December 7, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ

स्पेस-एक्स के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गये हैं. उनकी कुल संपत्ति 185 बिलियन डॉलर (1 खरब 85 अरब डॉलर) को पार कर गई है.

मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने इस साल अपनी मार्केट वैल्यू में काफ़ी वृद्धि की है. बुधवार को यह पहली बार 700 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई जो कार कंपनी टोयोटा, फ़ॉक्सवैगन, ह्युंदै, जीएम और फ़ोर्ड की कुल मार्केट वैल्यू से भी अधिक है.

अमेरिका के कई आर्थिक विश्लेषकों ने लिखा है कि ‘अमेरिका में सत्ता बदलने के बाद, एलन मस्क की कंपनी का भविष्य और भी सुनहरा हो सकता है.’

 

 

उनका मानना है कि ‘डेमोक्रैट्स के आने से इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला का काम और भी बढ़ेगा क्योंकि जो बाइडन की पार्टी ने चुनाव अभियान के दौरान ‘ग्रीन-एजेंडे’ को बढ़ावा देने के लगातार वादे किये थे.’

कौन हैं एलन मस्क और क्या-क्या करते हैं?

एलन मस्क के काम का दायरा सिर्फ़ भविष्य की कारें बनाने वाली कंपनी तक सीमित नहीं है. उनकी कंपनी टेस्ला इलेक्ट्रिक कारों में लगने वाले पुर्ज़े और बैट्रियाँ बनाती है जिन्हें दूसरे कार निर्माताओं को बेचा जाता है.

वे घरों में लगने वाले ‘सोलर एनर्जी सिस्टम’ बनाते हैं जिसकी माँग वक़्त के साथ बढ़ी है. वे एक अंतरिक्ष अन्वेषण कंपनी भी चलाते हैं. साथ ही वे अमेरिका में ‘सुपर-फ़ास्ट अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ का ख़ाका तैयार कर रहे हैं.

आज के समय में एलन मस्क की पहचान एक अमेरिकी उद्यमी के तौर पर है, पर उनका जन्म दक्षिण अफ़्रीका में हुआ था. उनकी माँ मूल रूप से कनाडा की हैं और पिता दक्षिण अफ़्रीका के. मस्क के अनुसार, उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक़ था.

वे कहते हैं कि ‘बचपन में मैं बहुत ज़्यादा शांत रहता था, इस वजह से मुझे बहुत परेशान भी किया गया.’

10 साल की उम्र में एलन मस्क ने कम्यूटर प्रोग्रामिंग सीखी और 12 साल की उम्र में उन्होंने ‘ब्लास्टर’ नामक एक वीडियो गेम तैयार किया जिसे एक स्थानीय मैग्ज़ीन ने उनसे पाँच सौ अमेरिकी डॉलर में ख़रीदा. इसे मस्क की पहली ‘व्यापारिक उपलब्धि’ कहा जा सकता है.

49 वर्षीय एलन मस्क के बिज़नेस की शुरुआत असल में साल 1999 में हुई, जब उन्होंने और उनके भाई किंबल ने अपनी सॉफ़्टवेयर कंपनी ‘ज़िप-2’ के लिए एक सफल डील तलाश ली.

इससे मिले पैसे को, 27 वर्ष की उम्र में मस्क ने एक नई कंपनी में लगाया जिसका नाम था ‘एक्स डॉट कॉम’ और इस कंपनी का दावा था कि ‘वो पैसा ट्रांसफ़र करने की व्यवस्था में क्रांति लाने वाली है.’

मस्क की इसी कंपनी को आज ‘पे-पाल’ के नाम से जाना जाता है जिसे साल 2002 में ई-बेय ने ख़रीद लिया था और इसके लिए मस्क को 165 मिलियन डॉलर मिले थे. यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी.

इसके बाद मस्क ने अंतरिक्ष अन्वेषण की तकनीकों पर काम करना शुरू किया. उनके इसी प्रोग्राम को ‘स्पेस-एक्स’ का नाम दिया गया जिसने कहा कि ‘मनुष्य आने वाले वक़्त में दूसरे ग्रहों पर भी रह सकेंगे.’

