December 3, 2020

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

पाकिस्तान में बवाल ही बवाल, चुप्पी साधे बैठी इमरान खान सरकार

पाकिस्तान (Pakistan) का कोई भी प्रधानमंत्री (Prime Minister) हो वह अपनी सरकार चलाने से ज़्यादा सरकार बचाने के लिए काम करता है. देश में कब तख्तापलट हो जाए और प्रधानमंत्री की कुर्सी रातोंरात हाथ से निकल जाए इसकी चिंता हर प्रधानमंत्री को होती है. इमरान खान (Imran Khan) सरकार भी इसी राह पर चलते हुए नज़र आ रहे हैं.

पाकिस्तान (Pakistan) में इमरान खान सरकार (Imran Khan Govt) पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, पड़ोसी देश में एक बार फिर तख्तापलट की आशंका बढ़ गई है. इमरान खान की सरकार कशमकश में है वह चाहते हुए भी हालात पर काबू नहीं पा पा रही है. देश की सेना (Pakistan Army) और पुलिस (Sindh Police) आमने-सामने आ चुकी हैं. एक दूसरे को लाठीयों से पीटा जा रहा है और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं घट रही हैं. कुछ मीडिया रिपोर्टों की मानें तो अब तक पुलिस और सेना के 10 से अधिक जवानों की मौतें (Karachi violence In Pakistan) भी हो गई हैं. इमरान खान की सरकार मुश्किल की स्थिति में है वह डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में ज़रूर है लेकिन स्थिति अभी तक काबू से बाहर ही नज़र आ रही है. पाकिस्तान में सेना और पुलिस का टकराव कोई नयी बात नहीं है लेकिन इस बार मामला बहुत गर्म नज़र आ रहा है. हाल में सिर्फ पुलिस और सेना के बीच ही नहीं बल्कि देश में कई तरह के विवाद पैदा हो चुके हैं जिसपर इमरान (Imran Khan) सरकार ने सिर्फ चुप्पी ही साधे रखा है.पिछले महीने पाकिस्तान में मुस्लिम धर्म (Muslim)के दो बड़े गुट शिया (Shia Muslims In Pakistan) और सुन्नी समुदाय के बीच बहुत गर्म माहोल हो चुका था. दरअसल कोरोना संक्रमण (Coronavirus Pandemic) के खतरे के बावजूद इमरान सरकार ने शिया समुदाय के लोगों को मोहर्रम (Muharram) के जुलूस में भीड़ जुटाने की परमीशन दे दी थी.

Pakistan, Karachi, Imran Khan, Qamar Javed Bajwa, Maryam Nawazविपक्ष के एकजुट होने से पाकिस्तान में गृह युद्ध की स्थिति हो गई है

सुन्नी गुट इसका विरोध कर रहे थे. जिन्होंने मोहर्रम के पहले 10 दिन बीत जाने के बाद ही एक बहुत बड़ी रैली कर शियों के विरुद्ध नारेबाजी की थी और खुलेआम चेतावनी दी थी कि चेहलुम के मौके पर किसी भी तरीके का जुलूस शिया समुदाय की ओर से न निकाले जाएं वरना देश में माहोल बिगड़ जाएगा.शिया समुदाय ने इस चेतावनी को रद करते हुए चेहलुम के मौके पर बहुत बड़ा जुलूस निकाल दिया जिसमें लाखों लोग शामिल हो गए इससे दोनों समुदाय के बीच तल्खियां और बढ़ गई.

इमरान सरकार के पास इस स्थिति से निपटने का कोई रास्ता नहीं था वह किसी भी समुदाय के साथ खुलकर खड़ी नहीं हो सकती थी तो सरकार ने चुप्पी ही साधे रखी थी. यह विवाद अभी चल ही रहा था कि पाकिस्तान एक और बड़े विवाद की आग में झुलस गया. ताजा मामला कुछ राजनीति से प्रेरित है, दरअसल हाल ही में पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने एक रैली आयोजित कर इमरान सरकार को घेरा था. इस रैली के खत्म होते ही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद सफदर अवान को रातोंरात होटल से गिरफ्तार कर लिया गया था.

