June 18, 2021

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प्यास से तड़पकर मासूम ने तोड़ा दम,नेता कर रहे आरोप प्रत्यारोप

जालोर|राजस्थान (Rajasthan) के जालोर (Jalore) ज़िले में पानी नहीं मिलने से पांच साल की मासूम बच्ची की मौत (Death) के मामले में सियासत गरमा गई है.

भाजपा (BJP) ने इस मामले को लेकर गहलोत सरकार को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है. प्रदेश से लेकर केंद्र सरकार तक के मंत्री गहलोत सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने आज राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Government) को आड़े हाथ लिया.

सोनिया-राहुल-प्रियंका चुप क्यों?: जावड़ेकर
एक तीर से कई निशाना साधते हुए जावड़ेकर ने कहा कि 9 घंटे तक पीने का पानी न मिलने के कारण हुई एक बच्ची की मृत्यु, बेहद शर्मनाक घटना है. इसके लिए राजस्थान सरकार ज़िम्मेदार है. उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि अब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चुप क्यों हैं ?’

 

जनता कभी माफ़ नहीं करेगी: पूनिया
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने कहा, ‘मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी के सियासी भाषणों पर भूख, प्यास और मौत भारी है. दुर्भाग्य है कि अब तक की नकारा निकम्मी और भ्रष्ट कांग्रेस सरकार ने राजस्थान को भूख, बेरोजगारी, अराजकता, माफियाओं और अपराधों की जमीन बना दिया है. राज्य की जनता आपको कभी माफ़ नहीं करेगी.

 

राज्य के जल प्रबंधन पर सवालिया निशान: राठौड़ 
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathor) ने कहा, ‘इस आधुनिक युग में जब विज्ञान चांद तक की यात्रा सुगमता से कर रहा है, ऐसे में जालोर के रानीवाड़ा में पानी की कमी से तड़पती मासूम की प्यास से मौत होने की घटना हृदयविदारक और दुर्भाग्यपूर्ण है और राज्य सरकार के जल प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा रही है.’

 

जालोर के रानीवाड़ा क्षेत्र में रविवार को हुई घटना
दरअसल, जालोर में कड़ी धूप में नानी के साथ पैदल चल रही पांच वर्षीय बच्ची को पानी नहीं मिलने के कारण मौत होने का मामला सामने आया है. यह घटना रविवार की है. जानकारी के मुताबिक, रानीवाड़ा तहसील अंतर्गत डूंगरी निवासी वृद्ध महिला सुखीदेवी का सिरोही जिले के मंडार के समीप रायपुर में पीहर है. सुखीदेवी अपनी पांच वर्षीय नातिन (दोहिती) के साथ पीहर गई थी.

 

रविवार 6 जून को सुबह मौसम ठंडा देखकर पांच वर्षीय नातिन के साथ वापस बहन के पास जाने के लिए पैदल ही रवाना हो गई. करीब दस बारह किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी, इस दौरान दोपहर में तापमान पारा बढ़ गया था और मौसम उमस भरा हो गया था. वृद्धा के पास पानी की बोतल भी नहीं थी और जिस मार्ग से गुजर रही थी, वह भी रेतीला कच्चा मार्ग था. तेज गर्मी के कारण और पानी नहीं मिलने से वृद्धा और बच्ची को डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई और दोनों बेहोश होकर गिर पड़े.

 

मदद के लिए दौड़े चरवाहे
काफी देर बाद वहां किसी चरवाहे ने महिला को देखा तो सूरजवाड़ा सरपंच कृष्णकुमार पुरोहित को फोन किया. बाद में पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्ची का दम टूट चुका था. महिला को पुलिस ने पानी पिलाया और बाद में उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया है.

 

बारिश की बूंदों ने वृद्धा को बचाया
महिला ने आपबीती बताते हुए कहा कि तेज गर्मी के कारण दोनों बेहोश होकर गिर गए थे. उसे कुछ नहीं सूझ रहा था, लेकिन काफी देर बाद आसमान हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, जिससे उसे कुछ राहत मिल गई और उसकी जान बच गई, लेकिन तब तक उसकी नातिन की मौत हो चुकी थी.

यह है पूरा मामला 

रानीवाड़ा तहसील के डूंगरी गांव की निवासी बुजुर्ग महिला सुखीदेवी को सिरोही जिले के मंडार के पास अपने मायके जाना था. 6 जून, रविवार को वह ठंडा मौसम देखकर अपनी 5 साल की नातिन के साथ पैदल ही मायके की ओर चल पड़ी. करीब 10-12 किलोमीटर चलने के बाद गर्मी तेज हो गई. बच्‍ची को प्‍यास लगी लेकिन उनके पास पानी नहीं था.

