August 4, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

बांग्लादेश: ढाका की जूस फैक्टरी में लगी भीषण आग, 52 लोगों की दर्दनाक मौत, 50 से अधिक झुलसे

बांग्लादेश में फैक्टरी में लगी आग, 52 लोगों की मौत
‘ढाका ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार, इस हादसे में 52 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग झुलस गये। भीषण आग से बचने के लिए कई मजदूर इमारत से कूद गए।

हादसे में 44 कर्मचारी लापता हैं. ऐसे में अपनों को खोजने के लिए लोग घटनास्थल पर पहुंच गए. हादसे में बचे लोगों और उनके रिश्तेदारों का आरोप है कि आग के समय फैक्ट्री का निकास द्वार बंद था. इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री में आग से सुरक्षा के कोई उचित साधन नहीं थे

ढाका: बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बाहरी क्षेत्र में एक फैक्टरी में आग लगने से 52 लोगों की मौत हो गयी है और 50 से अधिक लोग झुलस गये। शुक्रवार को एक खबर में यह जानकारी दी गई।

दमकल अधिकारियों के अनुसार नारायणगंज के रूपगंज में शेजान जूस फैक्टरी में बृहस्पतिवार की शाम लगभग पांच बजे आग लग गई। ऐसी आशंका है कि आग इमारत के भूतल से लगी और रसायनों तथा प्लास्टिक की बोतलों की मौजूदगी के कारण तेजी से फैल गई।

‘ढाका ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार, इस हादसे में 52 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग झुलस गये। भीषण आग से बचने के लिए कई मजदूर इमारत से कूद गए।

खबर के अनुसार, हाशेम फूड्स लिमिटेड के कारखाने की इमारत में आग बुझाने के लिए दमकल की 18 गाड़ियां लगी हुई हैं। इसके अनुसार लोग अपने उन प्रियजनों की तलाश में इमारत के सामने एकत्र हो गए हैं, जो अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में से 44 श्रमिकों की पहचान की पुष्टि की गई है।

बचाए गए श्रमिकों और उनके रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि आग लगने के समय कारखाने का एकमात्र निकास द्वार बंद था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इमारत में आग से सुरक्षा के कोई उचित उपाय नहीं थे।

इस बीच, नारायणगंज जिला अग्निशमन सेवा के उप निदेशक अब्दुल्ला अल अरेफिन ने बताया कि आग पर पूरी तरह से काबू पाने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक आग पर काबू नहीं पाया जाता, तब तक यह कहना संभव नहीं है कि इस हादसे में कितना नुकसान हुआ है और आग लगने का कारण क्या है।’’

जिला प्रशासन ने घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।

बंद थे एग्जिट डोर
जिस वक्त फैक्ट्री में आग लगी तब यहां 1000 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे थे। हालांकि आग लगने के बाद इनमें से अधिकांश लौट गए। रात में मरने वालों की संख्या तीन बताई गई थी। लेकिन जैसे ही बचावकर्मी तीसरी मंजिल पर पहुंचे अचानक से मृतकों की संख्या बढ़ने लगी। तीसरे तल पर बचावकर्मियों को 49 कर्मचारियों के शव मिले। फायर सर्विस के प्रवक्ता देबाशीष बर्धन के मुताबिक सीढ़ी पर लगे एग्जिट डोर बंद थे। इस वजह से कर्मचारी छतों की तरफ नहीं भाग सके। वहीं निचले तल पर तेज आग धधक रही थी, इसलिए वह नीचे भी नहीं जा सके।

बढ़ सकती है संख्या
जलकर मरे लोगों को एंबुलेंस के जरिए मर्चरी ले जाया गया। इस बीच गली में खड़े लोगों ने नारेबाजी की और रास्ता भी रोकने का प्रयास किया। इनमें से कुछ ने पुलिस अफसरों से उलझने की भी कोशिश की। उन्हें हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा। वहीं इमरजेंसी सेवा के लोग पांचवें और छठवें तल पर आग रोकने के प्रयास में लगे थे। फायर सर्विस के प्रवक्ता देबाशीष बर्धन ने कहा कि आग पर काबू पाने के बाद, हम अंदर खोज और बचाव अभियान चलाएंगे। तभी हम किसी और के हताहत होने की पुष्टि कर सकते हैं।

इसलिए लगी आग 
ढाका फायर चीफ दीनू मोनी शर्मा ने बताया कि तीव्र ज्वलनशील केमिकल्स और प्लास्टिक भारी मात्रा में अंदर रखा गया था। इसके चलते ही फैक्ट्री में आग लगी। आग से बचने वाले फैक्ट्री के कर्मचारी मोहम्मद सैफुल ने कहा कि आग लगने के समय अंदर दर्जनों लोग थे। एक दूसरे कार्यकर्ता मामून ने कहा कि भूतल पर आग लगने और पूरे कारखाने में काले धुएं के कारण वह और 13 अन्य कर्मचारी छत पर भाग गए थे। घटनास्थल पर मौजूद कुछ अन्य कर्मचारियों ने बताया कि बीते वर्षों में फैक्ट्री में छोटी—छोटी आग लगने की घटनाएं होती रही हैं। इसके बावजूद सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। इमरजेंसी में फैक्ट्री से बचकर निकलने के लिए केवल दो सीढ़ियां हैं।

कई बार हो चुकी हैं घटनाएं 
गौरतलब है कि औद्योगिक परिसरों, अपार्टमेंट्स और बिल्डिंग्स में आग से तबाही के मामले में  बांग्लादेश का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। हालांकि 2013 में राणा प्लाजा में हुई तबाही के बाद यहां पर सुधार के दावे किए गए हैं। लेकिन आलोचकों के मुताबिक अभी भी यहां सुरक्षा उपाय मानक के हिसाब से नहीं हैं। गौरतलब है कि 2013 में राणा प्लाजा में हुई घटना में 1100 से अधिक लोग मारे गए थे। इसी तरह फरवरी 2019 में ढाका के एक अपार्टमेंट लगी आग में कम से कम 70 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।

 

2013 में बांग्लादेश में हुआ था सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा
बांग्लादेश में 24 अप्रैल 2013 को 9 मंजिला इमारत ढह गई थी. यह बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बड़ा औद्योगिक हादसा माना जाता है. इस हादसे में 1100 लोगों की जान गई थी. सावर इलाके में राना प्लाजा नाम की इस बिल्डिंग में काम करने वाले ज्यादातर लोग कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Newsphere by AF themes.