December 1, 2020

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दिल्ली में कोरोना संकट के बीच बढ़ा वायु प्रदूषण, आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

दिल्ली| राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में कोरोना संकट के बीच ही धुंध की चादर छाने के साथ ही पूरे क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंच गई है। शुक्रवार सुबह कई इलाकों में एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स ‘खराब’ कैटेगरी में दर्ज किया गया।

शुक्रवार सुबह दिल्‍ली का AQI 322 था। नोएडा में यह और भी खराब 342 दर्ज किया गया। इसके अलावा हाल के दिनों में हवा में PM2.5 कणों की मात्रा तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब कम से कम दिसंबर के अंतिम हफ्ते तक लोगों के लिए बाहर निकलना, सेहत से समझौता करना होगा। बहुत ज्यादा बाहर रहने पर फेफड़ों, सांस आदि से जुड़ी बीमारियां गिरफ्त में ले सकती हैं।

दूसरी ओर इससे निपटने के कदम उठाने के बीच ही केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पराली जलाये जाने से दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ चार प्रतिशत ही प्रदूषण होता है और शेष 96 प्रतिशत के लिये स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं। इस पर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ‘इनकार करते रहने से कोई फायदा नहीं होगा।’

क्या कहा जावड़ेकर ने?

जावड़ेकर ने अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, ‘केवल चार प्रतिशत प्रदूषण पराली जलाने के कारण है। इसके अलावा, 96 प्रतिशत प्रदूषण बायोमास जलाने, कूड़ा करकट फेंकने, कच्ची सड़कों, धूल, निर्माण कार्य और तोड़-फोड़ संबंधी गतिविधियों इत्यादि के कारण है।’

जावड़ेकर के बयान पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया, ‘इनकार करते रहने से कोई लाभ नहीं होगा। यदि पराली जलाने की वजह से केवल चार प्रतिशत प्रदूषण होता है, तो पिछले पखवाड़े में अचानक प्रदूषण क्यों बढ़ गया है? हवा इससे पहले साफ थी। हर साल एक ही कहानी।’

उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ दिन में किसी अन्य स्थानीय स्रोत से प्रदूषण नहीं बढ़ा है, जो हाल में बढ़े प्रदूषण का कारण हो।’

आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि सीपीसीबी के 2019 के अनुमान के अनुसार, पराली जलाया जाना राष्ट्रीय राजधानी में 44 प्रतिशत प्रदूषण के लिये जिम्मेदार है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2019 के अनुमान के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 44 प्रतिशत प्रदूषण पराली जलाने के कारण फैला। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वायु गुणवत्ता निगरानीकर्ता ‘सफर’ ने कहा कि दिल्ली में 44 प्रतिशत प्रदूषण के लिये जिम्मेदार कारण पंजाब और हरियाणा में पराली जलाया जाना था।’

हालांकि बाद में प्रकाश जावड़ेकर ने एक ट्वीट कर स्पष्ट किया कि उनके कहने का आशय यह था कि इस सप्ताह प्रदूषण में चार प्रतिशत हिस्सा पराली जलाने का रहा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘दिल्ली में प्रदूषण को लेकर आज दिए गए मेरे बयान को मीडिया के एक हिस्से ने गलत ढंग से पेश किया। दिल्ली के वायु में प्रदूषण के स्तर को लेकर चार प्रतिशत की हिस्सेदारी को जो बात की थी उसे बारे में मैं स्पष्ट कर रहा हूं कि यह आंकड़ा इस सप्ताह का है। पराली जलाए जाने की घटनाएं जब अपने चरम पर होती हैं तो यह 4 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच घटता बढ़ता रहता है।’

प्रदूषण पर नज़र रखने के लिए 50 टीमें तैनात

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में सर्वाधिक प्रदूषित स्थलों (हॉटस्पॉट) पर नजर रखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 50 टीमें तैनात की और पंजाब सरकार से पराली जलाने पर रोक लगाने की भी अपील की।

फिलहाल क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत एनसीआर में बिजली जेनरेटर पर प्रतिबंध सहित कई वायु प्रदूषण-रोधी उपायों को भी लागू किया गया है। नासा के उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीरों में पंजाब के अमृतसर, पटियाला, तरनतारन और फिरोजपुर तथा हरियाणा के अंबाला और राजपुरा में बड़े पैमाने पर खेतों में पराली जलाए जाने का पता चला है।

