June 27, 2022

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जानिए सिरमौर का किसान किस तरह कमा रहा कीवी फल का उत्‍पादन कर साल के 15 लाख रुपये

हिमाचल/सिरमौर 15 अप्रैल |मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और सरकार की योजनाओं की जानकारी के साथ आर्थिक सहायता मिले, तो लक्ष्य प्राप्त करना असंभव नहीं होता। ऐसा कहना है जिला सिरमौर की उप तहसील नारग के अंतर्गत गांव थलेडी की बेड के नरेंद्र सिंह पंवार का। जिन्होंने वर्ष 1993 में डाक्‍टर वाइएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में पहली बार कीवी के पौधे देखे। उन्होंने बताया कि इससे उनके मन में भी कीवी के पौधे रोपित करने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने इसकी जानकारी तथा बारीकियां विश्वविद्यालय में कार्यरत डाक्‍टर धर्मपाल शर्मा से हासिल की और 170 कीवी के पौधे अपनी निजी भूमि में प्रदेश के प्रथम कीवी बगीचे के रूप में रोपित किए।

पंवर बताते हैं कि कीवी की पैदावार 4000 से 6000 फीट की ऊंचाई वाले स्थानों पर होती है। कीवी की एलिसन, ब्रूनो, मोंटी, एब्बोट तथा हेवर्ड मुख्य प्रजातियां हैं। भारत में  हेवर्ड प्रजाति की कीवी का उत्पादन मुख्य रूप से होता है। जिला सिरमौर में पिछले कुछ वर्षों से कीवी का उत्पादन भारी मात्रा में हो रहा है। जिस कारण सिरमौर की कीवी न्यूजीलैंड की कीवी को पछाड़ रही है। नरेेंद्र पंवार ने बताया कि वर्ष 2019 में उन्होंने उद्यान विभाग से बागवानी विकास परियोजना के तहत 4 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करवाया। जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में 2 लाख की सब्सिडी मिली। उन्होंने 2019 में 170 और कीवी के पौधे रोपित किए। आज उनकी भूमि में 340 पौधे फल दे रहे हैं।

 

वर्ष 1998 से उनके बगीचे से प्रतिवर्ष लगभग 40 क्विंटल कीवी का उत्पादन हुआ। उस दौर में वह कीवी की मार्केटिंग के लिए चंडीगढ़ जाते थे। मगर गत वर्ष उन्होंने 130 क्विंटल कीवी का उत्पादन किया। जिसे उन्होंने दिल्ली मंडी में बेचा जो 140 से 170 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिका। पंवार बताते हैं कि बीते वर्ष उन्होंने 15 लाख रुपये की आय कीवी बेचकर अर्जित की।

 

नरेंद्र पंवार ने बताया कि इस वर्ष कीवी के पौधों में भारी फल लगा है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी उन्हें अच्छी आय प्राप्त होगी। उनके बगीचे में चार से पांच आदमी लगातार काम करते हैं तथा कीवी के पौधों को रखरखाव व देखभाल तथा सिंचाई की अत्यंत आवश्यकता होती है।

कीवी उत्पादन आर्थिकी को सुदृढ़ करने का बेहतर विकल्प है। पंवार का कहना है कि परंपरागत खेती के साथ नकदी फसलों का उत्पादन करना समय की आवश्यकता है। वह बताते हैं कि कीवी का फल औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जो कि शरीर में खून की कमी को पूरा करने, प्लेटलेट्स की मात्रा को बढ़ाने, डेंगू बीमारी, हृदय रोग, मधुमेह, कोरोना तथा पीलिया रोग में इसका इस्तेमाल करना लाभदायक है। उन्होंने बताया कि कीवी का उत्पादन मुख्यतः न्यूजीलैंड, चीन, ईरान, चिल्ली, जापान तथा भारत में होता है।

कीवी की खेती में सिरमौर जिला सबसे आगे है

नरेंद्र सिंह द्वारा कीवी की खेती किए जाने के बाद हिमाचल में कई किसानों ने इस फल के जरिए मुनाफा कमाने का फैसला किया। हालांकि भारत में कीवी की हेवर्ड प्रजाति ही सबसे ज्यादा और अच्छे तरीके से उगाई जा सकती है, जिसकी पैदावार 4, 000 से 6, 000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती है।

यही वजह है कि हिमाचल के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में किसान हेवर्ड प्रजाति की कीवी उगा रहे हैं, जिसमें सिरमौर जिला सबसे आगे है। हालात यह हैं कि इस जिले के किसान इतनी भारी मात्रा कीवी का उत्पादन कर रहे हैं कि न्यूजीलैंड अपने देश के फल की खेती में पिछड़ता जा रहा है।

क्षेत्र के किसान बागवान लगा रहे कीवी के बगीचे

नरेंद्र पंवार का कीवी उत्पादन में अनुसरण करते हुए क्षेत्र के बहुत से किसान- बागवान भी अपने खेतों में नकदी फल सब्जियों के साथ-साथ कीवी उत्पादन कर अपनी आर्थिकी को सदृढ़ कर रहे हैं। आज देश के दूसरे राज्य में से कई किसान और बागवान उनका कीवी का बगीचा देखने लगातार आते रहते हैं। इसके अतिरिक्त डाक्‍टर वाइएस परमार यूनिवर्सिटी नौनी के प्रशिक्षु भी लगातार बगीचे में रिसर्च के लिए आते हैं।

परिवार के सदस्य करते हैं बगीचे में काम

कीवी के बगीचे में परिवार के सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं। मुख्य रूप से भतीजा विक्रांत पंवार बगीचे की देखरेख करता है।

पोलीनेशन का होता है मुख्य काम

कीवी के उत्पादन में मुख्य रूप से पीलीनेशन का सबसे अधिक काम रहता है, क्योंकि जब कीवी में फूल आता है, तो फूल को फीमेल और मेल में पोलीनेशन करवाना होता है। कीवी के बगीचे में फल तब लगता है, जब बगीचे में आधे पौधे फीमेल तथा आधे पौधे मेल के लगे हों। पालीनेनेशन के दौरान मेल पौधों को फीमेल पौधे से टच करवाया जाता है, उसके बाद फल तैयार होता है।

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