October 3, 2022

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डिमांड ड्राफ्ट से संबंधित जानकारी (Define Demand Draft)

नौकरी के आवेदन, परीक्षा शुल्क, कई तरह की सर्विस, भर्तियाँ, अधिक कीमतों की खरीदारी आदि के लिए डिमांड ड्राफ्ट का प्रयोग चेक की तुलना में अधिक किया जाता है. कोई चेक बैंक अकाउंट में पैसे न रहने पर खारिज कर दिया जा सकता है, लेकिन डिमांड ड्राफ्ट ख़ारिज नहीं होते. इसके बारे में पूरी जानकारी यहाँ दर्शायी जा रही है.

डिमांड ड्राफ्ट क्या है उससे सम्बंधित जानकारी (What is Demand Draft )

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ये एक तरह का परक्राम्य प्रपत्र (Negotiable instrument) है, जिसमे पैसे लेकर कोई बैंक एक ड्राफ्ट तैयार कर देता है, जिसे ड्राफ्ट बनाने वाला भुगतान की जगह पर जमा कर देता है. इसे जमा करने के लिए लाभार्थी या संस्था द्वारा निर्धारित बैंक और उसके निर्धारित ब्रांच में ही जमा करना होता है. यदि डिमांड ड्राफ्ट लाभार्थी को दे दिया गया है तो लाभार्थी को निर्धारित बैंक के ब्रांच में जा कर पैसा उठाना पड़ता है. किसी डिमांड ड्राफ्ट की वैद्यता प्रायः तीन महीने की होती है.

डिमांड ड्राफ्ट कैसे बनवाये (How to make Demand Draft)

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने की आवश्यकता आये दिन लगी रहती है. कई औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थान इसी माध्यम से भुगतान करवाते हैं. हालाँकि डिमांड ड्राफ्ट किसी भी बैंक से बनवाया जा सकता है, लेकिन संसथान या लाभार्थी यदि किसी बैंक विशेष से बनवाने को कहता है तो इसका पालन करना अनिवार्य होता है. नीचे दिए गये निर्देशों का पालन करके डिमांड ड्राफ्ट बहुत आसानी से बनवाया जा सकता है.

निर्धारित बैंक में जाकर वहाँ के कर्मचारियों को कहने पर वे एक विशेष तरह का फॉर्म, जिसका प्रयोग सिर्फ डिमांड ड्राफ्ट बनाने में होता है, दे देते है. ये बैंक के ऑनलाइन वेबपोर्टल पर भी अक्सर मौजूद होता है.
इस फॉर्म में दिए गये पेमेंट विकल्प आप भुगतान कैश में करना चाहते हैं या चेक से, डिमांड ड्राफ्ट के लाभार्थी का नाम, अमाउंट, ड्राफ्ट जमा करने की जगह, चेक नम्बर, बैंक अकाउंट नंबर, हस्ताक्षर आदि होते है जिसे उन्हें देना होता है.
यदि ड्राफ्ट 5000 रूपए से अधिक का बन रहा हो तो इसके लिए PAN कार्ड का विवरण भी जमा करना होता है.
इसे बनाने के लिए कोई भी बैंक अपना कमीशन लेती है. ये एक तरह से इस सुविधा का लाभ उठाने का अतिरिक्त शुल्क है.
कैश के बदले डिमांड ड्राफ्ट लेने के लिए बैंक ग्राहक से उसका परिचय पत्र, आवास प्रमाण पत्र आदि मांग सकती है. यदि वोटर आईडी कार्ड साथ हो तो ये काम आसान हो जाता है.
डिमांड ड्राफ्ट से लाभ (Benefits of Demand Draft)

डिमांड ड्राफ्ट से पैसे भेजने के कई लाभ हैं. जैसे –

अक्सर डिमांड ड्राफ्ट का पेमेंट फ़ैल नहीं होता, लाभार्थी समय पर निर्दिष्ट बैंक में ड्राफ्ट जमा करा कर अपनी राशि प्राप्त कर सकता है.
बहुत अधिक बैंकिंग लिंक न होने पर भी उपभोक्ता और लाभार्थी दोनों इस सुविधा के तहत पैसे का लेनदेन बहुत आसानी से कर सकते हैं.
डिमांड ड्राफ्ट के इस्तेमाल के बहुत अधिक पैसों के साथ यात्रा करने से बचा जा सकता है. ये सुविधा एक अच्छी सुरक्षा प्रदान करती है.
डिमांड ड्राफ्ट का शुल्क (Demand Draft charges)

इस सुविधा को प्रदान करने के लिए बैंक कुछ अतिरिक्त शुल्क लेता है. भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस सुविधा के लिए सन 2007 में एक शुल्क तय किया, परन्तु इस समय अलग अलग बैंक इस सेवा के लिए स्वयं निर्धारित शुल्क ही लेते हैं.

उदाहरण स्वरुप –

भारतीय स्टेट बैंक 10,000 रूपए से 1,00,000 तक प्रति हज़ार रूपए के लिए 5 रूपए का शुल्क लेती है. अतः प्रति हज़ार रूपए डिमांड ड्राफ्ट का शुल्क हुआ = 0.005 रूपए. अब अपने डिमांड ड्राफ्ट के लिए लगने वाले शुल्क का अनुमान ग्राहक 10,000 से 1,00,000 से बीच के अमाउंट को 0.005 रूपए से गुणा करके लगा सकता है. यदि किसी ग्राहक को 15,000 रूपये का डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है तो उसे 15,000 * 0.005 = 75 रूपए का अतिरिक्त शुल्क जमा देना होगा.

