June 29, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

बंगाल में बवाल और ममता बनर्जी की मनमानी;

बंगाल में बवाल और ममता बनर्जी की मनमानी का हाल और आलम यह है कि:-

इस हकीकत के सामने, ‘सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का’

नामक यह मजेदार कहावत भी आज की डेट में तेल लेने चली गई है।

दूसरे शब्दों में कहें तो भारत का पश्चिम बंगाल प्रदेश ममता बनर्जी की मर्जी से चल रहा है।

यहाँ हालात आज इस कदर भयंकर हो चुके हैं कि अदालत को यह कहना पड़ता है कि

अगर जरूरत पड़ती है तो भारत की रक्षा के लिए कुछ भी किया जा सकता है।

भाइयों, बहनों,, अगर आप पश्चिम बंगाल की लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाली

कथित सेकुलर कुनबा वाली ममता बनर्जी को जानते हैं तो जरूर आप

उन्हें ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और निष्पक्ष राजनेता के बारे में जानते होंगे

लेकिन आज उनका यह ढोंग बेपर्दा होकर उनके नकली और गैर ईमानदार के साथ ही साथ

पक्षपाती नेता बन जाने की गवाही दे रहा है।

ममता की माया की बानगी:-
ममता की माया की बानगी यह है कि आज ममता

बनर्जी एक ऐसी बात पर अड़े रह कर खुद को महान साबित करने पर तुली हैं

जो उन्हें महान तो शायद ही बनाए पर चारों तरफ उनकी चर्चा करने के लिए काफी है।

ममता बनर्जी के संबंध में ताजा समाचार यह है कि उन्हें भारत का

आज तक का सबसे महान नेता बनने की इतनी जल्दी है कि वह आज यह भी भूल चुकी हैं कि

वह जो कर रही हैं वह किसी भी दृष्टि से कभी भी मान्य नहीं होगा।

ममता बनर्जी आज सेकुलर कुनबे की रहनुमा बनने को लेकर काफी गम्भीर हैं

शायद इसीलिए उनके तथाकथित सेकुलर साथी उर्फ नकली नेता

उनके आगे पीछे की आरती में रत्तीभर भर भी समय बर्बाद नहीं करते।

ममता बनर्जी आजकल एक ऐसे धरने पर बैठी हैं जो केवल और केवल

उन्हें केंद्र सरकार का अतार्किक विरोधी या महज विरोध के लिए विरोध करने वाला नेता

या विरोध का ढोंग करने वाला ही साबित करेगा।

इससे ज्यादा अगर कोई यह समझे कि किसी खास वर्ग के लिए

लगभग बिछ बिछ जाना ही किसी नेता को महान बनाता है तो यह महज एक भ्रम है।

हकीकत यही है कि आज आधुनिक लोकतंत्र में वही नेता

जनता की हसरतों का नेता बन पाता है जो सचमुच सब कुछ छोड़कर

देश के लिए ही जीता है और देश के लिए ही मरता है।

ममता बनर्जी और बंगाल का सच:-

ममता बनर्जी आज जिस पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री

हैं वहां एक बहुत व्यापक शारदा चिट फड घोघोटाला हुआ था।

यह सच है कि 2008 में जब इसका खुलासा हुआ तो उस समय

पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट यानी तथाकथित नकली ईमानदार

या नौटंकी वाले दलों की सरकार थी

लेकिन उसके बाद का सच यह है कि जब इस केस ने दुनिया के सामने आंखें खोलीं

तो उस समय ममता बनर्जी की सरकार थी।

भारत के आम से आम आदमी की केवल यही हसरत थी कि

तथाकथित ईमानदार की दूसरी फोटोकापी यानी ममता बनर्जी

इस केस को गरीबों का ख्याल रखते हुए जल्दी अंजाम तक पहुंचा देंगी

लेकिन हद तो तब हो गई जब देश के बच्चे बच्चे को पता चला कि

ममता ताई इस केस को हकीकत में सुलझाना नहीं उलझाना चाहती हैं।

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ममता बनर्जी देश को क्या समझती हैं:-
ममता बनर्जी को यह हकीकत में भ्रम है कि वह जो कुछ भी कर रही हैं

वह देश के सामने कभी नहीं आएगा बल्कि सच यही है कि वह आज

उस सीबीआई का विरोध कर रही हैं जो जनता के सपनों को चूर चूर करने वाले

अपराधियों को पकड़ने की जुगत में है।

प्राप्त समाचार की हकीकत यही है कि जब से शारदा चिट फंड घोटाला सामने आया है

तब से ममता सरकार के किसी न किसी खास की इसमें फंसने की संभावना रही है

जिसका प्रमाण यही है कि ममता बनर्जी ने कभी भी

इस घोटाले को बेपर्दा करने वाली मशीनरी का साथ नहीं दिया।

ममता बनर्जी ने हद तो तब की है जब अपनी राज्य पुलिस के

सबसे बड़े अफसर को बचाने के लिए खुलकर आज जमीन में लोट रही हैं।

उनका अपनी करनी छिपाने के लिए इस कदर तमाशा करना सब को समझ में आता है।

बंगाल में बवाल और ममता बनर्जी की मनमानी की हकीकत यह है कि

सीबीआई आज बंगाल में सुरक्षित नहीं है।

सीबीआई के अधिकारियों के साथ ममता बनर्जी के गुर्गों ने

जिस तरह हद से पार जाकर बदतमीज की है उसके

लिए पूरा देश ममता बनर्जी को कभी माफ नहीं कर सकता

इसके लिए भले ही वह सच में इससे भी बड़ा स्वांग भर लें जो आजकल फुल स्पीड में जारी है।

धन्यवाद

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