September 27, 2022

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गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: डॉ कफील को नहीं मिली क्लीन चिट, जांच जारी

गोरखपुर ऑक्सीजन कांड में निलंबित डॉक्टर कफील खान को फिलहाल क्लीन चिट नहीं मिली है. सरकार ने पत्र जारी कर इसकी सूचना दी है. उन पर लगे 4 आरोपों में से 2 सही पाए गए हैं. उन पर फैसला लिए जाने की कार्यवाही अभी प्रक्रिया में है. साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही भी चल रही है.

 

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को क्लीन चिट मिलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने कहा है कि डॉ. कफील ने रिपोर्ट का गलत निष्कर्ष निकाला है।

 

 

वहीं, कफील खान ने शनिवार को मांग की कि उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाना चाहिए। बता दें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को चार मामलों में से सिर्फ एक में ही क्लीन चिट मिली है। आरोप है कि घटना के वक्त 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ. कफील ही थे, जबकि जांच में यह आरोप निराधार पाया गया है।

 

 

शुक्रवार को डॉ. कफील खान को पूरे मामले में क्लीन चिट मिलने की खबरें आती रहीं, जबकि शासन के अनुसार उनके खिलाफ अभी विभागीय जांच चल रही है और अंतिम कार्रवाई बाकी है। वहीं, शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने एक बयान में कहा है कि यह कहना सही नहीं कि डॉ. कफील को विभागीय जांच में क्लीन चिट मिल गई है। उन्होंने रिपोर्ट का गलत निष्कर्ष निकाला है।

 
डॉ. कफील खान यह बताने में पूरी तरह असमर्थ रहे कि 23 अप्रैल 2013 के नियुक्ति आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे फिर कैसे मेडस्प्रिंग हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर गोरखपुर में साल 2014 में उनका नाम बतौर डॉक्टर के रूप में अंकित था.

 
डॉ. कफील पर निजी नर्सिंग होम का संचालन करने और प्राइवेट प्रैक्टिस में संलिप्त होने के आरोप थे जो जांच में सही पाए गए. वहीं निलंबन के बावजूद डॉ कफील 22 सितंबर 2018 को जबरन मरीजों का इलाज करने के लिए जिला अस्पताल बहराइच में घुस गए थे. साथ ही उनके द्वारा सरकार विरोधी राजनीतिक बयानबाजी भी की गई.

 

वहीं दो आरोप जो गलत पाए गए, उनमें से एक ऑक्सीजन की कमी के बारे में सूचित नहीं करने का था. उनके खिलाफ घटना के समय मौजूद होने के बावजूद उच्च अधिकारियों को ऑक्सीजन गैस की कमी होने के बारे में सूचित न करने का आरोप था. यह आरोप सही नहीं पाया गया. इसके अलावा उन पर बाल रोग जैसे संवेदनशील विभाग में दी जाने वाली सुविधाएं, स्टॉफ का प्रबंधन न किए जाने का आरोप था, जो जांच में सिद्ध नहीं पाया गया.

 
बता दें उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी के कारण 60 बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इस मामले में डॉक्टर कफील को सस्पेंड कर दिया गया था.

 

 

मुझे सम्मान सहित बहाल करना चाहिए : डॉ. कफील

 

वहीं, कफील खान ने शनिवार को मांग की कि उन्हें सम्मान के साथ बहाल किया जाना चाहिए। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 2017 में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई बच्चों की जान चली गई थी। खान को इसी मामले में भ्रष्टाचार और मेडिकल लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।

 

 

कफील ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को मृतक बच्चों के परिजनों से माफी मांगनी चाहिए और उन्हें मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विभागीय जांच में पता चला है कि उन्होंने कोई लापरवाही नहीं की न भ्रष्टाचार में शामिल थे।

 

 

उन्होंने कहा, ‘हत्यारा कफील’ और ‘कुख्यात डॉक्टर कफील’ का दाग उनके सिर से हट गया है। कफील ने मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई से या उत्तर प्रदेश के बाहर कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

 

 

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