September 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

क्या कामयाबी की राह में रोड़ा बन रहा है सोशल मीडिया?

हाल ही में नीट एग्जाम टॉप करने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स ने अपनी सफलता का राज सोशल मीडिया से दूरी को बताया। हमने इस मुद्दे पर यूपीएससी टॉपर्स और एक्टसपर्ट्स की राय जानी। पेश है एक रिपोर्ट…

 

 

आज के टाइम में यंगस्टर्स के सबसे फेवरिट टाइमपास की अगर बात करें, तो वह निश्चित रूप से सोशल मीडिया ही होगा। यही वजह है कि आजकल शायद ही ऐसा कोई यंग स्टूडेंट होगा, जिसके पास अपना स्मार्टफोन ना हो और उसमें फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और टिक टॉक जैसे सोशल मीडिया ऐप ना हों। यह तो हुई आम यंगस्टर्स की बात, लेकिन बात अगर टॉपर्स की करें, तो उनकी राय इस मामले में थोड़ा हटकर है। हाल ही में आए नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) के तमाम टॉपर्स के यूं तो अपने-अपने सक्सेस के फंडे हैं, लेकिन कईं नीट टॉपर्स ने अपनी सफलता में खुद सोशल मीडिया से दूर रहने को भी एक महत्वपूर्ण वजह बताया है। वहीं पैरंट्स भी अपने बच्चों के सोशल मीडिया पर ज्यादा टाइम बिताने से परेशान हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अपने बच्चे के मोबाइल फोन पर काफी समय बिताने से परेशान हाउसवाइफ सुनीता कहती हैं, ‘मेरा बेटा पढ़ाई में अच्छा है, लेकिन आजकल वह मोबाइल पर सोशल मीडिया में डूबा रहता है। प्रतियोगी परीक्षा में कामयाबी हासिल करने के लिए उसे पढ़ाई पर पूरा फोकस करने की जरूरत है। मैं अपने बेटे को लेकर बेहद चिंतित हूं कि सोशल मीडिया पर इतना टाइम देने के बाद वह कामयाबी कैसे हासिल कर पाएगा।

 

 

सोशल मीडिया से दूर रह मिली सक्सेस
नीट एग्जाम में सफलता हासिल करने वाले टॉपर्स न सिर्फ सोशल मीडिया से दूर रहे, बल्कि कई का तो यह भी कहना है कि उनके पास अपना स्मार्टफोन भी नहीं है। मसलन नीट में नंबर वन रैंक हासिल करने वाले जयपुर के नलिन खंडेलवाल ने कहा कि सफलता की चाहत में वह सोशल मीडिया से दूर रहा करते थे और रोजाना आठ घंटे पढ़ाई करते थे। यहां तक की उनके पास अपना स्मार्टफोन भी नहीं है। वहीं नीट में पांचवीं रैंक हासिल करने वाले मेरठ के अनंत जैन का भी कुछ यही फंडा है। स्कूल की पढ़ाई के साथ मेडिकल की तैयारी करने वाले अनंत ने अपनी सफलता को सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल और टीवी से दूरी बनाए रखी। वहीं नीट में आठवीं रैंक हासिल करने वाले लखनऊ के ध्रुव कुशवाहा ने भी अपनी सफलता का राज सोशल मीडिया से दूर रहकर पढ़ाई पर फोकस करने को दिया।

 

फायदेमंद भी हो सकता है सोशल मीडिया
अपनी यूपीएससी की तैयारी के दौरान मैं सोशल मीडिया पर लगातार ऐक्टिव था, लेकिन सिर्फ लिमिटेड प्लेटफॉर्म पर ही। लगातार पढ़ाई के बाद जब मैं शॉर्ट ब्रेक लेता था, तो उस दौरान फेसबुक या वॉट्सऐप देख लिया करता था। मैं कोई फनी विडियो देखता था या फिर देख लिया करता था कि मेरे फ्रेंड्स क्या कर रहे हैं। हालांकि यह सब मैं 10-15 मिनट के लिए ही करता था। इस तरह से सोशल मीडिया मेरे लिए रिफ्रेशर का काम करता था। हालांकि मैं अपनी पढ़ाई और सोशल मीडिया में बैलेंस बनाने में कामयाब रहा। लेकिन अगर किसी स्टूडेंट को लगता है कि सोशल मीडिया उसकी पढ़ाई को नुकसान पहुंचा रहा है, तो उसे अवॉइड करना चाहिए। वरना अगर आप सोशल मीडिया को सही तरीके से मैनेज कर पाएं, तो यह आपकी पढ़ाई में फायदेमंद ही साबित होगा।