साल 2004 में एलन मस्क ने इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की बुनियाद रखी और उन्होंने कहा, “भविष्य में सब कुछ इलेक्ट्रिक होगा, स्पेस में जाने वाले रॉकेट भी और टेस्ला इस बदलाव को लाने में अहम भूमिका निभायेगी.”

मस्क की सफलता का राज़ क्या है?

बीबीसी के संवाददाता जस्टिन रॉलेट ने एलन मस्क से एक साक्षात्कार के दौरान यह प्रश्न पूछा था कि ‘आपकी सफलता का राज़ क्या है?’ और रॉलेट को इसका जो जवाब समझ आया वो है: ‘एलन मस्क का बिज़नेस के प्रति ‘एटिट्यूड’ यानी व्यापार और अपने काम को लेकर उनका अलग नज़रिया.’

कुछ वर्ष पहले हुए इस साक्षात्कार में मस्क ने कहा था, “मैं नहीं जानता कि मेरे पास कितनी संपत्ति है. ये इस तरह से नहीं है कि कहीं नोट के बंडल पड़े हुए हैं. इसे ऐसे देखना चाहिए कि टेस्ला, स्पेस-एक्स और सोलर सिटी में मेरी हिस्सेदारी है और बाज़ार में उस हिस्सेदारी की कुछ क़ीमत है. पर मुझे वाक़ई इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि मेरे काम करने का लक्ष्य ये नहीं है.”

रॉलेट लिखते हैं कि ‘मस्क का यह नज़रिया शायद काम कर रहा है. उनके पास आज जितनी संपत्ति है, उसमें वे चाहें तो दुनिया की कई बड़ी कार निर्माता कंपनियों को एक साथ ख़रीद सकते हैं. वे इस साल 50 वर्ष के हो जायेंगे, पर एक ‘दौलतमंद शख़्स’ के तौर पर दुनिया को अलविदा कहने का उनका सपना बिल्कुल नहीं है.’

मस्क कहते हैं कि वे मंगल ग्रह पर एक बेस बनाने में अपनी पूंजी का सबसे बड़ा हिस्सा लगाना चाहते हैं और उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर उन्होंने इस मिशन को सफल बनाने में अपनी सारी पूंजी लगा दी.

मंगल ग्रह पर मनुष्यों का एक बेस, मस्क की नज़र में बहुत बड़ी सफलता होगी.

वे मानते हैं कि ‘इससे भविष्य बेहतर होगा.’ स्पेस-एक्स की स्थापना को लेकर भी बीबीसी से हुए साक्षात्कार में मस्क ने कहा था, “मैंने कंपनी इसलिए बनाई क्योंकि मैं इस बात से असंतुष्ट था कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी अंतरिक्ष अन्वेषण को लेकर और महत्वकांक्षी क्यों नहीं है, वो क्यों और आगे का नहीं सोच पा रही. मैं उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में चाँद और मंगल ग्रह पर हमारा बेस हो और वहाँ के लिए लगातार फ़्लाइट्स चलें.”

लोग मुझे इंजीनियर के रूप में जानें’

 

मस्क चाहते हैं कि लोग उन्हें एक निवेशक से ज़्यादा, एक इंजीनियर के रूप में जानें. रॉलेट से साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “मैं हर सुबह किसी नई तकनीकी समस्या का हल ढूंढने के लिए उठना चाहता हूँ. बैंक में कितना पैसा है, इसे मैं सफलता का पैमाना नहीं मानता.”

रॉलेट लिखते हैं कि “मस्क कार उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं, वे मंगल ग्रह पर कॉलोनी बनाना चाहते हैं, वैक्यूम टनल में चलने वाली सुपर-फ़ास्ट ट्रेनें चलाना चाहते हैं, मनुष्यों के दिमाग़ से एआई यानी आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस को जोड़ना चाहते हैं और सौर उर्जा से दुनिया चलाना चाहते हैं. इन सब चीज़ों में एक चीज़ समान है, वो ये कि ऐसी भविष्य की कल्पनाएं आपको 1980 के दशक की शुरुआत में मिलने वाली बच्चों की पत्रिकाओं में मिलती थीं. और इसमें कोई छिपी हुई बात नहीं कि मस्क का बचपन दक्षिण अफ़्रीका में बहुत सारी पत्रिकाएं, क़िताबें पढ़कर और फ़िल्में देखकर गुज़रा.”

