September 24, 2022

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गौतम अडानी की बड़ी डील, 495 करोड़ रुपये में NDTV पर लगाया दांव, खरीदेंगे 29% स्टेक ,रवीश कुमार का NDTV से इस्तीफा, ZeeNews के DNA में दिखेंगे…

नई दिल्ली 24 अगस्त |गौतम अडानी समूह की कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क लिमिटेड ने मीडिया हाउस NDTV में हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। अडानी समूह NDTV यानी नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड में 29.18% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। वहीं, खुली पेशकश के जरिए एनडीटीवी में 26% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी।

इस तरह अडानी समूह की कुल हिस्सेदारी 55 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी और वह मीडिया कंपनी में मेजर स्टेकहोल्डर कहलाएगी। यह डील करीब 495 करोड़ रुपये में होने की उम्मीद है। इस बीच, NDTV के शेयर मंगलवार को 5 पर्सेंट की तेजी के साथ 376.55 रुपये पर बंद हुए हैं।

 

अडाणी ग्रुप ने एनडीटीवी को कैसे खरीदा?
अडाणी एंटरप्राइजेज लि. की सब्सिडियरी AMG मीडिया नेटवर्क्‍स ने मंगलवार को विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) को खरीद लिया। VCPL 2009 और 2010 में NDTV की प्रमोटर कंपनी RRPR होल्डिंग प्राइवेट लि. को 403.85 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। RRPR होल्डिंग का मालिकाना हक रॉय दंपती के पास था। इस ब्‍याज-मुक्‍त कर्ज के बदले RRPR ने VCPL को वॉरंट जारी किए। इन वॉरंट्स के जरिए VCPL, RRPR में 99.9 प्रतिशत हिस्‍सेदारी पा सकती थी।

 

NDTV ने मंगलवार को कहा कि कंपनी या उसके फाउंडर-प्रमोटर्स से बात किए बिना VCPL ने नोटिस भेज दिया। जिसमें कहा कि VCPL ने RRPR में 99.50% हिस्‍सेदारी का अधिग्रहण करने के अधिकार का इस्‍तेमाल किया है। RRPR की NDTV में 29.18% हिस्‍सेदारी है। दिलचस्‍प बात यह है VCPL ने RRPR को कर्ज देने के लिए पैसा मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड (RIL) की सब्सिडियरी रिलायंस स्‍ट्रैटीजिक वेंचर से लिया था।

 

एनडीटीवी के संस्थापक और कंपनी यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि एनडीटीवी के संस्थापकों से किसी इनपुट, बातचीत या सहमति के VCPL ने इन अधिकारों का इस्‍तेमाल किया।
NDTV

 

NDTV में 26% हिस्‍सेदारी और खरीदेगा अडाणी ग्रुप
VCPL का 11.75 करोड़ रुपये में अधिग्रहण करने के बाद अडाणी ग्रुप ने NDTV में 26 प्रतिशत हिस्‍सेदारी और खरीदने का ऐलान किया। इसके लिए एक ओपन ऑफर लॉन्‍च किया जाएगा। अडाणी ग्रुप 294 रुपये प्रति शेयर ऑफर कर रहा है। मंगलवार को बीएसई में NDTV का स्‍टॉक 366.20 रुपये पर बंद हुआ जो पिछले दिन के मुकाबले 2.6 प्रतिशत ज्‍यादा है।

 

रवीश कुमार का NDTV से इस्तीफा

 

रवीश कुमार ने दुख की इस घड़ी में NDTV से इस्तीफा दे दिया। यह खबर NDTV के भीतर रहने वाले मेरे सोर्स ने ही बताया। मैंने इतने साल मीडिया में रह कर कई सोर्स कमाए हैं। NDTV का यह सोर्स मुझे वहाँ के भीतर तक की खबर देता है।

वामपंथी लोगों को दिल से बुरा लगा है… लेकिन इसे सामान्य खबर मान दिल बहला रहे हैं, आँसू रोके रखे हैं… प्लाकार्ड नहीं निकाले हैं। NDTV-माइनस-रवीश वाली खबर पर कई लोग “कोई और आएगा, झंडा बुलंद करेगा” जैसे क्रांति गीत गा रहे। रवीश कुमार NDTV से इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन आपातकाल-गीत नहीं बज रहा… यह मीडिया और वामपंथियों के लिए शर्म की बात है।

रवीश कुमार हिंदी मीडिया के एकमात्र पत्रकार हैं, इसमें कोई शक नहीं। शक इसमें भी नहीं कि NDTV ही एक मात्र ऐसी जगह थी, जिसके पत्रकारों और उनके राडिया टेप के कारण चौथा खंभा टिका हुआ था लेकिन भूखा आदमी आखिर करे क्या? कड़ुआ तेल थोड़े ना पी के रह लेगा!

अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं

2015 में रवीश कुमार ने यह गाना गाया था। रवीश ने तब प्यार से इस्तीफा को इस्तीफ़ू बुलाते हुए गाना गाया था… “अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं।” 2015 की चीज को अभी क्यों याद करवा रहा हूँ? कारण है। दुख, तकलीफ, दर्द… वो सब जो रवीश ने NDTV में रहते हुए झेला। कैसे?

रवीश कुमार ने कुछ यूँ लिखा था इस्तीफू

 

 

“तुम्हें कभी न लिख पाने वाला एक पत्रकार” – इस कारण की बात कर रहा था मैं। इस्तीफ़ू पर पत्र लिख कर रवीश ने निशाना किसी और पर साधा लेकिन हस्ताक्षर करते वक्त ‘मन की बात’ लिख ही डाली।

 

खबर Zee News से भी

यह सोर्स वाली खबर है। लेकिन इसमें मुझे भीतर तक की खबर नहीं है। बस इतना जानता हूँ कि सोर्स है बहुत दमदार। रवीश कुमार और सुधीर चौधरी दोनों को दाएँ-बाएँ लेकर चलता है।

NDTV और अडानी के बीच डील की खबर रवीश कुमार को लग गई थी। बड़े पत्रकार हैं, लगनी भी चाहिए। लेकिन पत्रकारिता पर दाग न लगे, इसलिए रवीश ने इस्तीफ़ू दे दिया। क्यों?

क्योंकि रामदेव के विज्ञापन को NDTV पर रवीश झेल जाते थे, अडानी को कैसे झेलते… इसका रास्ता नहीं दिखा। यह भी गवारा नहीं कि हर दिन स्क्रीन काली ही कर दी जाए। क्योंकि TV नहीं देखने के लिए रवीश हमेशा बोलते रहे थे, रहे हैं… NDTV नहीं देखने पर आज तक नहीं बोले हैं… हेहेहे!

इसलिए इस्तीफ़ू दे दिया। लेकिन Zee News वाली खबर इस्तीफ़ू के पहले की है। दमदार सोर्स ने बताया कि इस्तीफ़ू से पहले वो Zee News के ऑफिस जाकर प्राइम टाइम वाला DNA बुक कर लिए थे। बस एक शर्त माननी पड़ी। प्राइवेट नौकरी बिना शर्तों के होती भी कहाँ है!

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