September 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

किस तरह धन ही करता हैं मनुष्य का नाश;

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किस तरह धन करता हैं मनुष्य का नाश

नमस्कार आज आपको मेरा यह लेख पढ़कर लगेगा की आखिर जिस धन के पीछे लोग पागल हैं उसके बिना रह नहीं सकते बस हर किसी को धुन सवार हैं की कहा से हमारे पास पैसे आ जाये गरीब हो चाहे आमिर हर कोई बस पैसा चाहता हैं!

धन से ही ख़ुशी धन से ही गम

इंसान की जिंदगी मैं धन ही ख़ुशी देता हैं और धन ही दुःख अब यह कैसे संभव होता हैं हर किसी इंसान को धन की चाहत होती हैं वह उस धन से दुनिया की सब ख़ुशी खरीदना चाहता हैं मगर कभी यही ख़ुशी आपके जिंदगी को बर्बाद भी कर सकती हैं


पैसा और आपकी ख़ुशी

पैसा आने पर आप सोचते हो की अब हमारी जिंदगी मैं सब ख़ुशी आ गई हैं जिंदगी की ऐसी कोनसी ख़ुशी नहीं हैं जो हम खरीद नहीं सकते लेकिन क्या आपको पता हैं की यही पैसा किस तरह आपको बर्बाद करता हैं तो देखे

नींद

जब भी आपके पास बहुत सा धन होता हैं वह धन सबसे पहले आपकी नींद को आपसे चुरा लेती हैं जहा आप पहले अपने छोटे से घर मैं चैन की नींद सोते थे वही आप आलीशान बंगले मैं एक पल की नींद नहीं ले सकते इसका कारन हैं पैसा

भूख

दूसरे और सबसे अहम् चीज़ हैं आपकी भूख जब आपके पास ज्यादा पैसे हो जाते हैं तो आपकी नींद के साथ आपकी भूख भी ख़तम हो जाती हैं जहा पहले आप आराम से बैठकर दो रोटी अपने परिवार के साथ बैठकर खाते थे वही अब आपके पास रोटी के लिए भी वक़्त ख़तम हो जाता हैं।

अपनों से दुरी

जब आपके पास पैसे आ जाते हैं तो आप उन पैसो को और जयदा करने की होड मैं लग जाते हैं आपका पूरा ध्यान बस पैसे कमाने मैं लग जाता हैं उस पैसे को होड़ मैं कब आपके अपने आपसे दूर हो जाते हैं आपको बहुत देर से पता चलता हैं।

दुश्मनी

जहा आप पहले सबके चाहते थे आज आपके पेसो की वजह से वही लोग आपके दुश्मन बन जाते हैं हर कोई आपको नुकसान पहुंचना चाहता हैं आपके घर के सदयस्य ही आपके दुश्मन हो जाते हैं।

बुरी लत

यही नहीं यह पैसा आपको धीरे धीरे बुराई की और खींचने लगता हैं आप जिसे शौक के रूप मैं लेते हो वही आदत बाद मैं आपकी लत बन जाती हैं और धीरे धीरे आपको अपने गिरफ्त मैं ले लेती हैं सब कारन हैं आपके पास जो फालतू पैसे हैं।

भय

इंसान के पास जायदा धन होने से उसको चिंता फ़िक्र और भय हमेशा सताती रहती हैं उसे ना केवल अपनी बल्कै अपने परिवार की चिंता भी लगी रहती हैं की कही कोई उसको और उसकी फॅमिली को नुकसान ना पंहुचा दे।

अपराध

पैसा ही इंसान को एक अपराधी बनने मैं मजबूर करता हैं ना चाहकर भी इंसान पेसो को लिए ऐसे ऐसे काम कर जाते हैं जिससे वह अपराधी बन जाता हैं।

लालच

इंसान के पास जितने पैसे होते हैं उतनी उसकी लालच बढ़ती जाती हैं आजकल लालच मैं लोग इतनी अंधे होते जा रहे है की अपने अपनों का खून कर रहे हैं पेसो को सामने कोई किसी रिश्ते की कदर नहीं कर रहा हैं।

सजा

जिस धन के लिए अपने सबकुछ छोड़ा वही धन पैसा एक दिन आपको बर्बाद कर देती हैं यही नहीं जो सपने पहले वह आपको दिखाती हैं अंत मैं वही सपने आपको बर्बाद कर देती हैं।

मौत

ज्यादा लालच पैसे की हवस आपको अंत मैं या तो अपराधी बनाकर सजा दिलवा देती हैं या फिर दुश्मनी करवकर आपकी मौत का कारन बन जाती हैं।

पैसा ही सबकुछ नहीं हैं

जिस तरह मैंने अपने लेख मैं एक आम इंसान को यह बताने समझने की कोशिश हैं की ईश्वर ने आपको जितना और जो भी दिया हैं उसी पर खुश रहे अगर जयदा पैसे की पीछे भागोगे तो अंत मैं आपका हाल भी ऐसा ही होगा जो मेरे लेख मैं हैं!!

2 thoughts on “किस तरह धन ही करता हैं मनुष्य का नाश;

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