January 19, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

आजादी के बाद हमारे राजनेताओं द्वारा भारत को जिस तरह से लूटा जा रहा है उसे देख कर उपर महमूद ग़ज़नी, नादिर शाह, अहमद अब्दाली आदि की भी रुह आपस में बात कर रही होगी कि हम तो फालतू में लुटेरा के नाम से बदनाम हैं, यहां के राजनेता तो हमारे भी बाप हैं. क्या कहा जाये, भगवान ने भारत की किस्मत में ही लुटना लिख दिया है। पहले हमे विदेशी हमलावार लूटते थे, अब अपने चुने हुए प्रतिनिधि लूट रहे हैं।

: भारत यानि बार-बार लुटा देश, अब बार-बार लूटा जा रहा देश.. : क्या लुटना भारत की नियति है? : प्राचीन और मध्य कालीन युग मे भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था क्योंकि उस समय भारत में अकूत धन-संपत्ति थी जिस कारण विदेशी मुल्क इस पर नज़रें गड़ाये रखते थे. अगर आप इतिहास देखें तो पता चलेगा कि भारत को विदेशी और अपनों ने इतना लूटा-खसोटा है कि ऐसा लगता है कि भारत की क़िस्मत में ही भगवान ने लूट-खसोट लिख दिया है कि जो भी चाहे लूटे और चला जाये.

अगर हम इतिहास देखें तो भारत पर शुरू से ही आक्रमण किया जाता रहा है और विदेशी धन-संपत्ति लूट कर अपने देश ले जाते हैं. इसके स्थायी शासन के पूर्व एवं मध्य भाग में भारत पर कई अस्थायी एवं तूफानी आक्रमण हुए। सिकन्दर महान, पल्लवों, शकों और हूणों की घुसपैठ अल्पकालीन सिद्ध हुई मगर इन लोगों ने भी भारत को बुरी तरह लूटा। महमूद ग़ज़नवी (1001-1020) ने भारत पर 17 बार हमला किया और धन दौलत लूट कर ग़ज़नी ले गया. बताया जाता है कि सोमनाथ मंदिर से उसे इतना ख़ज़ाना मिला था जिसे 300 से अधिक हाथियों पर भर कर ले गया था.

नादिर शाह जिसके नाम दिल्ली का कत्लेआम दर्ज है, भारतीय सूर्य मणि (कोहिनूर) और मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताउस) भी लूटकर ले गया। उसे इतिहास में सबसे घृणित लुटेरों में शुमार किया गया है। फारस (अभी ईरान) से चलकर यह लुटेरा 1739 में भारत आया और 13 फरवरी को करनाल में मुगलों के साथ लड़ाई लड़ी। कमजोर मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला हार गया और उसे बंदी बनाकर नादिरशाह दिल्ली पहुंचा। 22 मार्च 1739 का वह दिन दुनिया के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है, जब नादिर शाह ने अपने फारसी सैनिकों को दिल्ली में कत्लेआम का हुक्म दिया और इतिहास गवाह है कि अकेले उस एक दिन में दिल्ली में 20-30 हजार लोगों का कत्ल हुआ।

इसके बाद मुगल खजाना रंगीला ने नादिरशाह के पैरों में रख दिया। कहते हैं कि कोहिनूर को रंगीला ने अपनी पगड़ी में छिपा रखा था। उसे भी नादिरशाह ने नहीं बख्शा और नादिरशाहर दुनिया का वह सबसे नायाब हीरा कोहिनूर और तख्तेताऊस लूटकर अपने साथ फारस ले गया। शाह ने 30 करोड़ की लूट की जिसे 28000 हाथी, ऊँट, बैल गाड़ियों-छकड़ों आदि पर लाद अफगानिस्तान ले गया. 200 ऊंटों पर तो दिल्ली दरबार से निकाह कर लाइ गइ बेगमात का ही समान था. नादिर शाह के बाद अहमद शाह अब्दाली ने भी दिल्ली पर हमला किया और खूब लुट-खसूट मचाई और दिल्ली को पूरी तरह बर्बाद कर दिया.