इसी तरह अन्य सभी बैंकों का अपना अलग अलग शुल्क है, जिसका पता निर्धारित बैंक पर जाकर लगाया जा सकता है.

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डिमांड ड्राफ्ट रद्द कैसे करवाये (How to cancel Demand Draft)

एक बार डिमांड ड्राफ्ट बन जाने के बाद आपके अकाउंट से डिमांड ड्राफ्ट के अमाउंट और अतिरिक्त शुल्क का पैसा काट लिया जाता है. यदि किसी कारण वश ड्राफ्ट रद्द करवाना हो तो पुनः बैंक में जाना पड़ता है. इसके लिए कोई ऑनलाइन सुविधा नहीं है.

यदि आपका डिमांड ड्राफ्ट कैश से बना हो तो आपको डिमांड ड्राफ्ट और कैश की जमा पर्ची लेकर बैंक में जाना होता है. वहाँ 100 – 150 रूपए के अतिरिक्त शुल्क काट के आपके बाकी पैसे तुरंत भुगतान कर दिए जायेंगे.
यदि आपका डिमांड ड्राफ्ट आपके अकाउंट से बना हो तो 150 रूपए का अतिरिक्त शुल्क काट कर बाकी के पैसे आपके अकाउंट में जमा हो जायेंगे.
किसी कारणवश यदि ओरिजिनल डिमांड ड्राफ्ट खो गया है तो डिमांड ड्राफ्ट का रद्द या रिफंड होना थोडा मुश्किल हो जाता है. इस स्थिति में ग्राहक को एक बांड पेपर साइन करना होता है, इसके बाद कुछ समय यानि लगभग 10 दिन के बाद बैंक आपके डिमांड ड्राफ्ट के पैसे आपको लौटाते है. कई बैंक ऐसे भी हैं जो डिमांड ड्राफ्ट की वैध्यता ख़त्म हो जाने के बाद पैसे लौटते हैं.
डिमांड ड्राफ्ट की वैद्यता (Demand Draft validity)

भारत में डिमांड ड्राफ्ट की वैद्यता उसके बनने की तारिख से तीन महीने तक की होती है. तीन महीने के अन्दर इसका इस्तेमाल न होने पर डिमांड ड्राफ्ट अवैद्य हो जायेगा और पैसा ख़ुद ब ख़ुद रिफंड नहीं होगा. ऐसी स्थिति में ड्राफ्ट बनवाने वाले को निर्धारित बैंक के ब्रांच में जा कर अपने ड्राफ्ट को पुनः वैद्य कराने का आवेदन देना होता है. ये आवेदन लाभार्थी नहीं दे सकता. सभी ओरिजिनल रिकॉर्ड की जांच के बाद ड्राफ्ट को पुनः वैद्य किया जाता है. एक बार पुनः वैद्य ड्राफ्ट दूसरी बार पुनः वैद्य नहीं किया जा सकता है. अतः इस बार तीन महीने के अन्दर इस ड्राफ्ट का प्रयोग होना अनिवार्य है.

बैंकर चेक और डिमांड ड्राफ्ट में अंतर (Difference between Cheque and Demand Draft)

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डिमांड ड्राफ्ट और चेक में कुछ मूल अंतर हैं, जिसका ध्यान रखना अति आवश्यक है-

चेक में उसके बैंक के लिए आदेश होते हैं, जिसपर चेक के मालिक का हस्ताक्षर अति अनिवार्य होता है, वहीं डिमांड ड्राफ्ट सिर्फ और सिर्फ पैसा एक जगह से दुसरी जगह पहुँचाने के लिए होता है.
चेक का प्रयोग मालिक या तो अपने लिए या अपने लाभार्थी के लिए करता है. वहीँ डिमांड ड्राफ्ट किसी भी निश्चित व्यक्ति के लिए तैयार किया जा सकता है.
चेक यदपि किसी बैंक द्वारा ज़ारी होता है लेकिन उसका सञ्चालन उसका मालिक करता है, वहीँ डिमांड ड्राफ्ट बैंक के द्वारा संचालित होता है.
चेक के इस्तेमाल के लिए कुछ अतिरिक्त शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होती लेकिन डिमांड ड्राफ्ट ज़ारी करने के लिए अलग अलग बैंक अलग अलग शुल्क लेते हैं.
चेक अकाउंट में पैसा न रहने की स्थिति पर बैंक द्वारा ख़ारिज हो जाता है और लाभार्थी को पैसा नहीं मिल पाता, वहीँ दूसरी तरफ़ डिमांड ड्राफ्ट से सीधे बड़े आराम से लाभार्थी तक पैसा पहुँच जाता है.
चेक की सुविधा बैंक अकाउंट होल्डर को ही मिल पाती है, लेकिन डिमांड ड्राफ्ट की सुविधा ऐसे आदमी के लिए भी होती है, जिसका बैंक अकाउंट नहीं हो.

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