September 29, 2022

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बिहार: सैलरी के 23 लाख लौटाने वाले प्रोफेसर ने लिया यू टर्न ,इनके खाते में एक हजार रुपये से भी कम बैलेंस, बोले- गलती हो गई

मुजफ्फरपुर 08 जुलाई |23 लाख 82 हजार रुपये का चेक लौटाए जाने की खबर के बाद चर्चा में आए सहायक प्रोफेसर ललन कुमार ने अब यू टर्न ले लिया है. उन्होंने शुरू में छात्रों के नहीं आने और क्लास नहीं ले पाने का हवाला देते हुए चेक वापस तो कर दिया लेकिन अब वो माफी मांग रहे हैं. उन्होंने सारा बयान वापस लिया है. उन्होंने इस संबंध में पत्र जारी किया है और पूरी बात लिखी है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि वो दुखी थे. निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थे.

 

पत्र में ललन कुमार ने लिखा है- “निवेदन पूर्वक यह कहना है कि अपने स्थानांतरण के लिए मैंने 6 बार आवेदन दिया था लेकिन अब तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई थी इसलिए मैं बहुत दुखी था. मैं कुछ निर्णय करने की स्थिति में अपने को नहीं पा रहा था. मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाया और भावावेश में मैंने आवेदन के साथ अपने वेतन की पूरी राशि का चेक प्रस्तुत किया.”

 

ललन कुमार ने पत्र में आगे लिखा है- “चेक प्रस्तुत करने के बाद वरिष्ठ लोगों और सहकर्मियों से चर्चा करने के बाद मुझे यह बात समझ आई कि ऐसा नहीं करना चाहिए था. महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं के अनुरूप ही आचरण अपेक्षित है. मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि भविष्य में कोई भी भावावेश पूर्ण कदम न उठाया जाए. इस संदर्भ में जो भी लिखित अथवा मौखिक वक्तव्य मेरे द्वारा जारी किए गए हैं उन सबको मैं सहर्ष वापस लेता हूं.”

अकाउंट में 1000 रुपये भी नहीं, चेक दिया 23 लाख से अधिक का

मुजफ्फरपुर के नीतीश्वर कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ ललन कुमार ने एक भी छात्र को नहीं पढ़ा पाने का हवाला देकर वेतन के 23.82 लाख रुपये विश्वविद्यालय को लौटा देने की पेशकश की .ऐसा दावा जब सामने आया तो इसकी हकीकत को जानने का प्रयास किया गया. जिस अकाउंट नंबर का चेक उन्होंने विवि को दिया था, उसमें सिर्फ 970.95 रुपये ही हैं. हालात अब ऐसे हैं कि इस मुद्दे पर विश्विद्यालय और प्रोफेसर दोनों अलग किनारे पर खड़े हैं. विश्विद्यालय प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया है कि यहां बच्चे पढ़ने नहीं आते तो वहीं अब प्रोफेसर के ट्रांसफर-पोस्टिंग के विवाद की तरफ ये मुद्दा मुड चुका है.

नीतीश्वर महाविद्यालय शिक्षक संघ की बैठक

जिस अकाउंट नंबर का चेक प्रोफेसर ने विवि को दिया था, उसमें सिर्फ 970.95 रुपये ही हैं. इधर नीतीश्वर महाविद्यालय शिक्षक संघ, BUTA ने बैठक किया जिसमें प्रोफेसर ललन भी शामिल रहे. बूटा की नीतीश्वर महाविद्यालय ने प्रेस कांफ्रेस करके भी इस मुद्दे पर पक्ष रखा. बैठक के बाद पत्र जारी कर बताया गया कि खुद प्रोफेसर ललन कुमार ने कहा है कि उनके दावे को तोड़ मरोड़ कर मीडिया ने दिखाया. कक्षा में छात्रों की उपस्थिति कम कहा लेकिन मीडिया ने शून्य दिखाया. वहीं BUTA के सचिव डॉ. रवि रंजन ने कहा कि प्रोफेसर ललन कुमार का मुद्दा कक्षा में छात्रों की कम संख्या नहीं बल्कि उनका ट्रांसफर है. जो ललन कुमार इससे पहले भी सोशल मीडिया के कई चैनल पर बता चुके हैं.

 

नियुक्ति, ट्रांसफर को लेकर सामने आया विवाद

वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने एक मुद्दा उछाला कि वो स्नाकोत्तर यानी पीजी विभाग में ट्रांसफर करने का अनुरोध लगातार करते रहे हैं लेकिन उनके साथ पक्षपात होता रहा है. उनके कम मेरिट वाले प्रोफेसरों को भेज दिया गया लेकिन उन्हें नहीं भेजा जाता है. बताया कि दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर का आश्वासन भी मिला लेकिन फिर से अन्य प्रोफेसरों का तबादला कर दिया गया जबकि उन्हें रिक्वेस्ट के बाद भी नहीं भेजा गया. कुल मिलाकर यह मामला केवल सैलरी लौटाने का नहीं दिख रहा बल्कि एक मामले के अंदर कई अन्य मामले इसमें समाहित लग रहे हैं.

प्रोफेसर ललन ने मांगी माफी

वहीं इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा तो प्रोफेसर ललन कुमार ने इस मामले को लेकर माफी मांग ली है. उन्होंने कुलसचिव को माफीनामा भेजा है. प्रिंसिपल को सौंपे माफीनामा में ललन कुमार ने लिखा है कि वो भावना में बहकर ऐसा कर गये. कॉलेज को बदनाम करने की उनकी मंशा नहीं थी.

ललन कुमार ने बंद किया फोन

 

बता दें कि इस मामले के बाद सहायक प्रोफेसर डॉ. ललन कुमार का लगातार फोन बंद आ रहा है. कई बार संपर्क करने की कोशिश भी की गई है लेकिन बात नहीं हो सकी है. वो कॉलेज भी नहीं आ रहे हैं. इधर, मामला पलट जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है.

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