February 26, 2021

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बस्ती:परिनिर्वाण दिवस पर याद किये गये महात्मा कबीर,कबीर साहित्य सेवा संस्थान द्वारा कचहरी परिसर में संगोष्ठी का हुआ आयोजन

परिनिर्वाण दिवस पर याद किये गये महात्मा कबीर,कबीर साहित्य सेवा संस्थान द्वारा कचहरी परिसर में संगोष्ठी का हुआ आयोजन

बस्ती। महात्मा कबीर के परिनिर्वाण दिवस पर मंगलवार को कबीर साहित्य सेवा संस्थान द्वारा कचहरी परिसर में संगोष्ठी का आयोजन कर उन्हें याद किया गया।

मुख्य अतिथि डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हिन्दी साहित्य के 1200 वर्षों के इतिहास में गोस्वामी तुलसीदास जी के अतिरिक्त इतना प्रतिभाशाली व्यक्तित्व किसी कवि का नहीं है। कबीर हिंदी साहित्य के महिमामण्डित व्यक्तित्व हैं।

कबीर के जन्म के संबंध में अनेक किंवदन्तियाँ हैं। कुछ लोगों के अनुसार वे रामानन्द स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से पैदा हुए थे, जिसको भूल से रामानंद जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था।

ब्राह्मणी उस नवजात शिशु को लहरतारा ताल के पास फेंक आयी। उन्होंने स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, मुँह से भाखे और उनके शिष्यों ने उसे लिख लिया। आप के समस्त विचारों में रामनाम की महिमा प्रतिध्वनित होती है।

वे एक ही ईश्वर को मानते थे और कर्मकाण्ड के घोर विरोधी थे। अवतार, मूर्ति, रोजा, ईद, मसजिद, मंदिर आदि को वे नहीं मानते थे। इसके बावजूद कबीर पंथ आज भारत सहित विश्व के अनेक देशों में प्रतिष्ठित है। वे सदैव अजर- अमर रहेंगे।

अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि कबीर को शांतिमय जीवन प्रिय था और वे अहिंसा, सत्य, सदाचार आदि गुणों के प्रशंसक थे। अपनी सरलता, साधु स्वभाव तथा संत प्रवृत्ति के कारण आज विदेशों में भी उनका समादर हो रहा है। कबीर का पूरा जीवन काशी में ही गुजरा, लेकिन वह मरने के समय मगहर चले गए थे।

वह न चाहकर भी, मगहर गए थे। वृद्धावस्था में यश और कीर्ति की मार ने उन्हें बहुत कष्ट दिया। उसी हालत में उन्होंने बनारस छोड़ा और आत्मनिरीक्षण तथा आत्मपरीक्षण करने के लिये देश के विभिन्न भागों की यात्राएँ कीं। ‘जाति जुलाहा नाम कबीरा, बनि बनि फिरो उदासी।’

इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा को उनके योगदान के लिये सम्मानित किया गया। कबीर साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष मो. सामईन फारूकी ने कहा कि कबीर हिन्दू, मुस्लिम दोनों धर्मो के मार्गदर्शक है। उन्होने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में अष्टभुजा शुक्ल, डा. राममूर्ति चौधरी, मो. वसीम अंसारी, पेशकार मिश्र, सरोज, हरीश दरवेश, भागवत प्रसाद श्रीवास्तव, पं. चन्द्रबली मिश्र, भागवत प्रसाद,राधेश्याम, विनय कुमार श्रीवास्तव, दीनानाथ आदि शामिल रहे।

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