राजनीतिक माहोल गर्म होते देख अगले ही दिन उन्हें छोड़ दिया गया. इसके बाद सिंध प्रांत के पूर्व गवर्नर मोहम्मद जुबैर ने बहुत बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि सफदर की गिरफ्तारी के लिए राज्य के पुलिस चीफ का अपहरण कर लिया गया था ताकि उनसे जबरन सफदर की गिरफ्तारी के वारंट पर हस्ताक्षर कराया जा सके. इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में गुस्सा पैदा हो गया और अपने आलाधिकारियों के प्रति असम्मान की बात कहते हुए विराध दर्ज कराया।

इसी विरोध के चलते सिंध पुलिस के सभी बड़े पुलिस अफसर छुट्टी पर चले गए हैं. सिंध पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि छुट्टी पर जाने का फैसला उनका विरोध दर्ज कराने के लिए है अगर पुलिस के साथ ऐसे ही असम्मान जारी रहा तो सारे पुलिसकर्मी एक साथ इस्तीफा देने को भी तैयार हैं.इस पूरे मामले पर सरकार चुप्पी साधे हुए है और हकीकत भी सामने लाने से बच रही है. इसीलिए सरकार के इशारे पर ही देश के मीडिया ने इस पूरे मामले को दबा कर ही रखा है.

सेना के चीफ कमर जावेद बाजवा ने कहा कि हम इसकी जांच करेंगे. जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान में जब भी सेना किसी से खुले तौर पर टकराती है तो उसको पाकिस्तान सरकार का समर्थन मिल ही जाता है. पाकिस्तान की कोई भी सरकार हो वह सेना को साथ ही लेकर चलती है और हरसंभव उसी को समर्थन देती है. कहते हैं कि अगर पाकिस्तान की सरकार सेना के खिलाफ बोलती है या सेना की गलती निकालती है तो वह तख्तापलट को दावत दे देती है.

पाकिस्तान में तख्तापलट होना कोई नयी बात नहीं है. इमरान सरकार खतरे को देख खुद की सरकार बचाने में जुटी हुयी है जबकि पाकिस्तान के हालात दिनबदिन खराब होते ही जा रहे हैं. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, तंगहाली, और कर्ज से देश के नागरिकों में हाहाकार मचा हुआ है. इमरान सरकार ने जनता को जो सपने दिखाए थे उनमें से अधिकांश बातें हवाहवाई ही साबित हुयी है.

इमरान सरकार का रवैया कैसा होगा और यह हालात काबू में कैसे आएंगे इसकी जानकारी अभी खुद इमरान खान को ही नहीं होगी. लेकिन इमरान खान ने अगर देरी बरती तो देश के अन्य राज्यों में भी हालात खराब होना शुरू हो जाएगा और फिर इमरान खान अपनी सरकार को बचाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाकर भी नाकाम ही रहेंगे.

पाकिस्तान में पुलिस का फौज-आईएसआई के खिलाफ मोर्चा खोलना इमरान खान की तबाही है

पाकिस्तान (Pakistan) में प्रधानमंत्री इमरान खान के ऊपर संकट के बादल गहरा गए हैं. मुल्क के हालात ख़राब हैं. पुलिस, सेना (Pakistan Army) और आईएसआई के खिलाफ आ गयी है पाकिस्तान की राजनीति में जैसे समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं इमरान खान (PM Imran Khan) की गद्दी किसी भी क्षण जा सकती है.