अक्षतजैन, यूपीएससी टॉपर

 

 

दुधारी तलवार है सोशल मीडिया
सोशल मीडिया महज एक टूल है, जो कि अपने आप में बुरा नहीं है। दरअसल, यह एक दुधारी तलवार की तरह है। अगर आप सोशल मीडिया का सही उपयोग नहीं करेंगे, तो इसमें आपका टाइम वेस्ट होगा। वहीं यह बेहतर तैयारी में भी आपकी मदद कर सकता है। अपनी यूपीएससी की तैयारी के दौरान मैंने फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट को डिएक्टिवेट कर दिया था। मुझे लगा था कि इनका फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा होगा। लेकिन दूसरी ओर मैंने यूट्यूब, वॉटसऐप और टेलिग्राम को अपने फोन में रखा, क्योंकि इन पर बने कुछ पढ़ाई से जुड़े ग्रुप्स से मुझे तैयारी में मदद मिली। हालांकि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते वक्त गलत और सही के बीच के बैलेंस को बनाए रखना बेहद मुश्किल है।

श्रेयांस कुमट  यूपीएससी टॉपर

 

 

समझदारी से करें सोशल मीडिया का इस्तेमाल
अपनी यूपीएससी की तैयारी के दौरान मैंने इस माध्यम का अत्यधिक सीमित प्रयोग किया। वॉट्सऐप, टि्वटर और इंस्टाग्राम का तो मैं कतई प्रयोग नहीं करता था, केवल अपने ग्रुप के दोस्तों से जुड़ने के लिए फेसबुक पर कभी-कभी ऐक्टिव रहता था। हालांकि परीक्षा के दौरान तो वह भी बंद ही रखता था। मेरा मानना है कि अगर यह माध्यम आपकी तैयारी में मददगार साबित नहीं हो रहा है, तो इससे यथासंभव बचा जाए। हालांकि समान लक्ष्य वाले लोग अगर इसकी सहायता से जुड़ पाएं और सकारात्मक उपयोग हो, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। बेहतर होगा कि अगर हम अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए इस तकनीक का प्रयोग करें, जो अपने आप में न तो बुरी है न ही अच्छी, दरअसल, इसको इस्तेमाल करने का तरीका ही इसे अच्छा-बुरा बनाता है।-गंगा सिंह, यूपीएससी टॉपर

 

 

सोशल मीडिया का करें सीमित प्रयोग
यूं तो सोशल मीडिया का सीमित उपयोग अच्छी बात है, लेकिन किसी परीक्षा की तैयारी के दिनों में इनका प्रयोग न करना या बहुत ही सीमित करना ही ठीक रहता है। परीक्षा के दिनों में समय प्रबंधन को सोशल मीडिया बिगाड़ सकता है। हालांकि पिछले 4-5 वर्षों में सरकार के बहुत सारे मंत्रालय और आयोग इत्यादि सोशल मीडिया में ऑफिशल अकाउंट्स के जरिए काफी एक्टिव हैं, जिनसे यूपीएससी की तैयारी करने वाले परीक्षार्थियों को भी उपयोगी जानकारी मिलती है। लेकिन हम सोशल मीडिया पर सिर्फ वहीं तक सीमित रहे और दूसरी जगह समय खराब न करें, ऐसा करना बेहद मुश्किल है। इसलिए परीक्षाओं की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहना ही बेहतर है और अगर उपयोग करना ही है, तो बेहद महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ही करें। -देव चौधरी, यूपीएससी टॉपर

 

 

