October 3, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

परिस्तिथियों के हिसाब से जीना सीखें!! The Best Story.

जैसा के आजकल हर जगह कुछ ना कुछ निर्माण का काम चलता ही रहता है | हमारे घर के पास भी एक बड़ी सी सरकारी बिल्डिंग के निर्माण का काम चल रहा था जहाँ काम करने वाले मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट/कपड़े पकडकर रेल-रेल खेल रहे थे और कोई बच्चा इंजिन बनता बाकी सारे बच्चे डिब्बे बना करते थे इसी तरह वोह बार बार इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे बदल जाया करते थे | पर काफी देर तक देखने के बाद मैंने ध्यान से देखा के उनमें से एक बच्चा जो के केवल निक्कर ही पहने था हर बार गार्ड ही बनता था। मुझसे जिज्ञासा के चलते रुका न गया और फिर पास जाकर मैंने गार्ड बनने वाले बच्चे को पूछा बेटा आप हर बार गार्ड ही बनते हो, गार्ड बनना तुमको ज्यादा अच्छा लगता है…? तुम्हारा मन नहीं करता के कभी इंजन या डब्बा बनो..?

images(73)
इस पर उस बच्चे ने जो बताया उसने मुझे हिला के रख दिया |

उसने कहा बाबूजी मेरे पास पहनने के लिए कमीज नहीं है, तो मेरे पीछे लगने वाला बच्चा क्या पकड़ेगा…? इसीलिए मैं हर बार गार्ड ही बनता हूँ, और खेल मैं बना रहता हूँ , और ये बोलते समय उसको कोई अफ़सोस नहीं था, के मेरे पास कमीज न होने के वजह से मैं कभी इंजन या डब्बा नहीं बन पा रहा हूँ या नहीं बन पाउँगा | बल्कि इस बात का संतोष था के कम से कम, मैं खेल में बार बार ही सही, एक गार्ड बनकर खेल तो रहा हूँ |

 

सच में आज ये बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा सबक दे गया, के किसी का जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसको कोई न कोई कमी हमेशा रहेगी…. वो बच्चा भी अपने माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु उसने ऐसा नहीं किया उसने परिस्थितियों के हिसाब से उसका का समाधान ढूंढा।

images(75)

 

अब अगर एक छोटा सा उदहारण हम एक छोटी सी चिड़िया का ही ले तो वह चील की ऊँची उड़ान देखकर कभी डिप्रेशन में नहीं आती वो अपने में मगन रहती है, मगर इंसान ही है जो दूसरे इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं। सोचने की जरूरत है के हम कितना रोते हैं? कभी अपने काले या सावले रंग के लिए, कभी छोटे क़द के लिए, बेडोल शरीर के लिए , कभी अपने पड़ौसी की बडी सी कार के लिए , कभी पड़ोसन के गले का हार के लिए , कभी परीक्षा या टेस्ट में अपने कम मार्क्स के लिए , कभी अंग्रेज़ी नहीं आती इसलिए , कभी पर्सनालिटी के लेकर, कभी नौकरी की टेंशन, कभी काम धंदे में मन्दी , और यह सबके साथ है और हमें इससे बाहर आने की जरूरत है | क्योंकि ये जीवन है… इसे ऐसे ही जीना पड़ता है तुलना से बचें और खुश रहें । अपनी परिस्तिथियों के हिसाब से जीना आना चाहिये अगर नहीं आता तो सीखना पड़ेगा |

images(64)

मैं निवेदन करूँगा लिखे अगर आपको जरा सा भी पसंद आया हो यह पोस्ट तो इसको आगे अपने दोस्तों को शेयर करें अगर लिख पाएं तो आप भी नीचे कमेंट लिखें की मुझे पढ़कर अच्छा लगा या कुछ भी जो फील किया हो आपने इस पोस्ट को पढ़कर तो मुझे भी ख़ुशी होगी के मेरी मेहनत बेकार नहीं हुई | मेरा वादा मैं और भी कुछ इस तरह के अपडेट आगे भी करूँगा जो सबको कहीं न कहीं समझ आये और एक मौका मिले के अपने को जांच सके और हाँ अगर कहीं कोई सुधार की जरूरत है तो उसको सुधार के जीवन और सरल बना सके |

धन्यवाद।।।।।

images(74)

ना काऊ से दुश्मनी ना काऊ से बैर , चलता रह भैय्या जब तक थके ना पैर ||

 

ना ही किसी से ईर्ष्या, ना ही किसी से कोई होड़..!!!
मेरी अपनी हैं मंजिलें, मेरी अपनी ही दौड़..!!!

ये भी पढ़ें 👇

आजादी (1947) से पहले बस्ती जिला किस रियासत में था?

शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण होना चाहिए ;

शिक्षा का व्यवसायीकरण अनुचित है।

अमेरिकन गोबर , मानसिक गुलामी का परिणाम

मानव को मानव बनाना चाहिए;

जाति ही पूछो साधु की

राजनीति की झूठी कहानी पर रोए…

फटेहाल जनता के अमीर नुमाइंदे

2 thoughts on “परिस्तिथियों के हिसाब से जीना सीखें!! The Best Story.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may have missed

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.