June 29, 2022

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सच के साथ

नेता बनने की विधि;

3d small people holding hands in the word “team”. 3d image. Isolated white background.

युवा नेता” बनने की विधि
आइए जानें: कैसे बनें नेता

भारत भाग्य विधाता कौन, आम आदमी, यह तो सदी का सबसे बड़ा जोक होगा। पैसा हो सकता है, मगर उसे चलाने वाले कौन, उद्योगपति, मगर उनके भी हित कहीं और से सधते हैं। सही समझ रहे हैं आप लकदक खादी में सजे, चेहरे पर लालामी और माथे पर तमाम परेशानियों की वजह से कुछ सिलवटें लिए नेता ही तय करते हैं समय की रफ्तार। मगर नेता बनना इतना आसान तो नहीं। कोई फिक्स रास्ता नहीं, कोई फिक्स कोर्स नहीं और आगे बढ़ने का कोई श्योर शॉट जरिया नहीं। मगर कुछ बातें ऐसी हैं, जिनका आप तन, मन और धन (जी हां नेता बनने में धन की भी अहम भूमिका है) से पालन करें तो आपको भारत का नहीं तो अपने भाग्य का समृद्ध विधाता बनने से कोई नहीं रोक सकता। तो इस बार जानिए नेता बनने के कुछ नुस्खे, जिनका इस्तेमाल खालिस नकल के बजाय कुछ अकल लगाकर किया जाए, तो आपको नेता बनने से कोई नहीं रोक सकता।

कोई पैदाइशी नेता नहीं होता। (इसमें वे कुछ हजार परिवार शामिल नहीं हैं, जिनका पैतृक कारोबार राजनीति का है) नेता बनने के लिए बहुत लगन से काम करना होता है। शतरंज की बिसात की तरह सिर्फ अपने नहीं, दूसरों के मोहरे पर भी नजर रखनी होती है। आप नेता बनना चाहते हैं, अच्छी बात है, मगर पूरी तैयारी के साथ सफर शुरू नहीं किया तो किसी छोटे-मोटे मोर्चे के उप-सह सचिव बनकर ही रह जाएंगे।

“युवा नेता” बनने की विधि. . . . . . . . .
आवश्यक सामग्री :- १ SUV दस-बारह लाख की ।।
सफ़ेद कलफ लगे कुर्ते-पजामे, सफ़ेद लिनेन के शर्ट पेंट ।।
सोने की २ चेन ।।
सोने की अंगूठी-ब्रेसलेट ।।
२ आई फोन ।।
ब्रांडेड जूते-सेंडिल ।।
ब्रांडेड कलाई घडी ।।
१ चश्मा Ray ban का ।।
क्लासिक का सिगरेट पैकेट ।।
रजनीगंधा का डिब्बा ।।
४ -६ जी हुजूरी करते चेले।

कैसे बने :- अपने SUV के नंबर प्लेट में नंबर की जगह अपनी पार्टी के झंडे का चिन्ह बनवाये और अपने ४ -६ चेलो को अपनी SUV में सदैव बैठा कर रखे।।

SUV में बैठ के मोबाइल कान में ही लगा के रखे।।
अपनी देह को कुर्ते-पजामे और सोने
के आभूषण से सुसज्जित करे।।
और किसी भी एक नेता के इर्द गिर्द परिक्रमा प्रारम्भ करे।
अपने नेता को प्रसन्न करने के लिए “मंच-माइक-माला” की यथासंभव ज्यादा से ज्यादा व्यवस्थाये करे ।

नेता जी के आगे पीछे घूमते हुए उनकी “सेवा-पूजा” करते रहे, अपने नेता जी के साथ और उनके भी नेता जी के साथ फोटो खिंचवा कर घर एवं अपने व्यापारिक
प्रतिष्ठान में लगावे ।

हर छोटे बड़े कार्यक्रम, त्यौहार, जन्मदिन पर पुरे शहर में फ्लेक्स लगवाये ।।
मीडिया के लोगो से सेटिंग कर अपनी फ़ोटो अखबारो में छपाते रहे ।।

समय समय पर अपने क्षेत्र में
चतुर्थ श्रेणी के सरकारी अधिकारियों पर रौब झाड़ते रहे ।
लो जी अब तैयार हैं शहर
का एक और युवा नेता!

अरे हम किसी तख्तापलट की बात नहीं कर रहे, बस एक बेसिक मंतर सिखा रहे हैं। जिसके पास भीड़ है, वही हिट है, चाहे सिनेमा हो या फिर पॉलिटिक्स। आपने देखा होगा, मोहल्ले के भइया जी या इलाके के पार्षद या फिर विधायक जी को। उनकी एक आवाज पर सैकड़ों लौंडे-लफ्फाड़े जुट जाते हैं बाइक पर सवार होकर। मरने-मारने को तैयार दिखते। रैली है, प्रदर्शन है या फिर पार्क में कल्चरल प्रोग्राम, यही युवा काम आते हैं। तो आपको भी इन्हीं पर फोकस करना है। कैसे करना है, यह आप तय करें। सामने वाले पार्क में पार्षद जी से कहकर एक वॉलीबॉल कोर्ट बनवा सकते हैं। कल्चरल नाइट का रसीद-कट्टा बनवाकर लड़कों को 10 फीसदी कमिशन पर दे सकते हैं और फिर आगे की सीटों से लेकर डांसर लाने तक का इंतजाम साथ में कोई हरकत न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी।

यह जनता शातिर भी है और भोली भी। इसलिए जब भी कोई किसी काम के लिए आए, तो न तो बोलें ही न। काम हो या न हो, ठोस आश्वासन जरूरी है। एक चुटकुला शायद इस समझने में आपकी मदद करे। जंगल में सभा हुई, सब जानवर बोले – शेर बहुत परेशान करता है। बंदर बोला, किसी को नेता बना लें, हमारी बात भी सुनी जाएगी। सब राजी हो गए मगर नेता बने कौन? फिर बंदर आया और बोला मैं ही लेता हूं यह कठिन जिम्मेदारी। कुछ दिनों बाद शेर बकरी के बच्चे को उठाकर भाग गया। बकरी पहुंची बंदर के पास। बंदर फौरन निकल पड़ा। पीछे-पीछे जंगल के बाकी जानवर। शेर एक मैदान में बैठा शिकार को तड़पा रहा था। बंदर यह देखकर एक डाल से दूसरी डाल पर कूदने लगा। कुछ देर बाद जानवरों ने पूछा, अरे कुछ करते क्यों नहीं। बंदर ने जवाब दिया, देखो मेरी भागदौड़ में तो कोई कमी नहीं।

यह गुरुमंत्र कान में फूंक लें। सब कुछ छूट जाए, विचारधारा, नेता जी या फिर रुपया-पइसा, मगर जनता का साथ न छूटे। जनता साथ है तो आप निर्दलीय भी चुनाव जीत सकते हैं, नई पार्टी बना सकते हैं, आंदोलन खड़ा कर सकते हैं, कुल मिलाकर यह कि इतिहास की धारा बदल सकते हैं। मगर जनता साथ छूटी तो राजनीति अमर चित्र कथा की तरफ सिर्फ किताबों में नजर आएगी।

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