January 25, 2021

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पाकिस्तान को सहायता देकर भारत के लिए मुसीबतें खड़ी करना चाहता है चीन:-अमेरिकी थिंकटैंक

नई दिल्ली |चीन दक्षिण एशिया के देशों में अपना दबदबा बनाना चाहता है। अगले दशक में वह इस क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मामलों में प्रभाव बनाने की कोशिशों को बढ़ाएगा। ड्रैगन पाकिस्तान को और ज्यादा सहयोग बढ़ाकर भारत के लिए मुसीबतें पैदा करना चाहता है।

मौजूदा हालात और चीन की नीतियों पर अमेरिका के थिक टैंक ‘यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से चीन इस क्षेत्र को अपने अनुरूप आकार देने का प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट में अमेरिका को सलाह दी गई है कि वह इस क्षेत्र को सर्वोच्च वरीयता पर रखते हुए अपनी सफल योजनाओं को अंजाम दे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-चीन सीमा बड़ा मुद्दा बना रहेगा। इस कारण चीन और भारत दोनों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रतिस्पद्र्धा बनी रहेगी। चीन अपने आर्थिक हितों के लिए समुद्र में भी ताकत को बढ़ा रहा है।ज्ञात हो कि दक्षिण एशियाई देशों में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव भूटान प्रमुख रूप से माने जाते हैं।

इस अध्ययन में वरिष्ठ विशेषज्ञ, योजनाकार और रिटायर राजनयिक शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान के बीच संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। उसका प्रभाव पाकिस्तान की सरकार, प्रशासन के साथ ही आर्थिक नीतियों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। चीन भारत और पाक के विवाद में भी पाकिस्तान की तरफदारी के लिए बराबर रुचि दिखा रहा है। विशेषतौर पर पिछले साल से चीन ने कश्मीर के मसले पर तटस्थता से आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान को अपना समर्थन दोगुना बढ़ा दिया है। चीन भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति बनाकर भारत को ऐसी स्थिति में लाना चाहता है, जिसमें उसे दो तरफा संघर्ष की स्थिति बनी दिखाई दे। इस रणनीति से भारत के संसाधन और ध्यान बंटा रहेगा और भारत के लिए मुसीबतें खड़ी रहेंगीं।

चीन-पाकिस्तान की सीमाओं पर नजर रखेगी ‘आकाश में आंख’

स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए एक प्रमुख बढ़ावा देने के लिए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) छह नए एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमानों ‘आकाश में आंख’ को बनाने जा रहा है। इनके लिए एयर इंडिया के विमान का उपयोग किया जाएगा। इन नए एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम से वायुसेना की ताकत बढ़ेगी और चीन व पाकिस्तान की सीमाओं पर निगरानी रखने की उसकी क्षमताओं में वृद्धि होगी।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि 10,500 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत डीआरडीओ द्वारा एईडब्ल्यूएंडसी ब्लॉक-2 विमान को विकसित किया जाना है। इसके लिए एयर इंडिया से छह विमानों को लेने जा रही है। इन विमानों को रडार के साथ उड़ने के लिए तैयार किया जाएगा। जो सुरक्षा बलों को 360 डिग्री निगरानी की क्षमता प्रदान कर सकें। सरकार से उम्मीद है कि वह जल्द ही इस परियोजना को मंजूरी दे देगी। सूत्रों ने कहा कि परियोजना को मेक इन इंडिया के तहत बढ़ावा देने के लिए योजना तैयार की है। डीआरडीओ ने पहले छह नए एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवॉक्स) को एयरबस 330 एयरक्राफ्ट पर विकसित करने का फैसला किया था, जिसके लिए बेंगलुरु में सुविधाएं तैयार की जा रही थीं।

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