August 9, 2022

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टैक्‍स से बचने के लिए VIVO ने चीन भेजे अपने टर्नओवर के 62,476 करोड़ रुपए, 119 अकाउंट से 465 करोड़ जब्‍त

भारत में टैक्‍स के भुगतान करने से बचने के लिए वीवो कंपनी (VIVO) ने चीन को 62,476 करोड़ रुपए भेजा। ईडी ने अभी तक वीवो से जुड़ी 23 कंपनियों के 48 स्‍थानों पर छापेमारी की है।

 

न्यूज डेस्क 08 जुलाई |चीन की स्मार्टफोन कंपनी वीवो को लेकर एक के बाद एक नए खुलासे सामने आ रहे हैं. ईडी (Enforcement Directorate) ने आज जानकारी दी कि चीन की कंपनी की भारतीय इकाई ने टैक्स (Tax) की देनदारी से बचने के लिए अपने कुल टर्नओवर के आधे को भारत से बाहर भेजा है. ये रकम 62,476 करोड़ रुपये के बराबर है. इस रकम का अधिकांश हिस्सा वापस चीन भेजा गया है

प्रवर्तन निदेशलय (ED) की जांच में जानकारी सामने आई है कि चीनी मोबाइल निर्माता फर्म वीवो इंडिया ने टर्नओवर का आधा हिस्‍सा 8 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 62,476 करोड़ रुपए चीन के मूल वीवो कंपनी को भेजा है। भारत में टैक्‍स से भुगतान करने से बचने के लिए वीवो कंपनी (VIVO) ने ऐसा किया। ईडी ने अभी तक वीवो से जुड़ी 23 कंपनियों के 48 स्‍थानों पर छापेमारी की है।

मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कहा कि विभिन्न संस्थाओं की ओर से 119 बैंक खातों से ​​465 करोड़ की धनराशि को जब्‍त किया गया है, जिसमें 73 लाख रुपए नकद और 2 किलोग्राम सोने की छड़ें जब्त की गई हैं। ईडी के अनुसार, वीवो मोबाइल इंडिया और इससे जुड़ी 23 कंपनियां के 48 स्‍थानों पर 5 जुलाई के बाद से अबतक छापेमारी हो चुकी है।

 

ईडी ने कहा कि वीवो के एक पूर्व निदेशक बिन लू ने 2018 में कई कंपनियों को शामिल करने के बाद भारत छोड़ दिया था, जो अब वीवो इंडिया के दायरे में हैं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि “कुछ चीनी नागरिकों सहित वीवो इंडिया के कर्मचारियों ने खोज कार्यवाही में सहयोग नहीं किया और खोज टीमों द्वारा सबूत के तौर पर रखे गए डिजिटल उपकरणों को हटाने और छिपाने की कोशिश की।”

 

वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, ईडी को शक है कि वीवों ने कंपनी के नाम पर टैक्‍स न चुकाने के लिए जाली पहचान बनाया गया हो सकता है और गलत तरीके से पैसा कमाया गया, जिसके बाद भारतीय नियमों को दरकिनार करके चीन और अन्य व्यवसायों को भेजा गया था।

 

इसके अलावा प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने ईडी का हवाला देते हुए एक ट्वीट में कहा है कि वीवो द्वारा भेजी गई वास्तविक राशि लगभग 62,476 करोड़ रुपए है। ट्वीट में आगे कहा गया है कि भारत में करों से बचने के लिए राशि चीनी वीवो कंपनी को भेजे गए हैं।

 

चीनी नागरिकों ने छोड़ा देश
GPICPL को चीनी नागरिकों और चार्टर्ड एकाउंटेंट, नितिन गर्ग की मदद से शामिल किया गया था. चीनी नागरिक बिन लू ने 26 अप्रैल 2018 को भारत छोड़ दिया. जबकि झेंगशेन ओयू और झांग जी 2021 में भारत से बाहर चले गए.

ईडी ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से दायर शिकायत के आधार पर GPICPL, उसके निदेशकों, शेयरधारकों के खिलाफ दिसंबर 2021 में दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर फरवरी 2022 में मामला दर्ज किया था.

जाली पते का इस्तेमाल
FIR के अनुसार, GPICPL और उसके शेयरधारकों ने निगमन के समय जाली पहचान दस्तावेजों और जाली पतों का इस्तेमाल किया था.
ईडी ने एक बयान में कहा, आरोप सही पाए गए, क्योंकि जांच से पता चला कि GPICPL के निदेशकों द्वारा बताए गए पते उनके नहीं थे, लेकिन यह एक सरकारी भवन और एक वरिष्ठ नौकरशाह का घर था. ईडी ने आरोप लगाया है कि GPICPL के निदेशक बिन लू भी वीवो के पूर्व निदेशक थे.

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