July 7, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

बलात्कार : आखिर क्यों होते हैं?

बलात्कार। यह लफ्ज कितना असर करता है हम पर? क्या झनझना देता है हमारे मानस के तंतुओं को या हम ऐसी खबरों को देख-सुन कर निरपेक्ष भाव से आगे बढ़ जाते हैं?

अगर हम संवेदनशील हैं तो ही खबर हमें स्पर्श करती है अन्यथा आमतौर पर यही प्रतिक्रिया होती है कि उफ, फिर वही बलात्कार की खबर? इसमें नया क्या है? अगर तरीका नया है तो खबर हमारे काम की, वरना एक स्त्री का लूटा जाना हमारे मन की धरा पर कुछ खास हलचल नहीं मचाता। बलात्कार के आए दिन सामने आते पहलुओं पर गौर किया जाए तो बलात्कार के 5 प्रमुख कारण माने जा सकते हैं।

 

पहला कारण : पुरुषों की मानसिक दुर्बलता/सामाजिक दबाव में कमी

ईश्वर ने नर और नारी की शारीरिक संरचना भिन्न इसलिए बनाई कि यह संसार आगे बढ़ सके। परिवेश में घुलती अनैतिकता और बेशर्म आचरण ने पुरुषों के मानस में स्त्री को मात्र भोग्या ही निरूपित किया है। यह आज की बात नहीं है अपितु बरसों-बरस से चली आ रही एक लिजलिजी मानसिकता है जो दिन-प्रतिदिन फैलती जा रही है।

स्त्री शरीर को लेकर बने सस्ते चुटकुलों से लेकर चौराहों पर होने वाली छिछोरी गपशप तक और इंटरनेट पर परोसे जाने वाले घटिया फोटो से लेकर हल्के बेहूदा कमेंट तक में अधिकतर पुरुषों की गिरी हुई सोच से हमारा सामना होता है।

कई बार पुरुषों का बढ़ता तनाव भी बलात्कार का कारण होता है और महिलाओं के प्रति बढ़ता अपमानजनक माहौल भी पुरुष के दुस्साहस को बढ़ाने में उत्प्रेरक का काम करता है।

हमारी सामाजिक मानसिकता भी स्वार्थी हो रही है। फलस्वरूप किसी भी मामले में हम स्वयं को शामिल नहीं करते और अपराधी में व्यापक सामाजिक स्तर पर डर नहीं बन पाता। पहली बार दामिनी/निर्भया के मामले में सामाजिक रोष प्रकट हुआ। वरना तो ना सोच बदली है ना समाज। अभी भी हालात 70 प्रतिशत तक शर्मनाक हैं।

 

क्या किया जाए : पुरुषों की परिष्कृत सोच को बढ़ावा दिया जाए।

17_year_old_girl_raped_2012604_835x547-m

जानिए बलात्कार का दूसरा कारण-नशा

यह कारण बलात्कार के 80 प्रतिशत मामलों में प्रमुख वजह बनकर उभरा है। हर छोटे-बड़े शहर में नशा इस तरह बिकता है जैसे पानी के पाऊच मिल रहे हो। शाम को आप अपने ही शहर की परिक्रमा करने निकले तो चार चौराहों के बीच पांच शराब की दुकान मिलना आम बात है।

नशा आदमी की सोच को विकृत कर देता है। उसका स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता और उसके गलत दिशा में बहकने की संभावनाएं शत-प्रतिशत बढ़ जाती है। ऐसे में कोई भी स्त्री उसे मात्र शिकार ही नजर आती है।

क्या किया जाए : नशे पर पूर्णत: प्रतिबंध

15_01_2016-5671223

तीसरा कारण : शहर के एकांत में गुंडों का अड्डा

यह कारण बलात्कार के 60 प्रतिशत केसेस में सामने आया है। हर बड़े नेता/ अधिकारी/ उद्योगपति का एक फार्म हाऊस होना आम बात है। इन फार्म हाऊस में वास्तव में क्या होता है यह किसी से छुपा नहीं है।

हर तरह के गुंडों का यह पालन केन्द्र या अय्याशी सेंटर होता है जहां गरीब और बेबस महिलाओं से लेकर ‘आगे बढ़ने की आकांक्षी’ मूर्ख बालाओं तक को पेश किया जाता है।

