June 27, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

दिन दूना रात चौगुना तरक्की करते भारतीय नेता…

माना कि मोदी जी ईमानदार हैं लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं का क्या.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016 में भाजपा की 81 प्रतिशत और कांग्रेस की 71 प्रतिशत आय का स्रोत ज्ञात नहीं है. भाजपा को 461 करोड़ रुपये का चंदा 2015-16 में अज्ञात स्रोतों से मिला जो कि उसकी कुल आय का तकरीबन 81 प्रतिशत है. वहीं, कांग्रेस को कुल आय का 71 प्रतिशत या 186 करोड़ रुपये गुमनाम स्रोतों से मिला.

500 से लेकर 2100 फीसदी तक बढ़ोत्तरीसुप्रीम कोर्ट में एडीआर ने चार उदाहरण ऐसे पेश किए हैं जिनकी संपत्ति में 1200 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. 22 ऐसे हैं जिनकी संपत्ति में 500 फीसदी तक का इजाफा हुआ है. केरल के एक नेता की संपत्ति में 1700 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई तो एक सांसद की संपत्ति में 2100 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है.

 

सरकार मे आने के लिये हमारे देश के नेता क्या-क्या जतन नही करते, यह हम सभी देखते चले आ रहे हैं । और अभी भी देख रहे हैं, पहले की राजनीति मे कुछ हद तक ईमान धरम हुआ करता था लेकिन इधर लगभग बीस बर्षो से राजनीति का सबसे ज्यादा व्यापारी करण हुआ, जिसके चलते देश एक अराजकता की ओर जा रहा है । इसका एक कारण देश की बढ़ती आबादी को भी माना जा सकता है । बढ़ी हुई आबादी का नेताओ ने भरपूर इस्तेमाल किया, अपने अपने हिसाब से जिसकी जहां गोट फिट हुई, जिसके कारण देश की दिन प्रति दिन हालत खराब होती गई, यदि हम १९७५ के इधर की राजनीति पर नजर ड़ाले तो राजनीति का व्यापारीकरण हुआ, खास तौर पर इधर बीस बर्षो में, लेकिन तरक्की किसकी हुई? क्या देश के किसान की तरक्की हुई? क्या आम आदमी की मूलभूत सुबिधाऐं बढ़ी? हाँ मै गर्व से कह सकता हूँ कि हमारे देश के नेताओ की तरक्की हुई, इनका धन दिन दूना रात चौगुना बढ़ा? फिर चाहे वह किसी भी पार्टी अथवा दल से संबंधित हो, आम लोगो की खाल उधेड़ने मे कोई पीछे नही रहा, जिसका दांव लगा उसने लूटा? पिछली सरकारो मे भी नेता अधिकारियो को ,दाल मे नमक, खाने का इसारा करते थे, इस सरकार ने भी इसारा कर दिया? मेरे जैसा तो समझता है कि नमक छोड़ दो और दाल पी जाओ? सरकार बदली थी अधिकारी हड़बडाए थे, लेकिन इसारा मिलते ही टूट पड़े, गढ्ढा मुक्त सड़कें?? देश की जनता ने भी सरकारो को बदल-बदल कर आजमाया लेकिन सब जैसे के तैसे, यानी गढ्ढा मुक्त सड़कें? चुनाव मे बेबकूफ बनाना इनकी परंपरा है । और वैसे भी जब देश मे ९९.प्रतिशत नेता भ्रष्ट हों तो आप क्या उम्मीद करेंगे? जब देश का ग्राम प्रधान, सभासद, जोकि सबसे निम्न स्तर का नेता माना जाता है वह भी चुनाव जीतने के कुछ ही समय मे लखपती बन जाता है तो ऊपर वाले??

 

 

अगर लिखने बैठू तो किताब तो क्या पूरा ग्रंथ छोटा पड़ जाएगा, पिछली सरकारो के भृष्टाचार तो जग जाहिर है इसी लिये देश की जनता ने एक नई सरकार चुनी थी, जनता उनके झूंठ, फरेब, और जुमलो के झांसे मे फस गई, फिर क्या था? फिर क्या हुआ ढॉख के तीन पात? इस पार्टी के सभी नेताओ को छोड़कर उन्होने पूरे देश को ही भृष्ट, और चोर बना दिया, लेकिन एक काम अच्छा भी किया जो नोटबंदी की, कमसे कम ९९% धन की वापसी से यह तो पता चल गया कि देश का आम नागरिक चोर नही है? तो चोर आखिर हैं कौन?? नोटबंदी से चोरो पर कोई असर हुआ क्या? आजकल विहार के घोटाले की चर्चा जोरो पर है, ऐसे न जाने देश मे कितने काले सर्प है जो नांगमणी पर कुंड़ली मारे बैठे है । हमारे देश मे जल, जंगल, जमीन, सोना, चांदी, और धन का लगभग ७० फीसदी हिस्सा भृष्ट नेता, व भृष्ट अधिकारियों के पास है, जबकि बाकी मे पूरा देश?

 

अब आप सोचे कि ऐसे मे देश तरक्की कैसे कर सकता है । कैसे बेरोजगारो को रोजगार मिल सकता है, कैसे गरीब को रोटी मिल सकती है, कैसे किसान खुशहाल रह सकता है, आदि-आदि, जब नेताओं के भृष्टाचार की बात करते हैं तो हमे उनको नही भलना चाहिए जो इनके गुरू हैं यानी भृष्ट अधिकारी, इन सब मे भी कुछ ईमानदार होते है वह नौकरी के दौरान एक कोने मे पड़ी टूटी मेज कुर्शी पर बैठकर अपना समय बिता देते है । लेकिन वहीं भृष्ट अधिकारी सभी सरकारो मे अपनी जगह बना लेते है । जैसा कि आप और हम देख रहे हैं, आखिर यही तो है कमाऊ पूत? क्या आप ने कभी सोचा कि एक घास छीलने वाला अंगूठाटेक नेता अरबो खरबो का मालिक बन गया हो, और यदि भूल से कोई बड़ा मीडियाकर्मी उसको उजागर कर दे, तो वह नेता बड़े जोर से सोर मचाना सुरू कर देता है, और कहता है कि यदि किसी को कोई आपत्ती है तो सीबीआई से जांच करा लें ईडी से जांच करा लें, कयोकि उसे मालुम है कि यह वह विभाग है जहां सब काला, सफेद होता है?? यही वह जगह है जहां पूरा जीवन एैश से व्यतीत करने के बाद, चार्जसीट दाखिल होती है? क्योकि दुनिया मे यही एक देश ऐसा है जहां मरने के बाद केश बंद हो जाता है और सारा लूट का माल सात पीड़िया एैस करतीं है । अब सोचना हम आप को है कि आने वाली पीड़ी को देश कैसा चाहिए????

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