January 25, 2021

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किसान आंदोलन: महाराष्ट्र से हज़ारों किसान 21 दिसंबर को करेंगे दिल्ली के लिए कूच;एआईकेएस

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ वह भी जुड़ेगा। आईकेएस के नेता अजीत नवाले और अशोक धवाले सेंटर, फोर इंडियन ट्रेड यूनिनस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. डी एम ददार और सुनील मालुसारे ने नासिक में यह घोषणा की। धवाले ने कहा, ‘‘ तीनों कानूनों का लक्ष्य उद्योगपतियों को किसानों की कीमत पर मुनाफा कमाने की अनुमति देना है। उनका विरोध करने के लिए हम 21 दिसंबर को नासिक से रवाना होंगे और प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे।

नई दिल्ली पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के बाद अब महाराष्ट्र के किसानों ने भी दिल्ली कूच का ऐलान कर दिया है। हजारों किसान 21 दिसंबर को नासिक से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

महाराष्ट्र के 20 से अधिक जिलों के हजारों किसान 21 दिसंबर को नासिक से जुटेंगे और पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली के आसपास डेरा डाले हुए लाखों किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष को मजबूत करने के लिए दिल्ली के लिए मार्च शुरू करेंगे। इसमें बड़ी संख्या में किसान अपनी गाड़ियों से शामिल होंगे। वे दिल्ली में 1266 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे और 24 दिसंबर को शाहजहांपुर में राजस्थान-हरियाणा सीमा पर किसान आंदोलन में शामिल होंगे।

वाहन जत्था 21 दिसंबर को दोपहर में नासिक में एक विशाल जनसभा के साथ शुरू होगा। यहां नासिक के बाद रिलायंस पेट्रोल पंप पर एक बड़े प्रदर्शन का भी आह्वान किया गया है। मध्य प्रदेश में प्रवेश करने से पहले महाराष्ट्र के नासिक और धुले जिलों में ओझर, पिंपलगाँव बसवंत, चंदवाड़, उमरेन, मालेगाँव, धुले और शिरपुर में हजारों लोगों द्वारा इन किसानों का स्वागत किया जाएगा।

यह जानकारी शुक्रवार को नासिक में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय किसान सभा के नेताओं ने दी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, पूर्व राज्य अध्यक्ष और जेपी गावित, राज्य महासचिव डॉ. अजीत नवाले, राज्य के संयुक्त सचिव सुनील मालुसरे और सीटू अध्यक्ष डॉ. डीएल कराड ने संबोधित किया।

उन्होंने बताया कि किसान तीन मुख्य मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं: सरकार तीन किसान विरोधी और कॉरपोरेट विकास अधिनियमों को निरस्त करे; बिजली संशोधन विधेयक वापस ले; और एमएसपी दरों पर खरीद और उत्पादन की पूरी लागत का डेढ़ गुना मूल्य पर एमएसपी प्रदान करने के लिए कानूनी उपाय सुनिश्चित करे।

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ वह भी जुड़ेगा। आईकेएस के नेता अजीत नवाले और अशोक धवाले सेंटर, फोर इंडियन ट्रेड यूनिनस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. डी एम ददार और सुनील मालुसारे ने नासिक में यह घोषणा की। धवाले ने कहा, ‘‘ तीनों कानूनों का लक्ष्य उद्योगपतियों को किसानों की कीमत पर मुनाफा कमाने की अनुमति देना है। उनका विरोध करने के लिए हम 21 दिसंबर को नासिक से रवाना होंगे और प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। हजारों किसानों के हमसे जुड़ने की संभावना है।’’ हजारों किसान तीन सप्ताह से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। गतिरोध दूर करने के लिए केंद्र और चार किसान संगठनों के बीच पांच दौर की औपचारिक वार्ता हो चुकी है लेकिन किसान संगठन इन कानूनों को वापस लेन का मांग कर रहे हैं। धवाले ने कहा कि एआईकेएस और संबद्ध संगठन विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 का भी विरोध करेंगे और उन्होंने दावा किया कि यह इस क्षेत्र के निजीकरण के लिए है जिससे लोगों का बिजली बिल बढ़ जाएगा।

