June 29, 2022

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गोरखपुर के हिमांशु गौरव सिंह को जेईई एडवांस में देश भर में दूसरा स्थान,

हिमांशु गौरव सिंह ने जेईई एडवांस में देश भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। खास बात यह है कि इस दौर में भी वह मल्टीमीडिया से दूर हैं। स्मार्ट जब भी चलाया मां साथ होती थी। रिश्तेदार या परिवार के लोग जानते थे कि शाम को जब वह छह बजे टहलने जाएंगे तभी फोन से बात करनी है। उनकी सफलता पर पूरा परिवार खुश है और दिल्ली में उनके पास पहुंच कर परिवार के लोगों ने सफलता का जश्न मनाया।
हिमांशु को तीनों पेपरों में मिलाकर कुल 340 अंक मिले हैं। प्रथम स्थान पर रहे गुप्ता कार्तिकेय चंद्रेश को कुल 346 अंक मिले हैं। हिमांशु इलाहाबाद के मूल निवासी हैं मगर गोरखपुर में रहकर ही उन्होंने इंटर पढ़ाई इसी साल पूरी की है। इसी के साथ वह एक कोचिंग से भी जुड़े थे।
हिमांशु के पिता लवकुश सिंह मौजूदा समय कौशांबी के गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलिटेक्निक में विभागाध्यक्ष हैं। पहले वह गोरखपुर ही तैनात थे। दो साल पहले उन्होंने हिमांशु का प्रवेश एकेडमिक हाइट्स स्कूल में 11 वीं में कराया। इसी के साथ हिमांशु ने जेईई की तैयारियां शुरू कर दीं। पिता जी ने बेटे की पढ़ाई में बाधा न हो, इसके लिए विष्णु मंदिर के पास किराए के मकान में बाकायदा एक लाइब्रेरी स्थापित कर दी थी। हिमांशु ने इसका फायदा उठाया और इंटर परीक्षा पास करने के साथ ही जेईई मेंस में अच्छी रैंक ले आए। इसके बाद यहीं रहकर उन्होंने एडवांस की तैयारी की। माता पिता व शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने इसमें सफलता हासिल कर ली और आल इंडिया रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहे। हिमांशु ने बताया कि बोर्ड की परीक्षा के बाद दिल्ली चले गए थे। वहां रहकर भी उन्होंने जेईई की बची तैयारियां की।

 

बचपन से ही घर में शिक्षा का विशेष माहौल
लवकुश सिंह ने बताया कि हिमांशु व छोटे बेटे अंशुमान के लिए बचपन से ही घर में शिक्षा का बेहतर माहौल देने की कोशिश की। घर में आज तक टीवी नहीं है। रिश्तेदारों को बता दिया था कि बच्चों से किस समय बात कर सकते हैं। स्मार्ट फोन जरूरी था, सो बच्चे को वह दिला दिया था मगर मां के सामने ही उसका इस्तेमाल करने की आदत डाल दी थी। हिमांशु की मां रूपा सिंह हाउस वाइफ हैं और बेटे की सफलता में उनका भी बड़ा योगदान है। बच्चों में सफलता के लिए यह भावना भरी थी कि स्टडी, स्टडी एंड स्टडी। यही मंत्र बच्चे की सफलता में काम आया है। अंशुमान अभी दसवीं में हैं और वह मेडिकल की तैयारी करना चाहते हैं।
छह से आठ घंटे नियमित की पढ़ाई.

हिमांशु गौरव ने  बताया कि जेईई की तैयारी के लिए छह से आठ घंटे नियमित पढ़ाई की जरूरत होती है। यह समय स्कूल की पढ़ाई के बाद निकालना होता है। खाली समय में वह बैउमिंटन खेलना पसंद करते हैं। टीवी नहीं देखते और इंटरनेट का जब भी इस्तेमाल करते हैं परिवार में मां साथ होती हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता व छोटे भाई के अलावा गुरुजनों को दिया है। हिमांशु ने बताया कि फिलहाल वह आईआईटी मुंबई से बीटेक इन कंप्यूटर साइंस करेंगे। उसके बाद सोचेंगे क्या भविष्य में क्या बनना है।

 

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