August 4, 2021

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देश के 10 बड़े बीफ़ एक्सपोर्टर्स हिन्दू हैं

पिछले कुछ दिनों में उत्तरप्रदेश में कुछ ऐसे बूचड़खाने बन्द कराए गए जो सरकार के अनुसार अवैध रूप से चलाये जा रहे थे। आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि बूचड़खाने का सम्बन्ध किसी एक ख़ास समुदाय के लोगो से ही होता है।

लेकिन हक़ीक़त यह है कि भारत के दस बड़े बीफ़ एक्सपोर्ट्स का सम्बंध हिन्दू समुदाय से है। इनमे से अल कबीर देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना है।

अल कबीर

अल कबीर तेलंगाना के मेडक ज़िले के रूद्रम गांव में स्थित है। तक़रीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं। यह बूचड़खाना अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है। मुंबई के नरीमन प्वॉइंट स्थित मुख्यालय से अलकबीर द्वारा मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ़ निर्यात किया जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा बीफ़ निर्यातक भी है और मध्य-पूर्व के कई शहरों में इसके दफ़्तर भी हैं।

अल कबीर का दफ़्तर दुबई, अबू धाबी, क़ुवैत, ज़ेद्दा, दम्मम, मदीना, रियाद, खरमिश, सित्रा, मस्कट और दोहा में हैं। इसने बीते साल लगभग 650 करोड़ रुपये का कुल व्यवसाय किया था।

अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लमिटेड

अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लमिटेड के मालिक सुनील कपूर हैं। इसका मुख्यालय मुंबई के रशियन मैनशन्स में है। कंपनी बीफ़ के अलावा भेड़ के मांस का भी निर्यात करती है।

एमकेआर फ़्रोज़न फ़ूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

एमकेआर फ़्रोज़न फ़ूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड भी देश का बड़ा बूचड़खाना है। इसके मालिक मदन एबट हैं। कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है।

एबट कोल्ड स्टोरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड

एबट कोल्ड स्टोरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना पंजाब के मोहाली ज़िले के समगौली गांव में है। इसके निदेशक सनी एबट हैं।

अल नूर एक्सपोर्ट्स

अल नूर एक्सपोर्ट्स के कंपनी का दफ़्तर दिल्ली में है। इसके मालिक सुनील सूद हैं। लेकिन इसका बूचड़खाना और मांस प्रसंस्करण संयंत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर के शेरनगर गांव में है। इसके अलावा मेरठ और मुबई में भी इसकी ब्रांच हैं। इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं। इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई और यह 35 देशों को बीफ़ निर्यात करती है।

एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना उत्तर प्रदेश के उन्नाव में है। इसका मांस प्रसंस्करण संयंत्र भी है। इसके निदेशक ओपी अरोड़ा हैं। यह कंपनी साल 2001 से काम कर रही है। यह मुख्य रूप से बीफ़ निर्यात करती है। कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है। एओवि एग्रो फूड्स का मुख्यालय मेवात के नूह में हैं। अभिषेक अरोड़ा एओवी एग्रो फ़ूड्स के निदेशक हैं।

स्टैंडर्ड फ़्रोज़न फ़ूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

स्टैंडर्ड फ़्रोज़न फ़ूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कमल वर्मा हैं। इसका बूचड़खाना और सयंत्र उत्तर प्रदेश के उन्नाव के चांदपुर गांव में है। इसका दफ्तर हापुड़ के शिवपुरी में है।

पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स

पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स के निदेशक एस सास्ति कुमार हैं। यह कंपनी बीफ़ के अलावा मुर्गी के अंडे और मांस के व्यवसाय में भी है। कपंनी का संयंत्र तमिलनाडु के नमक्काल में परमति रोड पर है।

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स का बूचड़खाना तमिलनाडु के गांधीनगर में है। कंपनी के निदेशक राजेंद्रन धर्म को व्यवसाय से बिल्कुल अलग रखते हैं।

महाराष्ट्र फ़ूड्स प्रोसेसिंग एंड कोल्ड स्टोरेज

महाराष्ट्र फ़ूड्स प्रोसेसिंग एंड कोल्ड स्टोरेज के पार्टनर सन्नी खट्टर का भी यही मानना है कि धर्म और धंधा अलग अलग चीजें हैं और दोनों को मिलाना ग़लत है। वो कहते हैं कि मैं हिंदू हूं और बीफ़ व्यवसाय में हूं तो क्या हो गया?

किसी हिंदू के इस व्यवसाय में होने में कोई बुराई नहीं है। उनका कहना है कि यह व्यवसाय करके कोई बुरा हिंदू नहीं बन गया। इस कंपनी का बूचड़खाना महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के फलटन में है।

इसके अलावा हिंदुओं की ऐसी कई कंपनियां हैं, जो सिर्फ बीफ़ निर्यात के क्षेत्र में हैं। उनका बूचड़खाना नहीं है, पर वे मांस प्रसंस्करण, पैकेजिंग कर निर्यात करते हैं।

कनक ट्रेडर्स ऐसी ही एक कंपनी है। इसके प्रोप्राइटर राजेश स्वामी ने कहा, “इस व्यवसाय में हिंदू-मुसलमान का भेदभाव नहीं है। दोनों धर्मों के लोग मिलजुल कर काम करते हैं। किसी के हिंदू होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। वे यह भी कहते हैं कि बूचड़खाने बंद हुए तो हिंदू-मुसलमान दोनों को नुक़सान होगा।

 

 

 

 

गोवध पर रोक: संविधान में क्या है?

संविधान के अनुच्छेद 48 में गोवध पर रोक का जिक्र है, लेकिन रोक लगाना है या नहीं ये मामला पूरी तरह से राज्यों पर छोड़ दिया गया. ऐसा इसलिए है क्योंकि अनुच्छेद 48 संविधान के दिशा निर्देशक सिद्धांतों में आता है यानी वो निर्देश जिनका पालन कैसे करना है इसका फैसला राज्य करते हैं.

अनुच्छेद 48 में कहा गया है कि राज्य ‘कृषि और पशुपालन का विकास वैज्ञानिक सोच पर करें, अच्छी नस्ल के विकास और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाएं, और गाय, बछड़े और दुधारू और खेती में काम आने वाले दूसरे जानवरों का कत्ल रोकें’

जब संविधान बन रहा था तो गोवध पर रोक लगाने वाली इन लाइनों को शामिल करने से पहले बड़ी बहस हुई थी. इसे मूल अधिकार में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था. अंत में ऐसा नहीं किया गया. वजह ये थी कि मूल अधिकार नागरिकों के लिए होता है जानवरों के लिए नहीं.

अंत में फैसला ये हुआ कि गाय के कत्ल पर पाबंदी लगानी है या नहीं ये राज्य तय करेंगे. अब देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह का खान पान और संस्कृति है. इसलिए सच ये भी है कि देश के कई राज्यों में गाय का मांस खाने पर पाबंदी नहीं है और कई राज्यों में गोवध पर सख्त सजा है. ताजा विवाद मनोहर पर्रिकर के बीफ वाले बयान पर हुआ था।

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