December 3, 2020

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बस्ती: चकबंदी अधिकारी निलंबित, जानिए क्या है पूरा मामला…

बस्ती |मामला उत्तर प्रदेश के जनपद बस्ती का है जहां एकतरफा आदेश करने के आरोप में चकबंदी आयुक्त वी राम शास्त्री ने चकबंदी अधिकारी अंतिम अभिलेख बस्ती प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई डीएम बस्ती की आख्या और संस्तुति पर हुआ। उन्होंने नियम विरूद्ध आदेश करने की आख्या शासन को भेजा था। निलंबित अधिकारी को बंदोबस्त अधिकारी बस्ती के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की जांच उपसंचालक चकबंदी गोरखपुर करेंगे।

शिकायत होने पर डीएम ने कराई जांच

डीएम बस्ती ने उपसंचालक चकबंदी के तौर पर मामले की जांच एएसडीएम से कराई। जांच में पाया गया कि चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने इसरार अली के प्रार्थना पत्र पर विपक्षी को सुनवाई का अवसर दिए बगैर निर्णय दे दिया। यह उच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत पाया गया। मुकदमे की पत्रावली पर कई आपत्तियां पहले से पड़ी हुई थीं। अपील स्तर पर यह आदेश पूर्व में निरस्त हो चुका था। निगरानी भी निरस्त कर दी गई थी। उसके बाद दिया गया निर्णय निर्णय का उल्लंघन है। एसएसडीएम की आख्या पर डीएम ने शासन से कार्रवाई की संस्तुति की थी।

डीएम ने छीना था न्यायिक अधिकार

जांच रिपोर्ट आने के बाद डीएम ने न्यायिक अधिकार छीन लिया था। यह मुकदमा उप संचालक चकबंदी अयोध्या के क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया गया। डीएम की आख्या पर शासन ने प्रकरण की जांच कराई और अयोध्या से अभिलेख तलब कर परीक्षण किया। परीक्षण में चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव दोषी पाए गए और उन्हें निलंबित कर दिया गया।

जनवरी 1979 का है मामला

डीएम बस्ती ने शासन को भेजी आख्या में बताया कि हर्रैया क्षेत्र के सेवरालाल निवासी इसरार अली बनाम मो. शरीफ के बीच चल रहे मुकदमे का निस्तारण तत्कालीन चकबंदी अधिकारी ने 11 जनवरी 1979 को किया था। मुकदमे का निस्तारण सुलहनामा के आधार पर हुआ। इस आदेश के विरूद्ध सहायक चकबंदी अधिकारी के यहां अपील हुई। इसी मुकदमे को चकबंदी अधिकारी अंतिम अभिलेख प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने 18 जून 2020 को अदम पैरवी में एकतरफा आदेश कर दिए।

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