September 19, 2021

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नेता ही नहीं जनता भी है भ्रष्ट?

नेता नहीं जनता भी भ्रष्ट है?

वर्तमान मे भ्रष्टाचार चर्चा का अहम मुद्दा बना हुआ है। ऐसा नहीं है की, यह कल नहीं था।
देश का हर व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ है, जब हर व्यक्ति इसके खिलाफ है तो फिर प्रश्न यह उठता है की फिर भ्रष्टाचार कोन कर रहा है। हम सदैव से ही नेताओ, अधिकारी, पुलिस, शिक्षा इत्यादि हर क्षेत्र को भ्रष्ट कहते फिरते है, और यह बात सत प्रतिशत सत्य भी है। परन्तु यह भी प्रश्न बड़ा आश्चर्य भरा है की ये सब आते कहा से है, क्या इनकी कोई विशेष कौम होती है, क्या ये हमसे अलग पैदा होते है। ये सब हमारा ही तो हिस्सा है, इस पर एक परिपक्व और गंभीर सोच की आवश्यकता है।

 

वर्तमान परिस्थितियो मे नेता से लेकर एक ठेले से सब्जी बेचने वाला तक जिसे जैसे मौका मिल रहा है वह इस देश को बेचने मे तुला है। अंग्रेजी का एक ही शब्द “हिपाक्रसी” आज हमारे पुरे समाज को परिभाषित कर देता है। आपका नेताओ को गाली देना जायज है, परंतु नेता ही क्यो। क्या वो आपका दूध वाला ईमानदार है जो आपके बच्चे के दूध मे यूरिया, डिटेर्जेंट पाउडर और ना जाने क्या क्या मिला कर आपको दे रहा है, दूध के नाम पर जहर पीला रहा है। ताजा सर्वेक्षण यह कहता है की देश के ज़्यादातर हिस्सो मे मिलने वाला दूध मिलावटी है। वो किसान ईमानदार है जो सब्जियों मे जहररीले रासायनिक इंजेक्सन लगाकर आपको दे रहा है। सब्जी वाला ईमानदार है जो सब्जियों को हरा और ताजा दिखाने के लिए जहरीले रासायनिक कलर लगा रहा है। नेताओ के साथ ये भी जहर खिला रहे है आपकों और आपके बच्चो को। वो शिक्षक ईमानदार है जिसके पास ट्यूनसन जाए बिना आपके बच्चो को नंबर नहीं मिलते है। वो दुकानदार और व्यापारी ईमानदार है जो आपके खाने के अनाज, दवाई, और मिठाई मे जहर डाल कर आपको दे रहे है। हमारे यहा के चिकित्सक ईमानदार है, जो दिन मे 100-100 मरीज देखते है, जो टेस्ट और दवा दोनों साथ लिख देते है। हद तो तब हो गई जब दो वर्ष पहले समाचार मे सुना की लखनऊ मे इंसान के खून मे भी मिलावट करके लोगो ने लोगो की जान के साथ खिलवाड़ किया। इंजीनियर, डॉक्टर, सरपंच, पत्रकार किस किस का नाम ले, किसी ने भी नहीं छोड़ा। सरकारी अधिकारी कहते है नेताओ का दबाव रहता है, कितने प्रतिशत केस मे दबाव रहता है 50 तो क्या बचे हुए 50 के साथ बहोत अच्छा काम करते है। दो-दो साल की बच्चियो के साथ बलात्कार, शर्म आती है, इस दोगले समाज के लिए।

 

यह बढ़ी विडम्बना है की हम उस समाज का हिस्सा है जहा गंदगी फैलाने वाले को बड़ा समझा जाता है और जो उस गंदगी को साफ करता है उसे छोटा। आज हममे से ५०% लोगो के माता पिता सरकारी नौकरियो में है, तो क्या सभी ईमानदार है, हम देश को बदलने की बात करते है क्यो नहीं हम सिर्फ उनको समझा सकते, हम खुद और अपने परिवार को क्यों नहीं बदल रहे है, क्यों हम दुसरो को बदलने में तुले है, जो हमारे हाथ में नहीं है। आईएएस,आईपीएस और आईआईटी से पढ़ा हुआ व्यक्ति जब यह कहता है की 25 लाख दोगे तब शादी होगी तो आप क्या अनपढ़ लोगो से उम्मीद लगाए हो। भौतिक वस्तुओ का जो नुकसान हो रहा है वो तो आज नहीं कल हम पा लेंगे पर जो इन 65 वर्षो मे हमने अपना मानसिक पतन किया वो कहा से लाएगे। ऐसा नहीं की विदेश मे भ्रष्टाचार नहीं होता। दुनिया का हर व्यक्ति सरलता से धन प्राप्त करना चाहता है।

 

परंतु यह गंभीर प्रश्न है की वहा भ्रष्टाचार कम क्यो है। इसका सीधा सा जवाब यह की वहा का बुद्धिजीवी वर्ग गंभीर और दूरदृष्टि वाला है। सिर्फ कड़े कानून ही इस इंसानी फितरत को बांध सकते है, और यह बात वहा के बुद्धिजीवी वर्ग ने वर्षो पहले ही समझ ली थी। और जो हमारे 99% बुद्धिजीवी वर्ग मे आज 2012 मे भी नहीं है। हमारे देश का हास का सबसे बड़ा कारण हमारे बुद्धिजीवी लोगो की निक्रष्टता है। और आज भी अगर हम नहीं सुधरे तो पता नहीं हम अपने बच्चो को क्या भविष्य देंगे। अगर नेता, अधिकारी के साथ-साथ हमारे देश का हर व्यक्ति यह सोच ले की मै और मेरा परिवार भ्रष्टाचार नहीं करेगा तो मुझे नहीं लगता की देश में कही भी भ्रष्टाचार रहेगा. परन्तु ऐसा कभी नहीं होगा, हममे से हर कोई चाहता है की शहीद हमारे पड़ोस में पैदा हो, घर में नहीं. हमारे समाज ने जितनी प्रगति की है उतना ही हमारे नैतिक मूल्यों का हास हुआ है और इसका कारण कोई और नहीं हम खुद है। आज इस फैलते भ्रष्टाचार का सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण है हमारे घटते नैतिक मूल्य और बुद्धिजीवी वर्ग की अकर्मण्यता। और यदि हमने अपने मूल्यो अब भी नहीं पहचाना तो दिन दूर नहीं जब हम खुद के ही गुलाम बन कर रह जायंगे।

अंत में यही कह सकता हूं कि ईमानदार वहीं है जिसे लूटने का मौका नहीं मिला।

अगर कुछ ग़लत लिखा हो तो माफ़ करना।

#जय_हिन्द

3 thoughts on “नेता ही नहीं जनता भी है भ्रष्ट?

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