October 3, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

बेबस जनता

अक्सर हमसे पूछा जाता है की आप के पास मत देने का अधिकार है और आप इसे ठीक से इस्तेमाल करे| लेकिन हमलोग ठीक से इस्तेमाल करे कैसे? आज के दिन मे हम मजबूर है कि न चाहते हुए भी हमे ऐसे व्यक्ति को मत देना पड़ता है जिसे हम चाहते भी नही| मान लेते है की हमारे पास तीन उम्मीदवार है चुनाव मैदान में और तीनो ही किसी ना किसी आरोप में फंसे है तो हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता है की इन तीनो में से किसी को ना चुने जिसकी बातें हमेशा अन्ना जी कहते रहते है कि हमारे पास “ इनमे से कोई नहीं ” जैसे विकल्प भी होने चाहिए ताकि जनता पर कोई आरोप ना लगा सके कि इस भ्रष्ट नेता को हम लोगो ने ही चुन कर भेजा है| इस तेज़ी से बदलती हुई दुनिया मे सारे नेता अपनी राजनीति रोटिया सेकने मे लगे हुए है|
जनता कि मुस्किल यहीं ख़त्म नहीं होती | उधारण के तौर पर मान लीजिये कि एक लोक सभा सीट के लिए चुनाव हो रहे है और वहां के उमीदवार है क, ख और ग | और यहाँ पर मतदान करने के लिए कुल 100 मतदाता है और इस मतदान में क को 30 , ख को 30 और ग को 40 मत मिलते है| अब हमारे सविंधान के अनुसार ग को सबसे ज्यादा मत मिले है और वह विजयी घोषित कर दिया जाता है | लेकिन अगर गौर से विचार करे तो देखेंगे कि 100 में से 60 लोग उसे नापसंद करते है यानि 50 प्रतिशत से भी कम लोग पसंद करते है और यही नेता हमारा नेतृत्व करने लगते है | और इसी आधार पर पुरे राज्य या देश का नेतृत्व करने लगते है और कहते है 120 करोड़ के जनता ने हमे चुन कर भेजा है | इस व्यस्था पर विचार कीजिये और सोचिये कि जनता कितनी बेबस है|

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