पाकिस्तान (Pakistan) कमाल का पड़ोसी देश है, जो किसी मुल्क में नहीं होता, वो वहां होता है. पाकिस्तान इस वक्त जिस आग में झुलसा हुआ है, वह आग सियासी नहीं, बल्कि कुछ और है? हालात ऐसे बन गए हैं कि अब सुरक्षा के लोग ही आपस में बगावत पर उतर आए हैं. दोनों ओर से तड़ातड़ गोलियां बरसाई जा रही हैं. मौजूदा इमरान सरकार मौन है. उनकी मौनता को ललकारते हुए पीएमएल नेता मरियम नवाज (Mariyam Nawaz) ने चूडिंयां भेजने को कह दिया है. बीते एकाध दिनों से पाकिस्तान की सड़कें विद्रोह की लपटों में सुलग रही हैं. ये विद्रोह जनता का नहीं, बल्कि सुरक्षा सिस्टम से जुड़े लोगों के बीच हो रहा है. राजनीतिक दलों के लोगों को तो हमने सार्वजनिक रूप से चाक-चैहराहों, गली, सड़कों आदि जगहों पर लड़ते देखा था, लेकिन ऐसा पहली मर्तबा देखने को मिल रहा है जब सुरक्षा से जुड़ा अमला ही आमने-सामने आकर एक दूसरे के खून का प्यासा है. कराची (Karachi) में तीन दिनों से सिंध पुलिस (Sindh Police) ने अपनी सेना और आईएसआई के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. मोर्चे की आड़ में भारी विद्रोह है. फ़ायरिंग, आगजनी और जमकर तोड़ फोड़ हो रही है.

Pakistan, Imran Khan, Prime Minister, Maryam Nawaz, Bilawal Bhuttoपाकिस्तान में हालात बद से बदतर हैं जो किसी भी वक़्त इमरान खान की गद्दी छीन सकते हैं

पुलिस का विद्रोह जब पाकिस्तानी सेना के बर्दाश्त से बाहर हुआ तो फ़ायरिंग करनी शुरू कर दी जिसमें सिंध पुलिस के दर्जन भर से ज्यादा पुलिस अधिकारी मारे गए. तनातनी के बाद पुलिस के कुछ बड़े अधिकारी को आईएसआई ने जबरन कैद कर लिया, जिससे पुलिस विभाग और भड़क गया, पाकिस्तान के लोग इस वक्त तीन धड़ों में बटें हुए हैं. कुछ पुलिस के पक्ष में हैं, तो कुछ सेना और आईएसआई के समर्थन में.

मध्यम और गरीब वर्ग पुलिस के साथ है.आतंकियों के समर्थक लोग सेना-आईएसआई का साथ दे रहे हैं. कराची की सड़कों पर आधी रात के समय भी लोग प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सेना के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगा रहे हैं. इमरान खान का झुकाव फिलहाल सेना की ही और है. सभी को पता है कि पाकिस्तान की हुक़ूमत बिना सेना-आईएसआई के बिना नहीं चल सकती. वहां का प्रधानमंत्री सेना-आईएसआई का पुतला मात्र होता है.

कोई भी फैसला उनके इजाज़त के बिना नहीं ले सकता. अगर कोई जुर्रत भी करता है तो वहां की फौज सरकार का तख्तापलट करने में देर नहीं करती. इसलिए ना चाहते हुए भी इमरान खान पुलिस का पक्ष नहीं ले पा रहे. इमरान के इस रवैये से माहौल और गरमा गया है. कुल मिलाकर इमरान खान सरकार इस वक्त चारों तरफ से घिर चुकी है. हिंदुओं का धर्मांतरण का मसला भी गर्म है.

धर्मांंतरण को लेकर पिछले माह सरकार ने सीनेटर अनवारूल हक काकर की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया था जिसे हिंदुओं का धर्मांतरण की सच्चाई की जांच करनी थी. परसों आयोग ने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की तो सरकार घिर गई. आयोग की जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन किया जाता है. वहां लंबे समय से चले रहे अत्याचार और धर्मांतरण के मामले पर अब पाकिस्तान संसद ने भी मुहर लगा दी है.

संसदीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के हिंदु संगठनों ने भी सरकार के खिलाफ हंगामा काटना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान के सिंध इलाके में बीते एकाध वर्षों में सबसे ज्यादा धर्मांतरण के केस दर्ज हुए. जहां हिंदु लड़कियों को जबरन मुस्लिम बनाया गया. संसार भर में पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां मानव अधिकारों का खुले आम अलंघन होता है इसकी ताजा तस्वीर बीते मंगलवार को कराची में देखने को मिली.

सेना के खिलाफ नारेबाज़ी कर रही महिलाओं और बच्चों पर सेना ने बख्तरबंद वाहन चढ़ दिए जिसमें कई बच्चों और महिलाएं कुचल कर मर गईं. घायलों को अस्पतालों में भी भर्ती नहीं कराया गया. बच्चों ने तड़फ-तड़फ कर दम तोड़े दिए. पुलिस-सेना के बीच फैले विद्रोह में समूचा पाकिस्तान जल रहा है. शाॅपिंग माॅल, दुकानें, स्कूल-काॅलेज, सिनेमा हाॅल, बाजारें सभी बंद हैं. सेना के सिंध पुलिस पर गोलियां चलाने के बाद कराची में भीड़ इस कदर उग्र है जिसे सरकार को संभालना मुश्किल होता जा रहा है.

वहां की मीडिया पर भी सेना ने कब्ज़ा कर लिया है ताकि उनके खिलाफ कोई खबर बाहर न जा सके. सेना की समीक्षा के बिना कोई भी मीडिया हाउस खबर प्रसारित नहीं कर सकता। कुछ पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया है. पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर भारत सरकार की भी पैनी नजर बनीं हुई है. इस्लामाबाद स्थिति अपने दूतावास के अधिकारियों और कर्मचारियों का अलर्ट पर रहने को कह दिया है.

दरअसल, बुधवार को वहां माहौल और खराब हो गया, जब सेना और सिंध पुलिस के बीच क्रॉस फ़ायरिंग में बड़ी संख्या में पाक सेना के जवानों की मौत हुई. पुलिस की एकजुटता को देखते हुए आईएसआई और फौज के हाथ पावं फूले हुए हैं. पूरे पाकिस्तान की पुलिस फौज के खिलाफ अंतिम लड़ाई के लिए कमर कस चुकी है. नवाज शरीफ के दामाद की अरेस्टिंग के बाद भी स्थिति बे काबू में है. उनके समर्थक भी इमरान सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं.

सेना-पुलिस के बीच उग्र आंदोलन लंबा चलेगा. संगर, घोटकी, सक्कर, खैरपुर, पूरनपुर, मीरपुर खास, और खैबर पख्तूनख्वा ऐसे क्षेत्र ग्रामीण और कस्बाई आबादी हैं जहां के लोग पुलिस का खुलकर साथ दे रहे हैं. महिलाएं, बच्चे, बूढे सभी लोग रातों में भी सड़कों पर हैं. चारों तरफ सेना और पुलिस के बीच फायरिंग हो रही है बावजूद इसके लोग डटे हुए हैं. सेना की फ़ायरिंग में सिंध पुलिस के दस टाॅप पुलिस अधिकारी मारे जाने के बाद आम पाकिस्तानियों में भयंकर आक्रोश उत्पन्न है.

कराची की सड़कों पर आधी रात तक लोग तोड़ फोड़, आगजनी करते रहे. गुस्साए लोग सेना प्रमुख बाजवा के भाई के आलीशान शॉपिंग मॉल में भी आगजनी कर दुकानों में तोड़ फोड़ की. फैले विद्रोह को शांत कराने के लिए इमरान खाने चीन का सहयोग मांगा है. लेकिन चीन ने अंदरूनी मसला कहके अपना पल्लाझाड़ लिया है.

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