December 1, 2020

Such Ke Sath

सच के साथ – समाचार

बाइडेन और हैरिस अगले वर्ष 20 जनवरी को लेंगे पद की शपथ

नई दिल्ली |कई दिन की जद्दोजहद और रस्साकशी के बाद आख़िरकर अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए जो बाइडेन के नाम पर मोहर लग ही गई। पेन्सिलवेनिया जीत कर डेमोक्रेट उम्मीदवार बाइडेन ने मौजूदा राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को स्पष्ट शिकस्त दे दी।  

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए हुए बेहद कड़े मुकाबले में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद डेमोक्रेटिक नेता जो बाइडेन ने देश को एकजुट करने का संकल्प लिया और कहा कि अब ‘‘अमेरिका में ज़ख़्मों को भरने का समय’ आ गया है।

बाइडेन और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच राष्ट्रपति पद के लिए हुआ मुकाबला विभाजनकारी और कड़वाहट भरा रहा। इस चुनाव में अमेरिकियों ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया और बाइडेन को जिताया।

बाइडेन ने शनिवार रात जीत के बाद अपने भाषण में कहा, ‘‘मैं ऐसा राष्ट्रपति बनने का संकल्प लेता हूं, जो बांटने नहीं, बल्कि एकजुट करने की कोशिश करेगा, जो डेमोक्रेटिक राज्यों और रिपब्लिकन राज्यों में फर्क नहीं करेगा, बल्कि पूरे अमेरिका को एक नजर से देखेगा।’

उन्होंने कहा, ‘‘यह अमेरिका में जख्मों को भरने का समय है।’’

बाइडेन ने कहा, ‘‘आप लोगों ने मुझमें जो भरोसा दिखाया, मैं उसके लिए आपका आभारी हूं।’’

उन्होंने दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, ‘‘मैं अपने कार्यकाल में अमेरिका की आत्मा को पुन: जीवित करने, देश की रीढ़ की हड्डी-मध्यम वर्ग को फिर मजबूत करने, दुनियाभर में अमेरिका का सम्मान बढ़ाने और देश के भीतर हमें एकजुट करने के लिए काम करूंगा।’’

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार पेन्सिलवेनिया राज्य में जीत दर्ज करने के बाद 77 वर्षीय पूर्व उपराष्ट्रपति बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति होंगे। इस राज्य में जीत के बाद बाइडेन को 270 से अधिक ‘इलेक्टोरल कॉलेज वोट’ मिल गये जो जीत के लिए जरूरी थे।

पेन्सिलवेनिया के 20 इलेक्टोरल वोटों के साथ बाइडेन के पास अब कुल 273 इलेक्टोरल वोट हो गये हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले बाइडेन पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति पद पर रह चुके हैं। वह डेलावेयर के सबसे लंबे समय तक सीनेटर रहे हैं।

भारतवंशी सीनेटर कमला हैरिस अमेरिका में उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित होने वाली पहली महिला हैं। 56 वर्षीय हैरिस देश की पहली भारतवंशी, अश्वेत और अफ्रीकी अमेरिकी उपराष्ट्रपति होंगी।

बाइडेन और हैरिस अगले वर्ष 20 जनवरी को पद की शपथ लेंगे।

जो बाइडेन और कमला हैरिस से भारत को कितना फायदा? ये 10 बातें हैं बड़ी अहम:

वाइट हाउस में जो बाइडेन की एंट्री पक्‍की हो गई है। बाइडेन अमेरिका के अगले राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। इसी के साथ डेमोक्रैट कैंडिडेट जो बाइेडन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन गए हैं। ऐसे में बतौर राष्‍ट्रपति बाइडेन पुराने राष्‍ट्रपतियों की राह पर चलेंगे या नई लकीर खींचेंगे, यह देखने वाली बात होगी। भारत के लिहाज से देखें तो कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां वे वर्तमान राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के ढर्रे पर चलेंगे। कुछ में वे बदलाव कर सकते हैं। 21वीं सदी में भारत और अमेरिका के रक्षा, रणनीतिक और सुरक्षा संबंध मजबूत हुए हैं, फिर राष्‍ट्रपति की कुर्सी पर चाहे रिपब्लिकन बैठा रहा हो या डेमोक्रेट। यही ट्रेंड बाइडेन प्रशासन में भी बरकरार रहने के आसार हैं। लेकिन चीन को लेकर बाइडेन कैंप में भी दो धड़े हैं, जिसका असर भारत पर पड़ सकता है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि बाइडेन प्रशासन का भारत पर रुख कैसा रह सकता है।

नीतियां बनाने में कमला हैरिस का होगा बड़ा रोल

जो बाइडेन के साथ कमला हैरिस भी हैं जो उप-राष्‍ट्रपति होंगी। वह नीतिगत मामलों में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं क्‍योंकि बाइडेन इशारा कर चुके हैं कि वह एक कार्यकाल के लिए ही राष्‍ट्रपति रहेंगे। हैरिस 2024 के लिए राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार हो सकती हैं, ऐसे में विभिन्‍न मुद्दों पर उनकी राय बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाती है।

एक जैसी वैश्विक चुनौतियों से कैसे निपटेंगे?

