June 29, 2022

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कुरुक्षेत्र : तालिबान की धमकी के बाद अमेरिका ही नहीं सऊदी अरब ने भी बढ़ाया पाकिस्तान पर दबाव

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की पाकिस्तान की वापसी ने युद्ध के मुहाने तक पहुंच चुके दोनों देशों के बीच तनाव खत्म भले न किया हो लेकिन काफी हद तक कम जरूर कर दिया है। संयोगवश ही सही लेकिन इस युवा वायुसैनिक के सीमा पार उतरने से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को यह मौका दे दिया कि वह भारतीय पायलट की सकुशल वापसी सुनिश्चित करके भारत और दुनिया को यह संदेश दे सकें कि वह वाकई नया पाकिस्तान बनाना चाहते हैं। इसलिए देश में अभिनंदन का वाकई अभिनंदन किया जाना चाहिए। इसे भारतीय कूटनीति की कामयाबी, अंतरराष्ट्रीय दबाव और इमरान की सदाशयता में से किसी एक या इन तीनों का मिला-जुला नतीजा मानें कि पाकिस्तान ने अभिनंदन को लौटा कर भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। लेकिन पाकिस्तान की इस पहल के पीछे अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देशों का दबाव भी काम कर रहा है, जो नहीं चाहते कि दक्षिण एशिया के ये दोनों देश आपस में जंग लड़ें। इसे भारतीय कूटनीति की सफलता भी माना जा सकता है।
बच गई भारत-पाक की बारूदी भिड़ंत
पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों की आतंकवादी हमले में हुई मौत के बाद से ही पूरे देश में शोक और गुस्सा दोनों ही चरम पर पहुंच गया। सरकार पर इस मामले में आतंकवादियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने का जबर्दस्त दबाव था।

हमारी खुफिया एजेंसियों ने अपने वैश्विक स्रोतों के जरिए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बड़े ठिकाने की जानकारी जुटाई। इसमें भारत के कुछ मित्र देशों के खुफिया संगठनों ने भी मदद की।

इसके बाद भारत के लड़ाकू मिराज विमानों ने न सिर्फ एलओसी पार की बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पारकर पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर बम बरसाए। बालाकोट में भारतीय वायुसेना द्वारा आतंकवादी अड्डों की तबाही के बाद पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों की भारतीय सीमा में घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात बन गए थे। लेकिन अमेरिका की कूटनीतिक सक्रियता ने दक्षिण एशिया के इन दोनों देशों की बारूदी भिडंत नहीं होने दी।
भारत की कूटनीतिक जीत
गौरतलब है कि आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले की अपनी संभावित कार्रवाई की जानकारी भारत अमेरिका को पहले ही दे चुका था और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार के तहत अमेरिका ने इस पर कोई एतराज भी नही जताया था। बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट के जरिए पहले ही बता दिया था कि भारत कुछ बड़ा कर सकता है।

साथ ही अमेरिका जो इन दिनों अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चत करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में तालिबान के नेताओं के साथ शांति वार्ता में जुटा है, वह नहीं चाहता है कि दक्षिण एशिया में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध या संघर्षपूर्ण तनाव के हालात बनें।

क्योंकि अफगान शांति समझौते की सफलता, बिना पाकिस्तान के सहयोग के मुमकिन नहीं है और अमेरिका हर हालत में इस समझौते को सफल बनाना चाहता है। इसलिए वह पाकिस्तान को किसी भी हालत में युद्ध या किसी अन्य संकट में नहीं फंसने देना चाहता है।

 

तालिबान के प्रवक्ता ने बयान के बाद स्थिति जटिल हुई:-

अमेरिका का अनुमान था कि भारत शायद अपने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर अपना मकसद पूरा कर लेगा और क्योंकि दोनों सेनाओं के लिए एलओसी के दोनों ओर आना-जाना कोई नई बात नहीं है, इसलिए पाकिस्तान भी अपना सख्त एतराज जताकर शांत हो जाएगा, जैसा कि उड़ी आतंकवादी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने किया था।

लेकिन भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने न सिर्फ एलओसी पार की बल्कि भारत-पाकिस्तान के बीच की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करके पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में चल रहे जैश के बड़े ठिकाने को निशाना बनाया। इससे बौखलाए पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने अगले दिन ही भारत की वायुसीमा का उल्लंघन किया और तनाव गंभीर स्थिति में पहुंच गया।

यह स्थिति अमेरिका के लिए तब और भी जटिल हो गई जब तालिबान के प्रवक्ता ने बयान दिया कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा और स्थिति बिगड़ी तो दोहा में अमेरिका के साथ तालिबान की शांति वार्ता पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक इसके बाद पर्दे के पीछे अमेरिका सक्रिय हुआ और दोनों देशों से कहा गया कि वो तुरंत स्थिति सामान्य करने की दिशा में कदम उठाएं। इसके बाद दोपहर लगभग तीन बजे भारत और पाकिस्तान ने सबसे पहले अपने नागरिक हवाई अड्डे जिन्हें बंद कर दिया गया था, उन्हें खोला और विमान सेवाएं बहाल की गईं।

इसके अगले दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद के विशेष सत्र में, पकड़े गए भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को भारत वापस भेजने की घोषणा कर दी। इसके बाद तनाव का ज्वार धीरे-धीरे उतरने लगा। अमेरिकी सक्रियता का संकेत एक बार फिर राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कहकर दिया कि जल्द ही भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर सुनने को मिलेगी।

 

अमेरिका ने साधे तीन निशाने:-

विदेशी मामलों के जानकारों और उनके सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी रणनीतिकारों ने इस मौके का इस्तेमाल करके अपने तीन निशाने साधे। उन्होंने न सिर्फ अपने स्तर से भारत और पाकिस्तान के साथ बैक चैनल बातचीत की बल्कि सऊदी अरब की भी मदद ली। हाल ही में सउदी अरब के क्राउन प्रिंस (युवराज) मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तान भारत और चीन की सफल यात्राएं की हैं और तीनों ही देशों में उन्हें बेहद सम्मान और सत्कार मिला।

सऊदी अरब ने पाकिस्तान को राजी किया कि वह भारत के प्रति दोस्ताना रुख का इजहार करते हुए सबसे पहले अपनी हिरासत से भारतीय पायलट अभिनंदन को वापस भारत भेजे और भारत से अनुरोध किया गया कि फिलहाल वह संयम बरते।

इस तरह अमेरिका ने एक तरफ अपनी अफगान वार्ता को खराब होने से बचा लिया। दूसरी तरफ आतंकवादी विरोधी भारत की कार्रवाई में भारत का खुलकर समर्थन किया और भारत का विश्वास जीत लिया।

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जिनकी प्रशासनिक क्षमता पर पाकिस्तान में भी उंगलियां उठ रही थीं, अचानक इस प्रकरण के बाद एक क्षेत्रीय नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इसका फायदा इमरान को पाकिस्तान के भीतर बाहर दोनों जगह मिल सकता है।

साथ ही अमेरिका ने सऊदी अरब की मदद लेकर वहां के युवा शासक जिन्हें आगे चलकर सऊदी का शाह बनना है, का कद भी अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय कूटनीति में काफी बढ़ा दिया है।

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