मस्क बदलाव की धीमी गति में विश्वास नहीं रखते. वे जल्द से जल्द जीवाश्म ईंधनों को पीछे छोड़ देना चाहते हैं. साथ ही मानवता के अस्तित्व को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए वे मंगल ग्रह पर उपनिवेश विकसित करने के पक्षधर हैं.

जोख़िम उठाने की आदत

एलन मस्क जोख़िम उठाने वाले शख़्स हैं और उन्होंने यह साबित किया है. 2008 में जब दुनिया ने आर्थिक मंदी का सामना किया तो मस्क की हालत भी काफ़ी ख़राब हो गई थी. इसके बाद उनकी नई कंपनियों ने कई असफलताएं देखीं. स्पेस-एक्स के पहले तीनों लॉन्च फ़ेल हुए. टेस्ला में भी उत्पादन से जुड़ी कई समस्याएं आती रहीं और मस्क तंगी में फँस गये.

अपने साक्षात्कार में एलन मस्क ने बताया था कि एक वक़्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपने ख़र्चों के लिए दोस्तों से पैसे उधार लेने पड़े.

पर क्या उन्हें कभी दिवालिया होने का डर नहीं हुआ? इस सवाल के जवाब में एलन मस्क ने जस्टिन रॉलेट से कहा था, “ज़्यादा से ज़्यादा क्या होता, मेरे बच्चों को सरकारी स्कूल में जाना पड़ता, तो इसमें क्या बड़ी बात होती, मैं ख़ुद सरकारी स्कूल में पढ़ा हूँ.”

रॉलेट लिखते हैं, “हमारी मुलाक़ात के दौरान मैंने पाया था कि मस्क एक चीज़ से ज़रूर निराश थे और वो थीं आलोचनाएं. उनका कहना था कि आलोचनाएं किसी आधार पर होनी चाहिए, पर यहाँ तो लोग खुलेतौर पर टेस्ला के डूबने का इंतज़ार कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वे आलोचनाओं की वजह से अपने इरादों में कभी बदलाव नहीं करते. मस्क के अनुसार, जब उन्होंने स्पेस-एक्स और टेस्ला की नीव रखी थी, तब उन्हें ख़ुद विश्वास नहीं था कि वो इससे पैसा कमा सकेंगे.”

काम करने की लत

एलन मस्क को क़रीब से जानने वाले कहते हैं कि उन्हें काम करने की लत है. टेस्ला मॉडल-3 को तैयार करते समय उन्होंने कहा था कि ‘वे हफ़्ते में 120 घंटे काम करते हैं और उसमें उन्हें मज़ा आता है.’

कोरोना महामारी के दौरान जब सैन फ़्रांसिस्को स्थित उनकी फ़ैक्ट्री को बंद करना पड़ा, तो लॉकडाउन के प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ एलन मस्क खुलकर बोले. उन्होंने कहा, ‘जो लोग महामारी का हौवा बना रहे हैं, वो बेवक़ूफ़ हैं.’ उन्होंने घर में रहने के आदेशों को ‘ज़बरदस्ती’ बताया और कहा कि ‘कोविड लॉकडाउन संवैधानिक अधिकारों के ख़िलाफ़ है.’

महामारी के दौरान ही एलन मस्क के घर बेटे का जन्म हुआ. इस मौक़े पर उन्होंने ट्विटर के ज़रिये दुनिया को बताया कि उन्होंने बेटे का नाम X Æ A-12 रखा है.

कुछ लोग मानते हैं कि एलन मस्क के मन को पढ़ा नहीं जा सकता और उनके व्यवहार का पूर्वानुमान मुश्किल है. लेकिन इसका उनके काम पर ज़रा भी असर नहीं दिखता. बतौर उद्यमी वे एक दूरदर्शी इंसान हैं.

सितंबर, 2020 में उन्होंने कहा कि ‘जल्द ही उनकी कंपनी की सभी कारें सेल्फ़ ड्राइविंग वाली होंगी.’ वे अगले तीन वर्षों में सस्ती इलेक्ट्रिक कारें लाने का भी इरादा रखते हैं.

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