January 20, 2021

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सच के साथ – समाचार

बस्ती। हौसले बुलंद और कुछ कर गुजरने की चाह हो तो मुश्किल राह भी आसान हो जाती है। ऐसा ही मुकाम बस्ती की अनुश्री ने हासिल की है। शहर के गांधीनगर में राकेश कुमार श्रीवास्तव के घर जन्मी अनुश्री के कदम अंतरिक्ष छूने को बेताब हैं। इसके लिए उसने नासा के मॉर्स आर्टिकिल रिसर्च सेंटर में कठिन प्रशिक्षण लिया, मगर यह प्रशिक्षण बीच में ही छोड़कर अनुश्री इंग्लैंड के मिल्टन सिटी में माइक्रो अस्ट्रालोजी में रिसर्च करने चली गईं।

 

Anushree scientist
नॉर्थ पोल में प्रशिक्षण के दौरान बस्ती की अनुश्री

 

यूं तो अनु ने दो साल का अंतरिक्ष यात्रा का प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है, मगर अभी उसे चार साल के प्रशिक्षण की जरूरत है। रिसर्च पूरा करने के बाद वह नासा में प्रशिक्षण हासिल करेगी। उसका कहना है यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो यह मौका उसे जरूर मिलेगा।
अनुश्री के पिता राकेश कुमार श्रीवास्तव लखनऊ में रेलवे के डीआरएम कार्यालय में सीनियर सेक्शन ऑफिसर हैं। उनकी माता सुनीता गृहिणी हैं।

 

 

हालांकि, अनुश्री को परिवार के लोग आईएएस बनाना चाहते थे। इसी तैयारी भी वह कर रही थी। इसी बीच वर्ष-2003 में कल्पना चावला की अंतरिक्ष यात्रा से लौटते वकत् हुई मौत ने उसे झकझोर कर रख दिया। अनुश्री का कहना है कि सिविल सर्विसेज की तैयारी के दौरान उसके हाथ एक पुस्तक लगी, जो मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश विषय पर आधारित थी।

 

 

इसने उसके मनोमस्तिष्क पर ऐसा प्रभाव डाला कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी बीच में छोड़कर अंतरिक्ष में जाने के सपने बुनने लगी। परास्नातक के बाद अनुश्री ने बायो टेक्नोलॉजी का शार्ट टर्म प्रशिक्षण लेकर अपने जीवन की दिशा मोड़ दी। इसी बीच इंग्लैंड की एक निजी संस्था एमएससी ने ऑफर दिया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। वहां पढ़ाई के दौरान अमेरिका की एक निजी कंपनी ने मंगल ग्रह अभियान के तहत रेगिस्तान में प्रशिक्षण के लिए अनुश्री का चयन किया।

 

 

यहां अनुश्री के अलावा सात अन्य देशों के प्रशिक्षणार्थियों को मंगल ग्रह के वातावरण में रहने का प्रशिक्षण दिया गया।
अनुश्री बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान तमाम कठिन स्थितियों से गुजारा जाता है, जिससे संकट के समय उन स्थितियों का सामना आसानी से किया जा सके। दो माह नार्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के करीब प्रशिक्षण दिया गया, जहां दो माह तक कभी रात नहीं हुई।

 

यही नहीं इंग्लैंड में मंगल ग्रह संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग के लिए धरती के 1.1 किमी नीचे नकल की खदान में पंद्रह दिन का प्रशिक्षण मिला है। उनका जीवन अब मंगल ग्रह पर जीवन की खोज को समर्पित है। अप्रैल-2018 में नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर मैरी लैंड स्टेट में भी चार माह का प्रशिक्षण लिया है।

 

 

उसका कहना है कि मिशन अंतरिक्ष यात्रा का सफर अभी लंबा है, मगर मंगल ग्रह के इस अभियान में खुद की भागीदारी के प्रति आश्वस्त हूं। इंग्लैंड से रिसर्च पूरा करने के बाद वह फिर से मिशन अंतरिक्ष यात्रा के प्रशिक्षण को नासा के मार्स ऑर्टिकिल रिसर्च सेंटर जाएंगी।

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