 

महिला की हालत बेहतर 

रानीवाड़ा के एसडीओ प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने कहा है कि यह मामला रविवार का है. मृत बच्‍ची के पास उसकी नानी बेहोश मिली थी. महिला की हालत अब बेहतर है.

 

देवदूत बन आई पुलिस
अंजली को आंखों के सामने दम तोड़ते देखने के बाद सुखीदेवी के लिए भी जीने उम्मीद खत्म हो चुकी थी। इस बीच किसी चरवाहे की सूचना पर 9 घंटे बाद रविवार शाम 5 बजे पुलिस पहुंची और पानी नसीब हुआ। इसके बाद इलाज मिल सका।

शॉर्टकट रास्ता चुना
लॉकडाउन की वजह से अभी आने-जाने के साधन नहीं हैं। रायपुर से 22 किलोमीटर दूर डूंगरी जाने के लिए सुखीदेवी ने 15 किमी का शॉर्टकट रास्ता चुना।

वीरान रेगिस्तानी क्षेत्र
जिस रास्ते से दोनों निकलीं, वह रेतीले धोरों वाला वीरान क्षेत्र है। दूसरी ओर सुंधा माता का पहाड़ी क्षेत्र है। यहां न तो खेती-बाड़ी होती है न रास्ता और न ही और कोई आने-जाने वाला।

45 डिग्री की गर्मी
दोनों सफर तो सुबह 8 बजे शुरू किया, लेकिन दोपहर होते-होते 45 डिग्री की गर्मी में आसमान और रेतीली धरती आग उगलने लगी थी। दोपहर एक बजे तक 7 किमी चलने के बाद दोनों निढाल होकर गिर पड़ीं।

साथ में पानी नहीं था
इतने लंबे सफर पर पैदल निकलने से पहले साथ में पानी नहीं रखा था। सुबह 8 बजे आखिरी बार पानी पीया था। संभवत: दोनों ने खाना भी नहीं खा रखा था।

न छांव न आसरा
इस वीराने इलाके में तेज गर्मी से बचने के लिए कहीं छांव तक नहीं मिली। इक्का-दुक्का झाड़ियां थीं, जो छांव देने लायक नहीं। सात किमी के सफर के दौरान 5 किमी के दायरे में कहीं पानी का इंतजाम नहीं था।

एक किमी दूर पानी था
घटनास्थल से दोनों यदि एक किमी आगे और चल जातीं तो शायद दोनों की जान बच जाती। क्योंकि एक किमी आगे कृषि कुएं हैं और करीब दो किमी दूर छितराई आबादी में मदद मिल सकती थी।

नाते गई मां चार महीने पहले विधवा नानी के पास छोड़ गई थी अंजली को
नातिन अंजली को उसकी मां चार महीने पहले विधवा नानी के पास छोड़ गई थी। उसने नाता विवाह कर लिया है। दो बड़े भाई पहले वाले पिता के पास रानीवाड़ा खुर्द में रहते हैं। अंजली तभी से नानी के पास ही रहती है। बता दें कि नानी सुखीदेवी भी अपने पीहर रायपुर (सिरोही) में रहती है। ससुराल डूंगरी (जालोर) में कभी-कभी देखरेख के लिए आती है। 15 दिन पहले भी डूंगरी आई थी।

तड़प-तड़क कर दम तोड़ गई अंजली, व्याकुल नानी यह देख बेसुध हो गई
प्यास से व्याकुल सुखीदेवी तो खुद को मजबूत दिखाती रही, लेकिन मासूम अंजली प्यास से बेहाल हाे चुकी थी। वह बार-बार पानी की मांग कर रही थी लेकिन बेबस सुखी देवी करती भी तो क्या? मासूम को इस विकट सफर में साथ लाने की भूल कर चुकी सुखीदेवी साथ में पानी भी नहीं लाई थी।

प्यास से तड़प-तड़क कर अंजली ने आंखों के सामने दम तोड़ दिया। यह देख सुखीदेवी बेसुध हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक एक से डेढ़ घंटे पहले रेस्क्यू नहीं हुआ तो सुखीदेवी की भी मौत हो जाती। डॉक्टरों के मुताबिक वृद्धा ने एक चरवाहे से पानी मांगा था, लेकिन उसने नहीं पिलाया।

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