July 7, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती;

लक्ष्मण राव – जब भी किसी चायवाले का जिक्र होता है तो ज़हन में उसकी यही तस्वीर उभरती है कि चाय बेचनेवाला हर शख्स गरीब और अनपढ़ होता है लेकिन ये बिल्कुल भी सच नहीं हैं. हमारे देश के प्रधानमंत्री भी कभी चाय बेचा करते थे लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा से ये साबित कर दिया कि एक चाय बेचनेवाला व्यक्ति चाहे तो क्या नहीं कर सकता. नरेंंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कई ऐसी प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं. देश के मिसाईल  मैन भारत रत्न से सम्मानित डा एपीजे अब्दुल कलाम कभी अखबार बेचते थे।और जिनमें से एक कहानी है राजधानी दिल्ली के एक चायवाले की, जो हर रोज़ सड़क के किनारे चाय बनाकर बेचता है लेकिन साहित्य लेखन के प्रति उसके जज्बे और हौंसले ने इस कदर प्रेरित किया कि उसने एक या दो नहीं बल्कि 24 किताबें लिख डाली.




राजधानी दिल्ली में बेचते हैं चाय महाराष्ट्र के अमरावती में जन्में लक्ष्मण राव पिछले कई सालों से दिल्ली के हिंदी भवन के बाहर अपनी छोटी सी चाय की दुकान लगा रहे हैं. आपको बता दें कि सड़के के किनारे सालों से चाय बेचनेवाले लक्ष्मण राव साहित्य के बड़े प्रेमी भी हैं. पिछले 40 सालों से साहित्य की सेवा में खुद को समर्पित करनेवाले लक्ष्मण राव का कहना है कि साहित्य उनका शौक है और चाय बेचना उनका रोज़गार इसलिए वो जहां चाय बेचते हैं वहीं पर अपनी किताबें भी बेचते हैं.


अब तक लिख चुके हैं 24 किताबें आपको बता दें कि लक्ष्मण राव सड़क के किनारे चाय बेचते हुए अब तक 24 किताबें लिख चुके हैं. जिसमें से उनकी 12 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और 6 किताबों का प्रकाशन दो बार हो चुका है. साहित्य लेखन की प्रेरणा उन्हें अपने गांव से ही मिली थी. लक्ष्मण राव के मुताबिक उनके गांव में एक छोटा सा लड़का नहाने के लिए नदी में गया था लेकिन वो वापस कभी नहीं लौटा. इस घटना के बाद से ही लक्ष्मण राव ने साहित्य के क्षेत्र में कुछ कर दिखाने का मन बना लिया. लक्ष्मण राव ने अपनी पहली कहानी नदी में डूब जानेवाले उस बच्चे के नाम पर लिखी जो कि बाद में किताब में तब्दील हो गई. बताया जाता है कि उपन्यासकार गुलशन नंदा के उपन्यास पढ़ने के बाद लक्ष्मण राव को हिन्दी से इश्क हो गया और उन्हें ही साहित्य में अपना गुरु मान लिया.


हर रोज़ पढ़ते हैं 5 अखबार किसी भी किताब को लिखने से पहले बड़े-बड़े साहित्यकारों को भी हर रोज़ घंटों तक पढ़ना पड़ता है. इसलिए लिखने के साथ-साथ दुनिया की हर खबर को जानने के लिए लक्ष्मण राव रोज़ाना कम से कम पांच अखबार पढ़ते हैं. जबकि किताबों को पढ़ने के लिए वो हर रविवार को दरियागंज जाकर किताबें खरीदते हैं और पढ़ते हैं. इसके अलावा उन्हें कई किताबें सरकारी कार्यालयों से भी मिली हैं. आपको बता दें कि लक्ष्मण राव में पढ़ाई करने का जुनून इतना ज्यादा है कि उन्होंने दिल्ली विश्व विद्यालय से बी.ए. किया फिर इग्नू से हिंदी साहित्य में एम.ए. भी कर लिया है.


पूर्व राष्ट्रपति कर चुकी हैं सम्मानित पिछले 40 सालों से साहित्य से प्यार करनेवाले और किताबें लिखनेवाले लक्ष्मण राव को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से सम्मान भी मिल चुका है. बताया जाता है कि जब वो अपनी पहली किताब को छपवाने के लिए प्रकाशकों के पास गए तो उन्होंने उनकी किताब को छापने से इंकार कर दिया. आखिरकार उन्हें एक ऐसा प्रकाशक भी मिला जिसने कहा कि उनके पास प्रतिभा है लेकिन इसके साथ ही इस प्रकाशक ने लक्ष्मण राव को पढ़ाई करने की नसीहत भी दे डाली और तब जाकर उन्होंने हिंदी साहित्य में एम.ए. तक की पढ़ाई पूरी की.


गौरतलब है कि 24 किताबें लिखने के बाद भी लक्ष्मण राव सड़क के किनारे चाय बनाकर बेचते हैं और चाय के साथ अपने द्वारा लिखे गए साहित्यों को भी लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं अब तो उनकी किताबें ऑनलाइन उपलब्ध है और बुकफेयर में भी बिकती हैं.

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