January 16, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

और जिदंगी बदल गई:जब झन्‍नाटेदार तमाचा पड़ने पर लाल बहादुर शास्‍त्री बोले, मेरा बाप मर गया है फिर भी मुझे मारते हो

सच के साथ |लाल बहादुर तब ठीक से बोल भी नहीं पाते थे। सिर से पिता का साया उठ चुका था। मां बच्‍चों को लेकर अपने पिता के यहां चली आईं। पढ़ाई-लिखाई के लिए दूसरे गांव के स्‍कूल में दाखिला करा दिया गया। शास्‍त्री अपने कुछ दोस्‍तों के साथ आते-जाते थे। रास्‍ते में एक बाग पड़ता था। उस वक्‍त उनकी उम्र 5-6 साल रही होगी। एक दिन बगीचे की रखवाली करने वाला नदारद था। लड़कों को लगा इससे अच्‍छा मौका नहीं मिलेगा। सब लपक कर पेड़ों पर चढ़ गए। कुछ फल तोड़े मगर धमाचौकड़ी मचाने में ज्‍यादा ध्‍यान रहा। इतने में माली आ गया। बाकी सब तो भाग गए मगर अबोध शास्‍त्री वहीं खड़े रहे। उनके हाथ में कोई फल नहीं, एक गुलाब का फूल था जो उन्‍होंने उसी बाग से तोड़ा था।

एक फूल तोड़ने की सजा… दो तमाचे

माली ने बाग की हालत देखी और फिर नन्‍हे शास्‍त्री को। सबका गुस्‍सा उसी पर उतरा। एक झन्‍नाटेदार तमाचा उस बच्‍चे के गाल पर पड़ा तो वह रोने लगा। मासूमियत में शास्‍त्री बोले, “तुम नहीं जानते, मेरा बाप मर गया है फिर भी तुम मुझे मारते हो। दया नहीं करते।” शास्‍त्री को लगा था कि पिता के न होने से लोगों की सहानुभूति मिलेगी, लोग प्‍यार करेंगे। केवल एक फूल तोड़ने की छोटी की गलती के लिए उसे माफ कर दिया जाएगा, मगर ऐसा हुआ नहीं। जोरदार तमाचे ने उस बच्‍चे की सारी आशाओं को खत्‍म कर दिया था। वह वहीं खड़ा सुबकता रहा। माली ने देखा कि ये बच्‍चा अब भी नहीं भागा, न ही उसकी आंखों में डर है। उसने एक तमाचा और रसीद कर दिया और जो कहा, वह शास्‍त्री के लिए जिंदगी भर की सीख बन गया।

…और उस दिन से सबकुछ बदल गया

माली ने कहा था, “जब तुम्‍हारा बाप नहीं है, तब तो तुम्‍हें ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए। और सावधान रहना चाहिए। तुम्‍हें तो नेकचलन और ईमानदार बनना चाहिए।” लाल बहादुर शास्‍त्री के मन में उस दिन यह बात बैठ गई कि जिनके पिता नहीं होते, उन्‍हें सावधान रहना चाहिए। ऐसे निरीह बच्‍चों को किसी और से प्‍यार की आशा नहीं रखनी चाहिए। कुछ पाना हो तो उसके लायक बनना चाहिए और उसके लिए खूब और लगातार मेहनत करनी चाहिए।

जब गंगा तैरकर अपने गांव पहुंचे शास्‍त्री

शास्‍त्रीजी के गंगा में तैर कर जाने का किस्‍सा हमने किताबों में खूब पढ़ा है। हुआ यूं था कि उन्‍हें बनारस से गंगा पार कर अपने घर रामनगर जाना था मगर किराये के पैसे नहीं थे। उस किशोर उम्र में शास्‍त्री ने गंगा में छलांग लगा दी और अपने गांव पहुंच गए। बाद में शास्‍त्रीजी ने इस प्रसंग की चर्चा करते हुए लिखा था, “अंधेरा हो चला था। मुझे घर जाना था और पास में जाने के लिए पैसे नहीं थे। अत: मैंने तैरकर ही घर पहुंचने का निश्‍चय किया और गंगा में कूद पड़ा। सभी लोग आश्‍चर्यचकित रह गए। नौका पर सवार लोग कहने लगे, भला इस लड़के को देखो… अकेले ही तैर रहा है।”

नैशनल बुक ट्रस्‍ट की ओर से प्रकाशित डॉ. राष्ट्रबंधु की पुस्‍तक ‘लाल बहादुर शास्‍त्री’ से साभार

बेटे ने कार चला ली तो लाल बहादुर शास्त्री ने Km के हिसाब से पैसा सरकारी खाते में जमा कराया-

खबर को आठ कॉलम में इस हेडिंग के साथ बैनर बनाया गया, “शास्त्री डाइज आफ्टर ए हर्ट अटैक

 

हालांकि ये खबर ऐतिहासिक समझौते की बड़ी खबरों के बीच लंबी सिंगल कॉलम में आई. टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस पर जो रिपोर्ट छापी, वो ज्यों की त्यों हिंदू अनुवाद के साथ पेश है-

ताशकंद, 11 जनवरी. ताशकंद में आज रात 1.32 बजे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का हृदय गति रुकने से निधन हो गया.

