September 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

जिंदगी बस कट रही हैं, हम जिंदगी को जीते क्यों नहीं

जिंदगी बस कट रही हैं / बस हो रहा हैं टाइम पास, दोस्तों मुझे लगता हैं कि शायद ही कोई होगा जो इन शब्दों से अनजान होगा | अन्यथा तो हम सब इन शब्दों से काफी अच्छी तरह से परिचित हैं | सच में दोस्तों मुझे अफ़सोस होता हैं जब कोई इन शब्दों का इस्तेमाल करता हैं कि बस जिंदगी कट रही हैं क्या जिंदगी काटने के लिए हैं की बस कट जाये किसी तरह से |

भगवान ने प्रक्रति ने आप जो भी कह ले हम इंसानों को इस धरती पर सर्वश्रेष्ठ बनाया हैं क्या प्रक्रति ने जिंदगी को काटने के लिए ही बनाया हैं हम क्या नहीं कर सकते | हम जिंदगी को जीते क्यों नहीं एक जानवर भी अपने स्तर पर अपनी जिंदगी को बेहतर ही जीता हैं ये बात अलग हैं की उस बेचारे के पास हम इंसानों की तरह सोचने समझने की ताकत नहीं हैं |

अब आपके दिमाग में ये हरकत हो सकती हैं कि जिंदगी जीना और काटना बात तो एक ही हैं जिंदगी कट ही तो रही हैं और जी भी रहे हैं | उपरी तौर पर भले ही ये आपको एक मालूम पड़ रहे हो पर इन दोनों में बहुत अंतर हैं देखिये जिंदगी काटना मतलब आपको कैसी भी परिस्तिथि में डाल दिया जाये आपको जिंदगी बितानी ही पड़ेगी मतलब की काटनी ही पड़ेगी आपको चाहे बहुत पीड़ा ही क्यों न हो रही हो | जिस तरह आप किसी पंछी को पिंजरे में बंद कर देते हैं तो वह जिंदगी को जी नहीं रहा हैं काट रहा हैं बिता रहा हैं चाहे जैसी परिस्तिथि हो अन्यथा उसका काम तो आकाश में उड़ना हैं उसका यही स्वभाव हैं वो खुले आसमान में उड़ता रहेगा तभी वो जिंदगी को जियेगा भले ही उसे भूखा सोना पड़े मगर पिंजरे में बंद रहकर तो वो जिंदगी के हर पल को काटता ही हैं भले ही आप उसका समय-समय पर पेट भरते रहे | आपने कभी सोचा हैं की पिंजरा खोलते ही पंछी उड़ता क्यों हैं वो वही पर क्यों नहीं रुकता आप तो उसे भर पेट खाना दे रहे हैं बाहर तो पता नहीं उसे मिले या न मिले. इतना तो वो पंछी भी जानता हैं की मैं आजाद रहकर आसमान में उड़कर अपनी जिंदगी को खुशी से जिऊंगा |

हम ये क्यों भूल जाते हैं कि जिंदगी को खुशी से जिया जाये और हम तो सर्वश्रेष्ठ हैं | हम क्यों वो काम करते हैं जो हमें पसंद ही नहीं | आपने शायद देखा होगा ज्यादातर लोग खुद से अपना काम नहीं चुनते वो या तो वो करेंगे जो किसी ने उस पर थोप दिया हो की तुझे यही करना हैं यही बनना हैं आप समझ गये होंगे मैं किसकी बात कर रहा हूँ या वो अपने आस पास के दुसरे लोगो को देखकर करेंगे की वो इस काम को कर के खुश रहता हैं पैसा भी अच्छा कमाता हैं क्यों न मैं भी यही कर लेता हूँ | अरे भाई इसकी क्या गारंटी हैं की आप भी खुश रहेंगे | उधारण के लिए आप लाखों लोग ऐसे देख सकते हैं जो डॉक्टर बनके बहुत खुश हैं और लाखों ही ऐसे लोग भी देख सकते हैं जो डॉक्टर ही हैं पर खुश बिलकुल भी नहीं हैं उनके लिए समय काटना हैं बस, तो फर्क कहा हैं अगर किसी काम में खुशी होती तो सब लोगों को खुश ही रहना चाहिए पर ऐसा नहीं हैं न |

आपने अपने आस पास ऐसे लोग देंखे होंगे जो बहुत कमाते हैं फिर भी खुश नहीं हैं ऐसे लोग ही बोलते हैं बस जिंदगी कट रही हैं और कटेगी ही क्योंकि वो अपने काम को करके खुश ही नहीं हैं बस काम करने के दौरान भी उस समय को काटते हैं तो कैसे खुश रहेंगे | अब दूसरी तरफ ऐसे भी लोग देंखे होंगे जो कम कमाए या ज्यादा पर खुश रहते हैं अपनी जिंदगी ख़ुशी – ख़ुशी जीते हैं पर अफ़सोस ऐसे लोग बहुत कम हैं बहुत ही कम | अब शायद आप मुझ से बोल सकते हैं कि आपको पता नहीं हैं जब परिस्तिथि आती हैं न तो सब करना पड़ता हैं | मैं समझ सकता हूँ परिस्तिथि किसी के साथ भी आ सकती हैं | मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि आप अपने काम को छोड़ दे | मान लीजिये आप इंजिनियर बनना चाहते हैं और आपका परिवार इतना पैसा नहीं लगा सकता की आपको इंजिनियर बनाये तो आप अपने परिवार के खिलाफ बगावत पर उतर आये की मुझे तो यहीं करना हैं उनकी परिस्तिथि को भी समझिये, ऐसा नहीं करे |

मेरा यहाँ पर कहने का सिर्फ इतना ही उदेश्य हैं कि या तो आप वही करे जो आप करना चाहते हैं, बनना चाहते हैं तब आप ख़ुशी – खुशी जिंदगी जियेंगे तब आप अपने काम को एन्जॉय करेंगे या फिर परिस्तिथि ने जो आपको बना दिया हैं या जो काम सौंप दिया हैं, उसको स्वीकार कर कर लीजिये उस काम को एन्जॉय कीजिये उसमे अपनी ख़ुशी तलाश कर लीजिये, उसे बौझ मत समझिये तब आप खुशी – ख़ुशी जिंदगी जियेंगे | अब आप सही मायने में जिंदगी खुशी से जियेंगे, काटेंगे नहीं |

अब आप सबके सामने बोल सकते हैं कि मैं जिंदगी काटता/काटती नहीं मैं जिंदगी जीता/जीती हूँ और वो भी खुशी से | हम हर एक पल को एन्जॉय कर सकते हैं ये हमारे हाथ में ही हैं |

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