गांव और शहर के सूनसान खंडहरों की बरसों तक जब कोई सुध नहीं लेता है तब यह जगह आवारा और आपराधिक किस्म के लोगों की समय गुजारने की स्थली बन जाती है। फार्म हाऊस में जहां बिगड़ैल अमीरजादे इस तरह के काम को अंजाम देते हैं वहीं खंडहरों में झुग्गी बस्ती के गुंडा तत्व अपना डेरा जमाते हैं।

यह जगह पुलिस और प्रशासन से दूर जहां इन लोगों के लिए ‘सुरक्षित’ होती है वहीं एक अकेली स्त्री के लिए बेहद असुरक्षित। महिला के चीखने-पुकारने पर भी कोई मदद के लिए नहीं पहुंच सकता।

क्या किया जाए : दूरस्थ क्षेत्रों की सख्ती से जांच की जाए।

images(10)

 

चौथा कारण : प्रशासन और पुलिस की अक्षमता

वास्तव में प्रशासन और पुलिस कभी कमजोर नहीं होते। कमजोर होती है समस्या से लड़ने की उनकी इच्छा शक्ति। सभी जानते हैं कि बड़े कहे जाने वाले लोग जब आरोपों के घेरे में आते हैं तो प्रशासनिक शिथिलताएं उन्हें कटघरे के बजाय बचाव के गलियारे में ले जाती है। पु‍लिस की लाठी बेबस पर जितने जुल्म ढाती है सक्षम के सामने वही लाठी सहारा बन जाती है।

अब तक कई मामलों में कमजोर कानून से गलियां ढूंढकर अपराधी के बच निकलने के कई किस्से सामने आ चुके हैं। कई बार सबूत के आभाव में न्याय नहीं मिलता और अपराधी छूट जाता है। कई बार हम पढ़ते/सुनते हैं कि बलात्कार का आरोपी इसी अपराध के लिए पहले भी पकड़ा जा चुका है/जेल जा चुका है और वह फिर वही कृत्य कर रहा है।

इसका मतलब साफ है कि बलात्कार के लिए सजा देने के लिए कानून जरूरी रूप से सशक्त नहीं है, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। हालांकि पिछले दिनों सरकार ने बलात्कार के कानून के मजबूत बनाने की पहल शुरू की है, लेकिन इससे पहले कई पीड़ितों को इंसाफ का इंतजार है। कमजोर कानून और इंसाफ मिलने में देर यह भी बलात्कार की घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

क्या किया जाए : बलात्कार के सभी केस फास्ट ट्रेक अदालत में सुलझाए जाएं।

images(12)

 

पांचवां कारण : महिला का कमजोर आत्मविश्वास

एक महिला को अपनी सुरक्षा और बचाव के हर तरह के उपाय आने चाहिए। हमारी संस्कृति लड़कियों की परवरिश कुछ इस तरह करती है कि वह निर्भर बनती चली जा‍ती है जबकि हमें अपनी बेटियों को निडर बनाना चाहिए।

उसे शारीरिक रूप से तो सबल बनाना ही चाहिए। मन से भी उसे मजबूती देना चाहिए। विपरीत हालातों से जूझने की ट्रेनिंग उसे बचपन से मिलनी चाहिए।

अकेली महिला अगर डरी-सहमी हो तो उसे परेशान करने की कई गुना संभावना बढ़ जाती है। अकेली महिला की बॉडी लैंग्वेज हमेशा आत्मविश्वास से भरपूर होना चाहिए। अगर भीतर से असुरक्षित महसूस करें तब भी अपनी बेचैनी से उसे जाहिर ना होने दें।

कोई भी पुरुष महिला के आत्मविश्वास से टक्कर नहीं ले सकता। अव्वल तो अकेले कहीं जाना बहादूरी का काम नहीं है। स्वयं की सुरक्षा के लिए अगर काम जल्दी यानी दिन में निपटा लिए जाएं तो कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अगर जाना मजबूरी है तो फिर सावधानी बरतना आवश्यक है।

 

क्या किया जाए : किसी परेशानी में फंस ही जाए तो पर्स में लाल मिर्च का स्प्रै/ पाउडर या ब्लेड जरूर रखें।

images(11)

Save Girl Child

अगर आपको लेख अच्छा लगे तो शेयर अवश्य करें:-

FB_IMG_1536681028091

अशोक कुमार वर्मा ( ब्लागर)

 

 

ये भी पढ़ें 👇

बलात्कार-मुक्त समाज हम बना तो सकते हैं, लेकिन उसकी शुरुआत कैसे और कहां से हो?

देश और समाज पर दो तरफा हमले;

पति पत्नी और वो

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may have missed

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.