पीटीआई की इस खबर में कहा गया, उनका पार्थिव शरीर आज सुबह वहां से विमान के जरिए दिल्ली लाया जा रहा है.

श्री शास्त्री ने रात 1.25 बजे सीने में दर्द की शिकायत की. इसके बाद वो अचेत हो गए. सात मिनट के अंदर ही उनकी मृत्यु हो गई.

ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के बाद रात में सोवियत संघ के प्रमुख अलेक्सी कोशिगिन ने भोज दिया था, जिसमें शास्त्री स्वस्थ और बेहतर लग रहे थे.

उनके साथ दौरे पर गए मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह ने बताया, जब शास्त्री ने हर्ट अटैक की शिकायत की तो कुछ ही मिनट में भारतीय डॉक्टर वहां पहुंच गया था.

इसके बाद एक रूसी डॉक्टर भी वहां आ गया. उसके बाद दोनों ने मिलकर काफी समय तक उन्हें ठीक करने की कोशिश की लेकिन हृदय ने जवाब देना बंद कर दिया था.

इस समय सोवियत संघ के प्रमुख कोशिगिन उसी जगह हैं, जहां शास्त्री का देहांत हुआ, उनकी आंखों में आंसू हैं.

 

इस खबर में नीचे एएफपी के हवाले से कहा गया, निधन की आधिकारिक पुष्टि यहां के स्थानीय समय के अनुसार रात 03.00 बजे की गई जबकि आईएसटी के अनुसार रात 02.00 बजे.

शास्त्री का पार्थिव शरीर विमान से सुबह 09.00 बजे दिल्ली पहुंचेगा. रात्रि भोज के बाद उन्होंने आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर इस समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था. पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के साथ उनका ये एक अच्छा समझौता हो गया.

पाकिस्तान राष्ट्रपति अय़ूब ने इसके जवाब में कहा, अल्लाह सबकुछ सही कर देगा.

इसी खबर में नई दिल्ली से पीटीआई के हवाले से एक खबर जोड़ी गई, राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृह मंत्री गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद की शपथ दिला दी है.

 

 

ताशकंद में शास्त्री के निधन के बाद उनकी एक प्रतिमा स्थापित की गई

 

उस रात के बारे में साथ गए कुलदीप नैयर ने जो लिखा

उस यात्रा में जाने-माने पत्रकार कुलदीप नैयर भी शा्स्त्री के साथ गए थे. उन्होंने अपनी आत्मकथा “बियांड द लाइंस – एन आटोबॉयोग्राफी” में लिखा, उस रात न जाने क्यों मुझे शास्त्री की मौत का पूर्वाभास हो गया था. किसी ने मेरे दरवाजे पर दस्तक दी तो मैं शास्त्री की मौत का ही सपना देख रहा था. मैं हड़बड़ाकर उठा और दरवाजे की ओर भागा. बाहर कॉरिडोर में खड़ी एक महिला ने मुझे बताया, आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं. मैने झट कपड़े पहने और भारतीय अधिकारी के साथ कार में शास्त्री जहां ठहरे थे, उस पर चल पड़ा, जो कुछ ही दूर पर था.

 

शास्त्री विशाल पलंग में निर्जीव पड़े थे

किताब में आगे लिखा, “मुझे बरामदे में कोशिगिन खड़े दिखाई दिए. उन्होंने अपने हाथ खड़े करके शास्त्री के नहीं रहने का संकेत दिया. शास्त्री विशाल पलंग पर निर्जीव थे. पास ही कालीन पर बड़ी तरतीब से उनके स्लीपर पड़े हुए थे. कमरे के एक कोने में पड़ी ड्रेसिंग टेबल पर एक थर्मस लुढ़का पड़ा था. ऐसा लगता था कि शास्त्री ने इसे खोलने की कोशिश की थी. कमरे में कोई घंटी नहीं थी. इस चुक को लेकर जब संसद में सरकार पर हमला किया गया था तो सरकार साफ झठ बोल गई थी.”