आपका मददगार भी है सोशल मीडिया
सोशल मीडिया का अगर आप समझदारी से इस्तेमाल करें, तो यह परीक्षा की तैयारी में आपका मददगार भी हो सकता है। अपनी यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान यूं तो मेरा सारा फोकस पढ़ाई पर ही रहता था। लेकिन पढ़ाई से ब्रेक लेने के दौरान मैं फेसबुक और वॉट्सऐप पर भी नजर मार लिया करता था। इससे मुझे अपने दोस्तों से जुड़ने में मदद मिलती थी और मैं थोड़ा रिफ्रेश हो जाता था। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया आपके लिए बेहद मददगार भी हो सकता है। बेशर्ते की आप उसका सही इस्तेमाल करें। आजकल आपको फेसबुक पर यूपीएससी की तैयारी से जुड़े ग्रुप्स और यूट्यूब पर जानकारों के विडियोज से भी परीक्षा से जुड़ी काफी जानकारियां मिल सकती हैं, जो कि आपके लिए मददगार हो सकती है। -निशांत जैन, यूपीएससी टॉपर

 

‘दिन में आधा घंटा बहुत है’
एजुकेशनल अपलिफ्टमेंट काउंसलर डॉ. प्रकृति पोद्दार बताती हैं कि एक दिन में आधा घंटा किसी बच्चे के सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहने के लिए पर्याप्त है। वह कहती हैं, ‘आजकल बच्चे सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही वक्त बिताते हैं, जो उनके विकास में बाधक है। आजकल तो बच्चे होमवर्क करते हुए भी मोबाइल पर लगे रहते हैं। एग्जाम देने वाले बच्चों के लिए तो यह सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन है। अगर कोई टॉपर इसे चला भी रहा है, तो उन्होंने भी इसे बहुत सीमित ही इस्तेमाल किया होगा, न कि पूरा-पूरा दिन इस पर लगे रहे होंगे।’ वह आगे कहती हैं, ‘वीकडेज में बच्चों को आधे घंटे से ज्यादा मोबाइल वगैरह नहीं इस्तेमाल करना चाहिए। वीकेंड्स पर यह समय बढ़कर एक घंटा हो सकता है।’ बकौल डॉ. प्रकृति, सोशल मीडिया को पूरी तरह बंद करना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए आपको उन्हें हर वक्त मॉनिटर करना होगा, जो कि आसान नहीं है।’

 

 

‘आपके ऊपर निर्भर है फायदा-नुकसान
प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार इस बारे में कहते हैं, ‘सोशल मीडिया बाधा बन रहा है या नहीं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपको जानकारी किस तरह की चाहिए। अगर आप यूपीएससी एस्पिरेंट हैं, तो जिस तरह देश-दुनिया से अपडेट रहने की जरूरत होती है, उसमें सोशल मीडिया मदद कर सकता है। लेकिन जब मेडिकल एग्जाम की बात आती है, तो उसकी पढ़ाई में सोशल मीडिया पर मदद नहीं मिल सकती। ये सोशल मीडिया के अलग-अलग लेयर्स हैं। लेकिन जिस तरह आज स्टूडेंट्स के पास मोबाइल है, वह दोधारी तलवार की तरह है। इसमें क्या होता है कि बच्चों को इस पर अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं है। वह तो बस इस दुनिया में जीना चाहते हैं और सही-गलत जो जानकारी मिलती है, उसे ही सच मान लेते हैं, उसे ही एक दुनिया मान लेते हैं। अगर हम सामान्य छात्र की बात करें, तो हां सोशल मीडिया बाधा तो बन रहा है।’ इस बाधा को कैसे दूर किया जा सकता है? जवाब में आनंद कुमार कहते हैं, ‘जरूरत है कि स्कूल इसे गंभीरता से लें और इसके बारे में स्टूडेंट्स को जानकारी दें। जिस तरह हम स्कूल में लिटरेचर पढ़ाते हैं, तो सही गलत के बारे में जानकारी विकसित होती है और हम उसकी अहमियत समझते हैं, उसी तरह हमें सोशल मीडिया को भी स्कूल की पढ़ाई का हिस्सा बनाना चाहिए। सोशल मीडिया को पूरी तरह बंद कर देना सही ऑप्शन नहीं है, क्योंकि इससे बच्चे के देश-दुनिया को देखने-समझने का नजरिया तो व्यापक हो ही रहा है।’

 

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