हालांकि, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ‘वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ ने कहा कि राजधानी की वायु गुणवत्ता पर इसका प्रभाव फिलहाल कम है। जावड़ेकर ने यह भी कहा कि जब वह लुधियाना के दौरे पर गए थे, तो खेतो में पराली जलाने के कारण उठ रहे धुंए से उनका दम घुटने लगा था।

उन्होंने कहा, ‘मैं पंजाब सरकार से अपील करता हूं कि वह कार्रवाई करे और पराली जलाए जाने पर रोक लगाए। मैं पिछले साल लुधियाना में एक कार्यक्रम में गया था। खेतों में पराली जलाए जाने के कारण लौटते वक्त मेरा दम घुटने लगा था, जबकि मैं वातानुकूलित कार में था। यह वहां रह रहे लोगों समेत हर किसी के लिए हानिकारक है। पंजाब सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इस बार पराली जलाने के मामले कम हों।’

उन्होंने सीपीसीबी दलों के नोडल अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आप आगामी दो महीने के लिए काम करेंगे और सभी गतिविधियों एवं शिकायतों का संज्ञान लेंगे। आप निरीक्षण करेंगे। आपके पास रिपोर्ट दायर करने का अधिकार होगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

सीपीसीबी के 50 दल 15 अक्टूबर से अगले साल 28 फरवरी तक दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषित स्थलों पर नजर रखेंगे। वे दिल्ली, उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ, हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, झज्जर, पानीपत और सोनीपत तथा राजस्थान के भिवंडी, अलवर और भरतपुर जाएंगे।

‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान भी शुरू  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए गुरुवार को एक अभियान शुरू किया और लोगों से अनुरोध किया कि वे यातायात सिग्नल पर रुकने के दौरान अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर दें।

केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने बड़े पैमाने पर ‘ रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान की शुरुआत की है और लोगों को इस कदम के प्रभाव से अवगत कराते हुए इसकी सफलता सुनिश्चित करेगी।

उन्होंने ट्वीट किया, “रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ। दिल्ली ने हमारे अभियान ‘युद्ध, प्रदूषण के विरूद्ध’ के तहत इसकी शुरुआत की है। आइए, सभी संकल्प लें कि लाल बत्ती पर अपनी गाड़ियों (इंजन) को बंद कर देंगे। हर एक कोशिश प्रदूषण को कम करने में योगदान देगी।”

ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में एक करोड़ गाड़ियां पंजीकृत हैं। केजरीवाल ने कहा कि अगर 30-40 लाख गाड़ियां हर दिन सड़कों पर उतरती हैं और यातायात सिग्नल पर रुकने के दौरान गाड़ी का इंजन चालू रहता है तो यह शहर के वायु प्रदूषण को बढ़ाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ” विशेषज्ञों का कहना है कि एक गाड़ी एक दिन में लाल बत्ती पर औसतन 15-20 मिनट रुकती है और 200 एमएल ईंधन की खपत करती है। इससे बहुत प्रदूषण होता है। अगर 10 लाख गाड़ियां लाल बत्ती पर अपना इंजन बंद कर लें तो हर साल पीएम 10 को 1.5 टन और पीएम 2.5 को 0.4 टन रोक लिया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि वाहन का इंजन बंद करने से न सिर्फ प्रदूषण रुकेगा, बल्कि प्रत्येक गाड़ी प्रति वर्ष सात हजार रुपये की बचत भी होगी।

पीडब्ल्यूडी पर 20 लाख रु का जुर्माना

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का गुरुवार को निर्देश दिया। विभाग पर बुराड़ी थाने के पास एक नाले के निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण से संबंधित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर यह अर्थदंड लगाया गया है।

राय ने कहा, “दिल्ली सरकार की ओर से सख्त निर्देश के बावजूद, एजेंसी धूल नियंत्रण नियमों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन करती रही। मैंने पीडब्ल्यूडी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश जारी किए हैं।”

मंत्री ने पीडब्ल्यूडी को धूल को उड़ने से रोकने के लिए कदम उठाने को कहा जिनमें धूल के ढेर को जाली से ढकना और पानी का छिड़काव करना शामिल है। उन्होंने कहा, “मैं वहां फिर से निरीक्षण (टीम) भेजूंगा। अगर उचित उपाय नहीं किए गए तो मैं फिर से 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाऊंगा।”

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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