ठिकाने पर भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। भारतीय वायुसेना ने तो आतंकी शिविर को निशाना बनाया था, लेकिन पाकिस्तान अब भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। बुधवार को विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पुरजोर तरीके से यही बात उठाई गई।

आतंकियों को बचाने की आड़ में झूठ बोल रहा पाकिस्तान

पाक के झूठ भारत के जवाब
भारत हमें उकसा रहा है। हमने सिर्फ आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।
भारत हमारे क्षेत्र में घुस रहा है। पाक के विमानों ने भारतीय क्षेत्र का उल्लंघन किया।
हम भारत को अपनी ताकत दिखाना चाहते थे। पाक जानबूझकर सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा।

कौन-सा देश किसके साथ?
भारत की तरफ : अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, न्यूजीलैंड, ईरान।
पाकिस्तान की तरफ : चीन
दोनों देशों के लिए तटस्थ : सऊदी अरब, जर्मनी, रूस।

पाकिस्तान को क्यों टेरर स्टेट घोषित कर देना चाहिए?

पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी या एनसीटीए ने 69 आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित किया है, लेकिन पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अभी भी हिजबुल मुजाहिद्दीन, हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और अल-बद्र जैसे आतंकी संगठन खुलेआम सक्रिय हैं। पुलवामा हमले के बाद भारत समेत दुनिया के कई देशों के दवाब के बाद पाकिस्तान ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन यह प्रतिबंध कब तक रहेगा, इसकी गारंटी नहीं है। एनसीटीए के अनुसार, बलूचिस्तान और पीओके के गिलगित-बल्तिस्तान में चलने वाले आधे से ज्यादा आतंकी संगठनों का पाकिस्तान समर्थन करता है। वहीं, भारतीय गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक, भारत ने 41 आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें से आधे संगठन पाकिस्तान समर्थित हैं। भारत ने जिन पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, अल-बद्र, दुख्तरन-ए-मिल्लत, बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स और इंटरनेशन सिख यूथ फेडरेशन शामिल हैं।

एक्सपर्ट व्यू

1) पाक को कैसे एक टेरर स्टेट घोषित किया जा सकता है?
विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह ने भास्कर प्लस ऐप को बताया कि पाकिस्तान को यूएन असेंबली या यूएन सिक्योरिटी काउंसिल ही टेरर स्टेट घोषित कर सकती है। इसके लिए यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के सभी स्थायी सदस्यों का समर्थन जरूरी है, लेकिन चीन इसमें अड़ंगा डालेगा, क्योंकि वह पाक को अपना ‘सदाबहार मित्र’ कहता है। इसलिए बाकी देश तो हमारे साथ आ सकते हैं, लेकिन चीन हमारा साथ नहीं देगा। अगर हम पाक को टेरर स्टेट घोषित करना चाहते हैं तो इसके लिए हमें दुनियाभर में पाक के खिलाफ मुहिम छेड़नी होगी। अभी हमने पाक को अलग-थलग करने के लिए मुहिम तो छेड़ी है, लेकिन उसे आतंकी देश या टेरर स्टेट घोषित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

 

2) अगर पाक को टेरर स्टेट घोषित कर भी दिया तो क्या फर्क पड़ेगा?
रहीस सिंह कहते हैं कि अगर पाक को टेरर स्टेट घोषित कर दिया जाता है तो एक विश्वमत बन जाएगा कि आतंक से लड़ने के लिए पाक के खिलाफ युद्ध होना चाहिए। अभी यह द्विपक्षीय मामला है यानी भारत-पाकिस्तान के बीच है, लेकिन बाद में यह वैश्विक बन जाएगा। इससे पाकिस्तान को दूसरे देशों से मिलने वाली फंडिंग बंद हो जाएगी और भारत के खिलाफ पाक को आतंक का इस्तेमाल करना बंद करना होगा।

