June 24, 2022

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सच के साथ

डॉ. रानी बंग: ऐसी स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिन्होंने महिलाओं के लिए हर चुनौती को पार किया!

एक शोध के अनुसार भारत के ग्रामीण इलाकों में लगभग 92 प्रतिशत महिलाएं स्त्री रोग से पीड़ित हैं. केवल 8 प्रतिशत महिलाएं ही इन बीमारियों का इलाज करा पाने में सक्षम हैं.

ये शोध महाराष्ट्र के एक दंपति, मिस्टर एंड मिसेज बंग ने किया था. यह दोनों एक नक्सलवादी क्षेत्र ‘गढ़चिरौली’ में स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं देने के लिए जाने जाते हैं.

नक्सलवादी इलाका होने के बावजूद भी इन्होंने यहाँ पर बिना किसी डर के काम किया.

यही कारण है कि आज इनकी बदौलत वहां की महिलाएं और आम लोग भी स्वस्थ हैं. रानी बंग अपने कामों द्वारा समाज में बहुत बड़ा बादलाव लाई हैं.

एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) एवं दी बेटर इंडिया (The Better India), यूएन विमेन (UN Women) के सहयोग से अपनी चेंजमेकर कैम्पेन में ऐसी ही ‘बदलाव के वाहकों’ को सामने ला रहा है, जिन्होंने अपने हौसले से समाज में एक बड़ा बदलाव लाया.

तो चलिए जानते हैं कि आखिर कैसे रानी बंग ने बदली लोगों की जिंदगी–

सामाजिक कार्य के लिए अमेरिका से लौटीं भारत

17 सितम्बर 1951 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में रानी बंग का जन्म हुआ. उनका परिवार भी चिकित्सीय सेवाओं और सार्वजनिक कार्यों के लिए जाना जाता था.

बचपन से ही रानी पढ़ाई में निपुण रहीं. शुरूआती शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया और नागपुर के मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया. यहीं उनकी मुलाकात अभय से हुई.

1972 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद रानी उसी कॉलेज से एम.डी. भी करने लगीं.

जहां एक तरफ अभय मेडिसिन में एमडी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर रानी ने आब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी को अपना करियर चुना.

1976 में रानी ने न सिर्फ एम.डी. की डिग्री हासिल की, बल्कि विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान भी अपने नाम किया.

इस दौरान उन्होंने कई पेशेवर डॉक्टरों के साथ काम किया.

इसी बीच उनकी नजदीकियां अभय के साथ बढीं. ये नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि मामला सीधा शादी पर जाकर रुका.

1977 में रानी ने अभय बंग से शादी की और मिसेज रानी बंग बन गईं. शादी के बाद दोनों आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए.

पढ़ाई पूरी करने के बाद रानी भारत लौट रही थीं कि तभी उनके दिमाग में एक ख्याल आया. उन्होंने सोचा कि क्यों न अपनी डॉक्टरी के जरिए वह भारत के ग्रामीण लोगों की मदद करें.

ऐसा इसलिए क्योंकि, भारत में कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं. उन्होंने ठान लिया कि भारत आते ही वह इस काम में जुट जाएंगी.

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चुनौतियाँ बहुत थीं मगर, रानी ने हार नहीं मानी!

भारत लौटने के बाद रानी को सामाजिक कार्यों को अंजाम देने के लिए एक निश्चित स्थान तलाशना था!

बहुत सोचने के बाद उन्होंने अपनी जन्म भूमि महाराष्ट्र को शुरुआत के लिए चुना. उन्होंने महाराष्ट्र की कई जगहों के बारे में विचार किया.

आखिर में उन्होंने एक ऐसी जगह को चुना, जो नक्सलवाद से प्रभावित थी. वहां की महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधित स्थिति बहुत ही निराशाजनक थी.

वहां महिलाओं को गर्भावस्था के समय बेहतर सुविधाओं का न मिलना, यौन संक्रमित रोग, गर्भपात की समस्याएं, शिशु मृत्यु दर और बांझपन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.

इन सब समस्याओं के लिए कई कदम उठाए जाते हैं, मगर कई ग्रामीण इलाकों में आज भी यह एक बड़ी परेशानी हैं.

रानी बंग ने जिस जगह को चुना था, वह महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला था. इसके बाद दोनों पति-पत्नी निकल पड़े गढ़चिरौली की ओर लोगों की मदद करने.

यहाँ पहुंचकर उन्होंने ग्रामीण लोगों के साथ अपना काम शुरू किया. जब रानी यहाँ पहुंची तो उन्हें पता चला कि उनसे पहले यहाँ कोई महिला डॉक्टर कभी आई ही नहीं थी!

