June 26, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

कोर्ट में जेठमलानी के कदम रखते ही बड़े-बड़े वकील ही नहीं जज भी खाते थे खौफ

पूर्व कानून मंत्री एवं वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का रविवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे जेठमलानी का आगामी 14 सिंतबर को 96वां जन्मदिन था। उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक और वकालत के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोदी रोड स्थित सीएनजी शवगृह में शाम को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, वरिष्ठ नेता शरद यादव सहित तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
हाई प्रोफाइल मर्डर हो या घोटालों के अभियुक्तों का बचाव। या फिर आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अभियुक्तों को छुड़ाना। ये ऐसे वकील थे जो हमेशा लहर के खिलाफ ही तैरते नजर आए। इनके कोर्टरूम में घुसते ही बड़े-बड़े वकील ही नहीं जज भी खौफ खाते थे। पूर्व कानून मंत्री एवं वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का रविवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे जेठमलानी का आगामी 14 सिंतबर को 96वां जन्मदिन था।

 

images(33)

 
96 वर्ष के होने के बाद भी उनकी याद्दाश्त, सेंस ऑफ ह्यूमर और आक्रामक शैली में जरा भी कमी नहीं आई थी। उनके पास वकालत का 77 साल का अनुभव था। यानी सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जजों की उम्र जेठमलानी के अनुभव से उन्नीस पड़ती है। विवादों से उन्हें कभी परहेज़ नहीं रहा और देश के लगभग हर बड़े मामले में वकील या नेता के रूप में भूमिका रही। सिर्फ 17 साल की उम्र में क़ानून की डिग्री लेने वाले राम जेठमलानी ने 13 साल की उम्र में ही मैट्रिक पास कर ली थी।

 
शुरू से ज़हीन माने जाने वाले जेठमलानी ने अविभाजित भारत के कराची शहर के एससी शाहनी लॉ कालेज से क़ानून में ही मास्टर्स की डिग्री ली और जल्द ही उन्होंने अपनी ‘लॉ फर्म’ भी बना ली। कराची में उनके साथ वकालत पढ़ने वाले दोस्त एके बरोही भी उनके साथ ‘लॉ फर्म’ में थे। यह बात हो रही है विभाजन से पहले की। मगर जब भारत आज़ाद हुआ और विभाजन हुआ तो दंगे भड़क गए। अपने मित्र की सलाह पर जेठमलानी भारत चले आए।
संयोग देखिए कि बाद में दोनों मित्र अपने अपने देशों के क़ानून मंत्री बने। वर्ष 1923 के 14 दिसंबर को सिंध के शिकारपुर में जन्मे राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत सिंध में बतौर प्रोफ़ेसर की थी। राम जेठमलानी ने हर काम उम्र से पहले ही किया। पढ़ाई भी और शादी भी। 18 साल की उम्र में ही उनकी शादी दुर्गा से हुई और बँटवारे से ठीक पहले उन्होंने अपनी तरह की वकील रत्ना शाहनी से शादी की। उनकी दोनों पत्नियां और चार बच्चे एक साथ रहते थे।

 

images(37).jpg

 

कराची से मुंबई आ जाने के बाद उन्होंने मुंबई गवर्नमेंट लॉ कालेज में पढ़ाना शुरू कर दिया फिर उन्होंने वकालत शुरू कर दी। राजनीति में भी उनका सफर मज़ेदार रहा। उन्हें भारतीय जनता पार्टी से 6 सालों के लिए निष्कासित किया जा चुका है लेकिन वे लालू यादव की पार्टी आरजेडी से संसद में पहुंचे हैं। आपातकाल के दौरान राम जेठमलानी को गिरफ्तारी से बचने के लिए भागकर कनाडा जाना पड़ा जहां वो दस महीनों तक रहे। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जमकर आलोचना की थी और उनके खिलाफ केरल की एक निचली अदालत ने गैर जमानती वॉरंट जारी कर दिया था।

 

images(35)

 
जेठमलानी के समर्थन में 300 वकील साथ आए और बॉम्बे हाई कोर्ट ने वॉरंट को रद्द कर दिया था। कनाडा में रहते हुए ही उन्होंने 1977 का लोकसभा चुनाव बॉम्बे उत्तर-पश्चिम सीट से लड़ा और जीत भी हासिल की। इसके अगले चुनावों में यानी 1980 में भी उन्होंने इस सीट से विजय हासिल की। हालांकि अगली बार यानी 1985 में वो कांग्रेस के सुनील दत्त से चुनाव हार गए थे।

 

ram_jethmalani_1567918678_725x725.jpg

 
मगर 1988 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य चुना गया। 1996 और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में वो भारत के क़ानून मंत्री बने। लेकिन तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल सोली सोराबजी से मतभेद के कारण प्रधानमंत्री ने उन्हें पद से हटा दिया। बहुत कम लोगों को पता है कि राम जेठमलानी अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ़ लखनऊ से चुनाव भी लड़ चुके हैं।

 

images(36)

 

उन्होंने राष्ट्रपति के चुनाव में भी अपनी उम्मीदवारी घोषित की थी। जेठमलानी पर हमेशा से ही अवसरवादी होने के आरोप लगते रहे। मगर उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और जब चाहा जिस पार्टी में आते रहे और जाते रहे। इस बार भाजपा ने उन्हें निष्कासित किया तो उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिलाया।
बतौर वकील भी जो मामले उन्होंने लड़े, उससे भी वो हमेशा चर्चा में रहे। चाहे वो हर्षद मेहता का मामला हो या प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान हुआ सांसद रिश्वत कांड। जेठमलानी ने बड़े-बड़े मामलों में अभियुक्तों की पैरवी की और हमेशा कहा कि ऐसा करना बतौर वकील उनका कर्तव्य है।

 

images(34)

 

 

ये भी पढ़ें ⬇️

कश्मीर में हिंदू राज और ग़ज़नी की अपमानजनक हार की कहानी: पढ़िए

पाक सैना ने कब्जा रखी है 9 हजार करोड़ से अधिक की संपति, इमरान कटोरा लेकर मांग रहे हैं फंड

बिना चप्पलों के गुजरा बचपन, परिश्रम के दम पर पाया मुकाम और बन गए इसरो अध्यक्ष

केजरीवाल के फ्री मेट्रो के वादे पर सुप्रीम कोर्ट का तंज, कहा- लुभावने वादे और नुकसान के दावे साथ नहीं चल सकते.. जानिए

घूस देकर भी जिस विभाग में नौकरी नहीं मिली, आज उसी विभाग के हैं मंत्री…

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.