3) क्या पहले किसी देश को टेरर स्टेट घोषित किया गया है?
सिंह बताते हैं कि अभी तक किसी भी देश को टेरर स्टेट घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, 9/11 की घटना के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ईरान, इराक, लीबिया, क्यूबा और उत्तर कोरिया को ‘बुराई की धुरी’ बताया था। ये एक तरह से आतंकी देश घोषित करने जैसा ही था।

देशों का रुख भारत के साथ
पुलवामा हमले के बाद से ही दुनियाभर के देश आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ खड़े दिखाई दिए। तमाम देशों ने इस हमले की निंदा की। यूएन में भी इस हमले की निंदा की गई और पाक स्थित जैश-ए-मोहम्मद को इसके लिए जिम्मेदार माना। अब जब भारत ने पुलवामा का बदला पाक में घुसकर और जैश के ठिकाने को नेस्तानाबूद कर ले लिया है, तो भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के साथ ही नजर आ रहा है। किसी भी देश ने भारत के इस कदम की निंदा नहीं की। हालांकि वैश्विक स्तर पर भारत-पाक से शांति कायम करने की अपील जरूर की जा रही है।

अमेरिका
पाक स्थित आतंकी ठिकानों पर भारतीय हवाई हमले के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की सलाह दी। पोम्पियो ने एक बयान जारी कर कहा, ‘मैंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस मामले में बात की और सैन्य कार्रवाई की बजाय आतंकी संगठनों पर कार्रवाई कर तनाव कम करने के लिए कहा है।’

फ्रांस
फ्रांस ने भी आतंक के खिलाफ इस कार्रवाई पर भारत का साथ दिया है। फ्रांस विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि भारत को सीमा पार से हो रहे आतंकी हमलों से खुद की सुरक्षा करने का अधिकार है और कार्रवाई करने का भी। बयान में पाकिस्तान को अपनी सरजमीं से संचालित आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को भी कहा गया है।

चीन
चीन ने इस मामले में आतंकवाद की निंदा तो की, लेकिन अपने साथी पाकिस्तान को आतंक से लड़ने वाला देश बताया। चीन ने साथ ही दोनों देशों से सीमा पर शांति फिर से स्थापित करने की अपील की है। वुझेन में रूस और भारत के साथ चल रही बैठक के बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘हम आतंक के खिलाफ हैं। हालांिक हम विश्वास करते हैं कि पाकिस्तान ने भी हमेशा आतंक का विरोध किया है। दोनों देशों से मैं यह उम्मीद करता हूं कि वे बातचीत के जरिए इस तनाव को खत्म करेंगे।’

ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया भी इस मामले में भारत के पक्ष में आया है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मेरिस पायने ने कहा, ‘‘भारत ने कहा है कि उसने पाक स्थित आतंकी संगठनों पर कार्रवाई की है। अब पाकिस्तान को अपने इलाके में स्थित आतंकी संगठनों पर जल्द ही निर्णायक कार्रवाई करने की जरूरत है।’’

यूरोपियन यूनियन
यूरोपियन यूनियन की प्रवक्ता माज़ा कोचिजेंचिक ने कहा, ‘‘हम दोनों देशों के संपर्क में हैं और हम विश्वास करते हैं कि दोनों देशों का परस्पर तनाव को खत्म करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए।’’

ब्रिटेन
ब्रिटेन ने कहा था कि हम अपने अन्य साथी देशों और यूएन सुरक्षा परिषद के साथ मिलकर यह पुख्ता कर रहे हैं कि पुलवामा हमले के जिम्मेदारों को सजा मिले। ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने इस हमले के बाद भारत-पाक के विदेश मंत्रियों से भी क्षेत्र में शांित स्थापित करने की बात कही थी।

अफगानिस्तान
इधर, अफगानिस्तान हमेशा से ही यह कहता आया है कि पाक स्थित आतंकी संगठन ही उसके देश में अराजकता फैलाते हैं। जर्मनी और सऊदी अरब ने इस पूरे मामले में दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।

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