June 29, 2022

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गर्व से कहें हिंदी हैं हम, 94% की दर से बढ़ रहे इंटरनेट पर हिंदी यूजर्स

भारत में हैं 1365 भाषाएं हैं यहां एक कहावत कही जाती है; कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी… ये कहावत मातृभाषा की महत्ता समझाने के लिए पर्याप्त है।

 

 

हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा है। यह भाषा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। इसे भारत में राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। हिंदी भाषी लोगों की सबसे बड़ी संख्या भारत में है। 43.63 फीसद के साथ 53.0 करोड़ भारतीय हिंदी बोलते हैं। दुनिया की भाषाओं का इतिहास रखने वाली संस्था एथ्नोलॉग के मुताबिक हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है।

 

 

दुनिया में मातृभाषा:-
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या लगभग 6900 है। इनमें से 90 फीसद भाषाएं बोलने वालों की संख्या एक लाख से कम है। लगभग 150 से 200 भाषाएं ऐसी हैं, जिन्हें दस लाख से अधिक लोग बोलते हैं। दुनिया की कुल आबादी में तकरीबन 60 फीसद लोग 30 प्रमुख भाषाएं बोलते हैं, जिनमें से दस सर्वाधिक बोले जानी वाली भाषाओं में जापानी, अंग्रेजी, रूसी, बांग्ला, पुर्तगाली, अरबी, पंजाबी, मंदारिन, हिंदी और स्पैनिश है.

 

भाषा के लिए हो गए शहीद:-
ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भाषायी नीति का कड़ा विरोध जताते हुए अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी लेकिन लगातार विरोध के बाद सरकार को बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा देना पड़ा। भाषायी आंदोलन में शहीद हुए युवाओं की स्मृति में यूनेस्को ने पहली बार 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

 

कब हुई मनाने की शुरुआत:-
14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय के बाद हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राजभाषा बनाने को कहा था। गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था। बाद में 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने निर्णय लिया था कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी दिन भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में दर्शाया गया है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। चूंकि यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था। इस कारण इस दिन को हिंदी दिवस के लिए काफी को श्रेष्ठ माना गया था। और वर्ष 1953 से पूरे भारत में इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

 

कई राज्यों की मुख्य भाषा:-
यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजधानी दिल्ली जैसे राज्यों की मुख्य भाषा है। यह देश के पूर्वी भाग झारखंड और बिहार, मध्य भारत में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश और भारत के पश्चिमी भाग राजस्थान में भी बोली जाती है।

 

 

जनमानस की भाषा:-
वैसे तो भारत में विभिन्न प्रकार की भाषाएं बोली जाती हैं। यहां हर राज्य की अपनी अलग सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक पहचान है। इसके बावजूद हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। यही वजह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। उन्होंने 1918 में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने की बात कही थी।

 

 

इंटरनेट में बढ़ी धाक:-

इंटरनेट के प्रसार से किसी को अगर सबसे ज्यादा फायदा हुआ है तो वह हिंदी है। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है। 2021 में अंग्रेजी की तुलना में हिंदी में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या अधिक हो जाएगी। अनुमान के मुताबिक 20.1 करोड़ लोग हिंदी उपयोग करने लगेंगे। गूगल के अनुसार हिंदी में कंटेंट पढ़ने वाले हर साल 94 फीसद बढ़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी में यह दर सालाना 17 फीसद है।

 

 

तेजी से बढ़ता दायरा:-
इसे हिंदी की ही ताकत कहेंगे कि अब लगभग सभी विदेशी कंपनियां हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं। यहां तक कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में पहले जहां अंग्रेजी को बढ़ावा दिया जाता था वहीं गूगल अब हिंदी को भी प्राथमिकता दे रहा है। हाल ही में ई-कॉमर्स साइट अमेजन इंडिया ने अपना हिंदी एप लांच किया है। ओएलएक्स, क्विकर जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही हिंदी में उपलब्ध है। स्नैपडील जैसी ऑनलाइन शॉपिंग साइट भी हिंदी में है।

 

वैज्ञानिक भाषा है हिंदी:-

मैं दुनिया की सभी भाषाओं का सम्मान करता हूं, पर मेरे देश में हिंदी का सम्मान न हो, यह मैं सह नहीं सकता। आचार्य विनोबा भावे

 

मैं उन लोगों में से हूं, जिनका विचार है और जो चाहते हैं कि हिंदी ही राष्ट्रभाषा हो सकती है।
बाल गंगाधर तिलक

 

हिंदी सदैव ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया।

डॉ राजेंद्र प्रसाद

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