2018 में भी महाराष्ट्र के किसानों ने एआईकेएस के नेतृत्व में हज़ारों की संख्या में नासिक से लेकर मुंबई तक पैदल लौंग मार्च किया था। इसे याद करते हुए अशोक धवले ने न्यूज़क्लिक से कहा कि “नासिक से मुंबई तक किसानों के मार्च ने महाराष्ट्र में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार के अहंकार को तोड़ दिया था। अब, मोदी सरकार का समय है। भारत के इतिहास में किसी अन्य सरकार ने किसानों पर आंसू गैस नहीं छोड़ी हैं और न इस तरह ठंड में पानी की बौछार की थी। लेकिन इन सभी चाल को नाकाम कर किसान दिल्ली के बाहरी इलाके में पहुंचे है।”

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के किसान तीन कानूनों को रद्द करने के लिए दिल्ली में चल रही ऐतिहासिक लड़ाई में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा, “इस आंदोलन की बुनियादी मांगों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार खरीद के लिए किसी भी चाल के साथ आ सकती है, लेकिन किसानों के पास बहुत धैर्य है। हम शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करेंगे जब तक कि किसान विरोधी कानूनों को खत्म नहीं किया जाता है।”  

धवले के अनुसार, पहले चरण में लगभग 20,000 किसानों के मार्च में शामिल होने की उम्मीद है। AIKS ने किसानों को लामबंद करने का बीड़ा उठाया, अन्य संगठन भी इसमें शामिल होने की योजना बना रहे हैं।

आपको बता दें कि किसान पिछले 24 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर इस हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमान के तले प्रदर्शन कर रहे हैं। वे केंद्र सरकार द्वार पारित तीन नए कृषि कानूनों को किसानों के लिए डेथ वारंट बता रहे हैं जबकि सरकार इसे किसानों के फ़ायदे में बताने पर तुली है। जिससे किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। सरकार पहले जिस आंदोलन को सिर्फ पंजाब का बताकर प्रचार कर रही थी लेकिन वास्तव में अब यह पूरे देश का आंदोलन बन गया है। कई राज्यों के किसान दिल्ली बॉर्डर पर आ गए हैं जबकि कुछ आ रहे हैं। इसके साथ ही बंगाल, बिहार, तमिलनाडु आदि राज्य हैं जहाँ किसान इन्ही मांगों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।  

किसानों की रैली नासिक से शुरू होगी और 22 दिसंबर को धुले में एक सार्वजनिक रैली का आयोजन होगा। दिल्ली पहुंचने के लिए किसान 1266 किलोमीटर का सफर तय करेंगे और 24 दिसंबर को आंदोलन से जुड़ेंगे।’ उन्होंने कहा कि हम अपनी पूरी तैयारी कर के जाएंगे जिससे हम वहां लंबे समय तक रुक सकें।

‘एमएसपी व्यवस्था के खिलाफ हैं नए कृषि कानून’
धवाले ने कहा कि नए कृषि-व्यापार कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था की सुरक्षा नहीं करते हैं और इसलिए हमारा संगठन इन कानूनों के विरोध में है। उन्होंने कहा, किसान सभा और सहयोगी संगठन बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 के खिलाफ भी प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इससे लोगों को दिक्कत होगी।

तीन हफ्ते से ज्यादा समय से चल रहा है आंदोलन
बता दें कि हजारों की संख्या में किसान पिछले तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन समाप्त करने के लिए किसान यूनियनों और सरकार के बीच वार्ताओं के पांच दौर हो चुके हैं लेकिन इनका कोई परिणाम नहीं निकला है। किसान कानूनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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