 

वर्ष 1966 में ताशकंद समझौते के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान, सोवियत संघ के प्रमुख अलेक्सी कोशिगिन के साथ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री,

 

उनके घर से रात में क्या फोन आया था

“रात में दिल्ली से उनके एक अन्य् निजी सचिव वेंकटरमन का फोन आया. जिसमें उ्न्हें बताया गया कि शास्त्री के घर के लोग खुश नहीं थे. उन्होंने ये भी बताया कि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सुरेंद्र नाथ द्विवेदी और जनसंघ के अटल बिहारी वाजपेयी ने हाजी पीर और टिथवाल से भारतीय सेनाओं को पीछे हटाने की आलोचना की थी. जब शास्त्री को ये बात रात में भोज से वापस लौटने के बाद बताई गई तो उन्होंने कहा कि विपक्ष तो समझौते की आलोचना करेगा ही. फिर भी शास्त्री सचमुच इन प्रतिक्रियाओं को लेकर काफी चिंतित थे.”

 

बेटी ने फोन पर क्या बातचीत की थी

नैयर की किताब के अनुसार, ” रात करीब 11 बजे उनके सचिव जगन्नाथ सहाय ने शास्त्री से पूछा कि क्या वो अपने घर पर बात करना चाहेंगे, क्योंकि पिछले दो दिनों से उनकी अपने परिवार से बात नहीं हो पाई थी. शास्त्री ने पहले तो ना कहा, फिर इरादा बदलकर नंबर मिलाने के लिए कहा. ये भी हाटलाइन थी, इसलिए नंबर तुरंत मिल गया. ”

 

सबसे पहले शास्त्री की दामाद वीएन सिंह से बात हुई. उन्होने कुछ खास नहीं कहा. इसके बाद शास्त्री की सबसे बड़ी और चहेती बेटी कुसुम फोन पर आई. शास्त्री ने उनसे पूछा, तुमको कैसा लगा. कुसुम ने जवाब दिया, बाबू जी हमें अच्छा नहीं लगा. शास्त्री ने अम्मा के बारे में पूछा. यानि शास्त्री जी की पत्नी ललिता जी के बारे में. तब कुसुम ने कहा, उन्हें भी अच्छा नहीं लगा. इस पर शास्त्री जी ने उदास होकर अपने सहयोगियों से कहा, अगर घरवालों को अच्छा नहीं लगा तो बाहर वाले क्या कहेंगे.”

 

रात 0120 बजे शास्त्री ने अपने सहायकों से कहा, डॉक्टर को बुलाओ. आनन-फानन में जब तक भारतीय डॉक्टर चुग वहां पहुंचे, तब तक शास्त्री जी का निधन हो चुका था. उसके बाद रूसी डॉक्टर भी वहां आए. डॉक्टरों के अनुसार उन्हें हर्ट अटैक हुआ था.

 

क्यों विचलित हो गए थे शास्त्री जी

शास्त्री ने जब कुसुम से अम्मा को फोन देने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि अम्मा बात नहीं करना चाहतीं. शास्त्री जी के बार बार कहने के बाद भी ललिता जी फोन पर नहीं आईं. इसके बाद शास्त्री जी बहुत ज्यादा विचलित हो गए थे.

 

सोने से पहले किसने दिया था दूध

इसके बाद रात में सोने के पहले उनके सहायक रामनाथ ने उन्हें दूध दिया, जो हमेशा सोने से पहले लेते थे. इसके बाद शास्त्री जी चहलकदमी करने लगे. इसके बाद उन्होने पानी मांगा. आधी रात से कुछ पहले उन्होंने रामनाथ को अपने कमरे में जाकर सोने के लिए कहा, क्योंकि सुबह जल्दी उठकर काबुल के लिए विमान पकड़ना था. जब रामनाथ ने उन्हीं के कमरे में फर्श पर सोने की इच्छा जताई तो शास्त्री ने ऊपर उन्हें अपने कमरे में जाने को कहा.

 

रात 01.20 बजे डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा

रात 01.20 मिनट पर जब भारतीय प्रधानमंत्री का दल सुबह जाने के लिए अपना सामान बांध रहा थो तो सचिव जगन्नाथ के दरवाजे पर शास्त्री जी दिखाई दिए. उन्होंने बहुत मुश्किल से कहा, डॉक्टर साहब कहां हैं. फिर बैठक में लौटते ही वो बुरी तरह खांसने लगे. उन्होंने सहयोगियों ने बिस्तर तक पहुंचाया. जगन्नाथ ने पानी पिलाया. शास्त्री ने अपनी छाती को छुआ और बेहोश हो गए.

 

तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था

डॉक्टर चुग तब तक पहुंच चुके थे. उन्होंने जब शास्त्री की कलाई देखी तो उनकी रूलाई छूट गई, उन्होंने फटाफट इंजेक्शन लगाया. कोई प्रतिक्रिया नहीं होने पर मुंह से मुंह की श्वांस प्रक्रिया की. फिर एक लेडी रूसी डॉक्टर भी आ पहुंची. फिर कुछ और डॉक्टर. लेकिन शास्त्री दम तोड़ चुके थे.

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