बाइडेन ने अपने चुनाव प्रसार के दौरान भारतीय-अमेरिकियों से संपर्क किया है। वह भारत के लिए उदार सोच रखते हैं। चूंकि अमेरिका और भारत के रिश्‍ते अब संस्‍थागत हो चले हैं, ऐसे में उसमें बदलाव कर पाना मुश्किल होगा। बाइडेन के प्रमुख रणनीतिकार एंथनी ब्लिंकेन कह चुके हैं, “हम एक जैसी वैश्विक चुनौतियों से बिना भारत को साथ लिए नहीं निपट सकते…. भारत के साथ रिश्‍तों को मजबूत और गहरा करना हमारी उच्‍च प्राथमिकता में रहने वाला है।”

रक्षा और सुरक्षा पर कैसा होगा साथ?

बाइडेन प्रशासन और भारत के बीच रक्षा, रणनीतिक और सुरक्षा संबंध उसी तरफ आगे बढ़ने की संभावना है जो दिशा 2000s से पकड़ी गई है।

चीन के साथ कैसे रहेंगे संबंध?

टीम बाइडेन में चीन को लेकर मतभेद हैं। इसका असर भारत-अमेरिका और भारत-चीन के रिश्‍तों पर भी देखने को मिलेगा। बाइडेन के कुछ सलाहकारों ने चीन को लेकर ट्रंप जैसी राय रखी है। बाकी कहते हैं कि अमेरिकी और चीनी अर्थव्‍यवस्‍थाओं को अलग करना नामुमकिन है, ऐसे में राष्‍ट्रीय सुरक्षा और क्रिटिकल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में अलगाव हो सकता है, इससे ज्‍यादा कुछ नहीं।

मानवाधिकार उल्‍लंघन पर क्‍या स्‍टैंड लेंगे बाइडेन?

बाइडेन प्रशासन भारत में मानवाधिकार उल्‍लंघन पर नजर रख सकता है। इसके अलावा हिंदू बहुसंख्‍यकवाद, जम्‍मू और कश्‍मीर का भी संज्ञान लिया जा सकता है। डेमोक्रेट्स से भरी कांग्रेस में भारत के खिलाफ ऐसी चीजों पर पैनी नजर रह सकती है।

इंडो-पैसिफिक में कैसा रहेगा रुख?

बाइडेन कैम्‍पेन में इंडो-पैसिफिक को लेकर रणनीति साफ नहीं की गई है। चूंकि यह इलाका भारतीय विदेश नीति के केंद्र में है, इसलिए इसपर नजर रखनी ही पड़ेगी।

व्‍यापारिक मामलों पर क्‍या है बाइडेन का मूड?

भारत और अमेरिका के व्‍यापारिक रिश्‍तों में परेशानी रहेगी, चाहे सत्‍ता में कोई भी हो। ओबामा प्रशासन के दौरान भी नई दिल्‍ली और वाशिंगटन में इस क्षेत्र को लेकर तनातनी रहती थी। बाइडेन प्रशासन में भी भारत को व्‍यापार में कोई खास छूट मिलने के आसार नहीं हैं। इसके अलावा बाइडेन का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का अपना वर्शन भी है। बाइडेन के टॉप एडवाइजर बिल टर्न्‍स कह चुके हैं कि ”अमेरिकी विदेश नीति को सबसे पहले घरेलू बाजार को दोबारा खड़ा करने का समर्थन करना ही चाहिए।”

अफगानिस्‍तान में क्‍या रहेगा रवैया?

बाइडेन ने ही प्रस्‍ताव दिया था क‍ि अमेरिकी सेनाअफगानिस्‍तान में केवल काउंटर-टेररिज्‍म के लिए ही रहे। ऐसे में ट्रंप ने सैनिकों को वापस बुलाने का जो आदेश दिया था, उसके वापस लिए जाने की संभावना कम ही है।

H-1B वीजा मुद्दे पर क्‍या होगा?

h-1b-

H-1B वीजा के पुराने रूप में लौटने की संभावना न के बराबर है। हालांकि इससे भारतीयों पर असर पड़ सकता है लेकिन महामारी ने जिस तरह से रिमोट वर्किंग को बढ़ावा दिया है, उससे वह असर कम होने की उम्‍मीद है।

पेरिस समझौते का क्‍या होगा?

बाइडेन निश्‍चित रूप से अमेरिका को वापस पेरिस जलवायु समझौते का हिस्‍सा बनाएंगे। लेकिन भारत कोयला इस्‍तेमाल को लेकर बाइडेन के सामने घिर सकता है।

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...
Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Powered By : Webinfomax IT Solutions .
EXCLUSIVE