भारत में मुग़ल आये मगर वे लूट कर नहीं ले गये। उन्होंने यहीं हुकूमत किया। मुग़ल के बाद हमारे मुल्क पर अंग्रेज़ों ने हुकूमत की और भारत को जी भर कर लूटा. इतिहासकारों इनकी लूट को DRAIN OF WEALTH का नाम दे दिया। भारत के नवाबों को आपस में लड़ा कर लूटा। यहां के हीरे- जवाहरात सभी लूट कर इंग्लैंड ले गये, मगर इन लोगों ने अगर लूटा भी तो यह मानना ही पड़ेगा के उन्होंने भारत को दिया भी बहुत कुछ जैसे, रेल, बिजली, रोड, टेलीग्राम और बहुत सी सुविधाएं.

1947 के बाद ये लगने लगा कि अब हमारे मुल्क में प्रजातंत्र आ गया। अब हमारे भारत का विकास होगा और अपने मुल्क में लूट खसोट रुक जायेगी और हम फिर से सोने की चिड़िया कहलायेंगे. लेकिन यह सिर्फ एक ख्वाब ही रह गया। आजादी के फौरन बाद हमारे राजनेता और  उद्योग पतियों ने  भारत को लूटने चालू किया।

जिस देश के लोग अपने देश को भारत माता कहते हैं, पत्थर और पेड़-पौधों ; की पूजा करते हैं उस देश में किसी का रक्त बहे अब ये ठीक नहीं।

बेबस हूँ बिखरी हूँ उलझी हूँ सत्ता के जालो में,

बेबस हूँ बिखरी हूँ उलझी हूँ सत्ता के जालो में,
एक दिवस को छोड़ बरस भर बंद रही हूँ तालों में,
बस केवल पंद्रह अगस्त को मुस्काने की आदी हूँ,
लालकिले से चीख रही मैं भारत की आज़ादी हूँ,
जन्म हुआ सन सैतालिस में,बचपन मेरा बाँट दिया,
मेरे ही अपनों ने मेरा दायाँ बाजू काट दिया,
जब मेरे पोषण के दिन थे तब मुझको कंगाल किया
मस्तक पर तलवार चला दी,और अलग बंगाल किया
मुझको जीवनदान दिया था लाल बहादुर नाहर ने,
वर्ना मुझको मार दिया था जिन्ना और जवाहर ने,
मैंने अपना यौवन काटा था काँटों की सेजों पर,
और बहुत नीलाम हुयी हूँ ताशकंद की मेजों पर,
नरम सुपाड़ी बनी रही मैं,कटती रही सरौतों से,
मेरी अस्मत बहुत लुटी है उन शिमला समझौतों से,
मुझको सौ सौ बार डसा है,कायर दहशतगर्दी ने,
सदा झुकायीं मेरी नज़रे,दिल्ली की नामर्दी ने,
मेरा नाता टूट चूका है,पायल कंगन रोली से,
छलनी पड़ा हुआ है सीना नक्सलियों की गोली से,
तीन रंग की मेरी चूनर रोज़ जलायी जाती है,
मुझको नंगा करके मुझमे आग लगाई जाती है
मेरी चमड़ी तक बेची है मेरे राजदुलारों ने,
मुझको ही अँधा कर डाला मेरे श्रवण कुमारों ने
उजड़ चुकी हूँ बिना रंग के फगवा जैसी दिखती हूँ,
भारत तो ज़िंदा है पर मैं विधवा जैसी दिखती हूँ,
मेरे सारे ज़ख्मों पर ये नमक लगाने आये हैं,
लालकिले पर एक दिवस का जश्न मनाने आये हैं
बूढ़े बालों को ये काली चोटी देने आये हैं,
एक साल के बाद मुझे ये रोटी देने आये हैं,
जो मुझसे हो लूट चुके वो पाई पाई कब दोगे,
मैं कब से बीमार पड़ी हूँ मुझे दवाई कब दोगे,
सत्य न्याय ईमान धरम का पहले उचित प्रबंध करो,
तब तक ऐसे लालकिले का नाटक बिलकुल बंद करो!!!!

वन्देमातरम
जय हिन्द

 

1 thought on “क्या लुटना भारत की नियति है?

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