August 9, 2022

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बिहार के असिस्टेंट प्रोफेसर ने कॉलेज को 23 लाख लौटाए, कहा- छात्र ही नहीं आते तो सैलरी किस बात की

बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर में एक टीचर ने अपने 2 साल 9 महीने की नौकरी (Job) की पूरी सैलरी (Salary) विश्वविद्यालय को लौटा दी है. इसके पीछे असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant professor) जो वजह बताई है उसको सुनकर लोग हैरान हैं.

न्यूज डेस्क 07 जुलाई |सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों (Teachers) पर अक्सर बच्चों को नहीं पढ़ाने और सरकारी तनख्वाह लेने के आरोप लगते रहते हैं. ऐसे दौर में बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में एक शिक्षक ने अनूठा कदम उठाया है, जिसके बाद से वह माडिया में चर्चा का विषय बन गये हैं. मुजफ्फरपुर के नीतीश्वर कॉलेज में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant professor) डॉ. ललन कुमार ने कक्षा में स्टूडेंट्स की उपस्थिति लगातार शून्य रहने पर अपने 2 साल 9 माह की पूरी सैलरी 23 लाख 82 हजार 228 रुपए लौटा दी है.

 

डॉ ललन ने मंगलवार को इस राशि का चेक बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके ठाकुर को सौंपने पहुंचे और तो लोग हैरान रह गये. पहले तो कुलसचिव ने चेक लेने से मना कर दिया. इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर नौकरी छोड़ने की बात पर अड़ गये तब जाकर उनका चेक लिया गया. डॉ. ललन ने कहा, ‘मैं नीतीश्वर कॉलेज में अपने अध्यापन कार्य के प्रति कृतज्ञ महसूस नहीं कर रहा हूं. इसलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए ज्ञान और अंतरात्मा की आवाज पर नियुक्ति तारीख से अब तक के पूरे वेतन की राशि विश्वविद्यालय को समर्पित करता हूं.’

 

शिक्षण व्यवस्था पर उठाये सवाल
उन्होंने विश्वविद्यालय की गिरती शिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. कहा, ‘जब से यहां नियुक्त हुआ हूं, कॉलेज में पढ़ाई का माहौल नहीं देखा. 1100 स्टूडेंट्स का हिंदी में नामांकन तो है, लेकिन उपस्थिति लगभग शून्य रहने से वे शैक्षणिक दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाए. ऐसे में वेतन लेना अनैतिक है.’ बताया जाता है कि कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास के दौरान भी स्टूडेंट्स उपस्थित नहीं रहे. उन्होंने प्राचार्य से विश्वविद्यालय तक को बताया, लेकिन कहा गया कि शिक्षण सामग्री ऑनलाइन अपलोड कर दें.

 

सितंबर 2019 में हुई थी नियुक्ति
डॉ. ललन की नियुक्ति 24 सितंबर 2019 को हुई थी. वरीयता में नीचे वाले शिक्षकों को पीजी में पोस्टिंग मिली, जबकि इन्हें नीतीश्वर कॉलेज दिया गया. उन्हें यहां पढ़ाई का माहौल नहीं दिखा तो विश्वविद्यालय से आग्रह किया कि उस कॉलेज में स्थानांतरित किया जाए, जहां एकेडमिक कार्य करने का मौका मिले.विश्वविद्यालय ने इस दौरान 6 बार ट्रांसफर ऑर्डर निकाले, लेकिन डॉ. ललन को नजरअंदाज किया जाता रहा. कुलसचिव डॉ. आरके ठाकुर के मुताबिक, स्टूडेंट्स किस कॉलेज में कम आते हैं, यह सर्वे करके तो किसी की पोस्टिंग नहीं होगी. प्राचार्य से स्पष्टीकरण लेंगे कि डॉ. ललन के आरोप कितने सही हैं.

 

प्रोफेसर ने पत्र में लिखा-
24 सितंबर 2019 को बिहार लोकसेवा आयोग (‌BPSC) के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप मे मेरा चयन हुआ था। BRA बिहार यूनिवर्सिटी के तत्कालीन VC राजकुमार मंडिर ने सभी नियमों और शर्तों को धरकिनार करते हुए अपने मनमाने तरीके से सभी चयनित प्रोफेसरों की पोस्टिंग की। उन्होंने मेरिट और रैंक का उल्लंघन करते हुए कम नंबर वाले को PG और अच्छे-अच्छे कॉलेज दे दिए। बेहतर रैंकिंग वाले को ऐसे कॉलेजों में भेजा गया, जहां किसी तरह की कोई क्लास नहीं होती थी।

प्रोफेसर ने पत्र में आगे लिखा, ‘2019 से 2022 तक में छह बार ट्रांसफर-पोस्टिंग हुई। इस बार मैंने चार बार आवेदन लिखकर मांग की कि मेरे कॉलेज में पढ़ाई नहीं होती है। मैं बच्चों को पढ़ाना चाहता हूं। मेरा ट्रांसफर PG डिपार्टमेंट, एलएस कॉलेज या आरडीएस कॉलेज में कर दीजिए, जहां क्लासेज होती है। जिससे मैं बच्चों को पढ़ा सकूं। हर बार भी निवेदन करने के बाद भी मेरा ट्रांसफर नहीं किया गया। अब मैं अपनी अंतरात्मा की सुनते हुए 25 सितंबर 2019 से मई 2022 तक प्राप्त सभी सैलरी विश्वविद्यालय को वापस कर देना चाहता हूं। विद्यार्थियों की संख्या शून्य होने के कारण मैं चाहकर भी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रहा हूं। इस स्थिति में सैलरी स्वीकार करना मेरे लिए अनैतिक है।

 

राष्ट्रपति से मिल चुका है अवॉर्ड
प्रोफेसर डॉ. ललन कुमार ने बताया, ‘मैंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से और पीजी की पढ़ाई जेएनयू से की है। दोनों जगह मैं यूनिवर्सिटी टॉपर रहा। ग्रेजुएशन में एकेडमिक एक्सिलेंस का राष्ट्रपति अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा अपनी एमफिल और PHD भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से की है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार राम कृष्ण ठाकुर ने बताया, ‘किसी भी प्रोफेसर से सैलरी वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। उनकी शिकायत की जांच कराई जाएगी। कॉलेज प्रिंसिपल को इस मामले में तलब किया जाएगा। इसके बाद जिस कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. ललन कुमार जाना चाहते हैं, तत्काल उन्हें वहां डेप्युटेशन दे दिया जाएगा। उनके चेक और इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया है।

 

 

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