इतना ही नहीं शुरुआत में यहाँ रानी का खूब विरोध भी हुआ. कई तरह के खतरे उनके सामने थे, मगर उन्होंने हार नहीं मानी.

रानी अपना काम करती रहीं. उन्होंने ठान लिया था कि वह पीछे नहीं हटेंगी.

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‘शिशु मृत्यु दर’ रोकने के लिए बनाया मॉडल

रानी ने गढ़चिरौली जिले की स्वास्थ्य समस्याओं पर रिसर्च भी किया. उसके बाद उन्होंने पाया कि, वहां की शिशु मृत्यु दर बहुत ज्यादा थी. बच्चों की मौत वहां पर एक बड़ी समस्या थी.

ऐसा इसलिए क्योंकि, इन क्षेत्रों में अस्पताल और गर्भावस्था के समय महिलाओं को उचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलती थीं.

रानी बंग के आगे बहुत सारी चुनौतियाँ थी. हालांकि, उन्होंने भी ठान लिया था कि वे हर चीज का समाधान करके ही रहेंगी.

रानी गांव-गांव जाकर महिलाओं को शिक्षित करने लगीं. रानी ने उन महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान खुद रखने के तरीके बताए.

इसके बाद उन्होंने अपने पति की मदद से गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी) मॉडल तैयार किया. इसके बाद वह घर-घर जाकर नवजात बच्चों की देखभाल करती थीं, ताकि जिले में और किसी की मौत न हो.

रानी और अभय की मेहनत गाँव वालों को दिखाई देने लगी. ग्रामीणों ने भी रानी का साथ देना शुरू कर दिया.

ग्रामीणों का साथ मिलने के बाद गाँव में हालात सुधरने लगे. धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर काफी कम हुई. इससे रानी का हौसला और बुलंद हुआ. उनका मॉडल सफल रहा और भारत सरकार ने भी इसे अपनाया.

रानी के मॉडल को 12वीं राष्ट्रीय पंचवर्षीय योजना में भी शामिल कर लिया गया. अबतक जो रानी का ख्याल था, उसे उन्होंने हकीकत बना दिया था.

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वैश्विक स्तर पर किया भारत का नाम ऊँचा

1992 में रानी बंग को विश्व स्वास्थ्य सभा में शामिल होने का मौका मिला. दिलचस्प बात यह थी कि वहां डॉ रानी बंग ही एक मात्र गैर सरकारी कर्मचारी थीं.

जब उन्होंने अपने अध्ययन को सबके सामने पेश किया, तो दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने उनकी प्रशंसा की.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी रानी ने महिला स्वास्थ्य के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए. इससे लोगों को ग्रामीण भारत की कड़वी सच्चाई समझ में आई.

1993 में रानी ने माँ दंतेश्वरी दवाखाना खोलकर अपनी एक नई शुरुआत की. बाद में जब ग्रामीणों का समर्थन प्राप्त हुआ, तो क्लीनिक ने अस्पताल का रूप ले लिया.

आज इस अस्पताल में कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद हैं. यह अस्पताल रानी की संस्था ‘सोसाइटी फॉर एजुकेशन एक्शन एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ’ के अंतर्गत आता है.

रानी के आने के बाद गढ़चिरौली जिले में काफी बदलाव आए. अपनी 30 सालों की मेहनत से उन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति की जिन्दगी बदल दी.

महिलाओं की सेहत तो अच्छी हुई ही थी. इसके साथ वहां पर शराब और मलेरिया जैसी परेशानियां भी मौजूद थीं, जिन्हें रानी ने दूर कर दिया.

रानी ने आज उस जिले को पूरी तरह ही बदल दिया है.

रानी बंग ने सालों से परेशानी झेल रहीं ग्रामीण महिलाओं को अपने काम से थोड़ी राहत तो जरूर दी है और उनके जीवन को बदला भी. डॉ. रानी बंग वाकई में एक हिम्मती महिला हैं. यही कारण है कि आज वह अपने जैसा कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाली महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं.

एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) एवं दी बेटर इंडिया (The Better India), यूएन विमेन (UN Women) के सहयोग से भारतीय महिलाओं के सम्मान का उत्सव मना रहा है, जो प्रत्येक दिन नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं तो भारत को एक उन्नत भविष्य की ओर प्रभावी ढंग से अग्रसर कर रही हैं.

ऐसे अभियानों को सपोर्ट करने के लिए आप यथासंभव दान कर सकते हैं. डोनेट करने के लिए इस लिंक पर जाएँ: https://milaap.org/fundraisers/mgchangemakers

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Web Title: Dr. Rani Bang Who Devoted Her Life For Rural Women,

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